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दो दुल्हनों संग एक मंडप में सात फेरे!बस्तर की अनोखी शादी वायरल

बस्तर के कोंडागांव जिले में हुई यह शादी देखकर हर कोई हैरान है। एक दूल्हा, दो दुल्हन और सात फेरे यह विवाह पूरी तरह से सामाजिक सहमति और परंपरा के साथ संपन्न हुआ। दूल्हा दोनों दुल्हनों का हाथ थामकर अग्नि के फेरे लेता दिख रहा है।
बस्तर की अनोखी शादी वायरल
Ai Generated
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की लोक संस्कृति हमेशा से ही अपने अनोखे रीति-रिवाजों और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध रही है। हाल ही में कोंडागांव जिले के फरसगांव ब्लॉक के ग्राम बैलगांव से एक ऐसा विवाह सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश में सुर्खियां बटोरी हैं। यह शादी इसलिए खास है क्योंकि एक युवक ने दो युवतियों के साथ एक ही मंडप में सात फेरे लिए। शादी कोई छुपकर या गुपचुप तरीके से नहीं हुई। यह पूरा समारोह गाजे-बाजे और सामाजिक सहमति के साथ संपन्न हुआ।

    शादी का कार्ड इंटरनेट पर वायरल

    इस अनोखी शादी का निमंत्रण पत्र (कार्ड) और शादी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कार्ड में दूल्हे के साथ दोनों दुल्हनों के नाम साफ दिखाई दे रहे हैं।

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    वीडियो में देखा जा सकता है कि दूल्हा दोनों दुल्हनों का हाथ थामे अग्नि के फेरे ले रहा है। रस्में और परंपरागत समारोह पूरे विधिपूर्वक संपन्न हुए। वहीं शादी में मौजूद ग्रामीण और दोस्तों ने जमकर डांस और उत्सव का माहौल बनाया, जो किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं लग रहा था।

    नवदंपति कौन हैं?

    • दूल्हा: हितेश, सुपुत्र गजेंद्र यादव, ग्राम बैलगांव
    • प्रथम दुल्हन: फुलबती, सुपुत्री स्व. बुद्धुराम नाग, ग्राम शंकरपुर
    • द्वितीय दुल्हन: यामिनी, सुपुत्री स्व. भावसिंह देहारी, ग्राम बनियागांव

    शादी कोई छुपकर या गुपचुप तरीके से नहीं हुई। यह पूरा समारोह गाजे-बाजे और सामाजिक सहमति के साथ संपन्न हुआ।

    समारोह की प्रमुख रस्में

    शादी के कार्यक्रम दो दिन चले। इस दौरान सभी सामाजिक और पारिवारिक रीति-रिवाजों का पालन किया गया। विवाह स्थल को पूरी तरह से सजाया गया और ग्रामीणों ने उत्सव का आनंद लिया।

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    सामाजिक सहमति और कानून का तालमेल

    स्थानीय लोग बताते हैं कि तीनों परिवारों की आपसी सहमति और समाज के बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलने के कारण यह शादी संभव हुई।
    हालांकि, हिंदू विवाह अधिनियम के तहत द्विपत्नी विवाह की कानूनी मान्यता नहीं है, लेकिन बस्तर की लोक संस्कृति में सामाजिक समरसता और परंपरा को कानून की पेचीदगियों से ऊपर रखा गया।

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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