ग्रीन मोबिलिटी पर MP सरकार का बड़ा कदम:अब इलेक्ट्रिक व्हीकल में चलेंगे निगम अधिकारी, ईवी से होगा कचरा कलेक्शन

मध्यप्रदेश में अब सरकारी कामकाज में इलेक्ट्रिक व्हीकल का इस्तेमाल तेजी से बढ़ने वाला है। पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन कम करने के उद्देश्य से नगरीय प्रशासन विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। अब नगर निगम अधिकारियों को पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इस्तेमाल करने होंगे। नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे ने गुरुवार को इस संबंध में प्रदेश की सभी नगरीय निकायों को निर्देश जारी कर दिए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद बढ़ा फोकस
प्रधानमंत्री मोदी की ईंधन बचाने और पर्यावरण संरक्षण की अपील के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने ग्रीन मोबिलिटी पर तेजी से काम शुरू किया है। प्रदेश में पहले ही 27 मार्च 2025 से इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी लागू की जा चुकी है। इसका उद्देश्य पेट्रोल-डीजल वाहनों पर निर्भरता कम करना और ईवी को बढ़ावा देना है। इसी दिशा में मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके मंत्री भी वाहनों के उपयोग में कटौती कर रहे हैं।
भोपाल में पहले चरण में 50 इलेक्ट्रिक वाहन
भोपाल नगर निगम ने एमपी ईवी पॉलिसी 2025 पर अमल शुरू कर दिया है। पहले चरण में 25 अधिकारियों की सरकारी सवारी को इलेक्ट्रिक व्हीकल से बदला जा रहा है। इसके अलावा निगम ने कुल 50 इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीदी की योजना तैयार की है। ये वाहन अपर आयुक्त, उपायुक्त और सहायक आयुक्त स्तर के अधिकारियों को दिए जाएंगे।
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अब ईवी से होगा डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन
इलेक्ट्रिक व्हीकल सिर्फ अधिकारियों की सवारी तक सीमित नहीं रहेंगे। आने वाले समय में नगर निगम डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए भी ईवी वाहनों का इस्तेमाल करेगा। फिलहाल निगम डीजल कचरा वाहनों को सीएनजी में कन्वर्ट कर रहा है, लेकिन अब इलेक्ट्रिक गार्बेज व्हीकल खरीदने की तैयारी भी शुरू हो गई है। नगर निगम का लक्ष्य अगले साल तक अपने अधिकतर कचरा वाहनों को ईवी में बदलने का है।
निगम खरीदेगा 200 इलेक्ट्रिक गार्बेज व्हीकल
इस समय भोपाल नगर निगम के पास सफाई और कचरा कलेक्शन के लिए 435 वाहन हैं। इनमें 295 सीएनजी वाहन और 140 डीजल वाहन शामिल हैं। अब आने वाले दिनों में इस बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ाई जाएगी। निगम 200 इलेक्ट्रिक मिनी गार्बेज व्हीकल और 50 इलेक्ट्रिक कार खरीदने की तैयारी कर रहा है।
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चार्जिंग स्टेशन की कमी बनी बड़ी चुनौती
हालांकि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के रास्ते में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। भोपाल स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत पहले भी अधिकारियों को ईवी वाहन दिए गए थे लेकिन फिलहाल बहुत कम वाहन उपयोग में हैं। अधिकारियों का कहना है कि शहर में पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन नहीं होने से ईवी का इस्तेमाल सीमित रह जाता है। स्मार्ट सिटी कार्यालय में चार्जिंग प्वाइंट मौजूद है लेकिन दूसरे सरकारी दफ्तरों में अभी ऐसी सुविधा नहीं है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि चार्जिंग नेटवर्क मजबूत किए बिना बड़े स्तर पर ईवी अपनाना आसान नहीं होगा।












