नवा रायपुर में स्टाफ बस में लगी आग से मंत्रालय कर्मचारियों का फूटा गुस्सा,बोले- कबाड़ बसों से कब तक करेंगे सफर

प्रेम कुमार,रायपुर: छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर स्थित मंत्रालय की स्टाफ बस में आग लगने की घटना के बाद कर्मचारियों का गुस्सा सामने आया है। बड़ी संख्या में कर्मचारी मंत्रालय के बाहर जुटे और बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की। कर्मचारियों ने पुरानी बसों की फिटनेस, तकनीकी स्थिति और नियमित निरीक्षण व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
स्टाफ बस में आग के बाद मंत्रालय में आक्रोश
नवा रायपुर में मंत्रालय कर्मचारियों को लाने-ले जाने वाली स्टाफ बस में आग लगने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद कर्मचारियों में नाराजगी देखी गई और बड़ी संख्या में कर्मचारी मंत्रालय के बाहर एकत्र हुए।कर्मचारियों ने कहा कि स्टाफ बसों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने घटना है की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

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पुरानी और कंडम बसों से कराया जा रहा सफर
कर्मचारियों का आरोप है कि मंत्रालय स्टाफ के लिए संचालित कई बसें काफी पुरानी हो चुकी हैं। उनका कहना है कि बसों की स्थिति को लेकर पहले भी संबंधित अधिकारियों को कई बार शिकायत और जानकारी दी जाती रही है। कर्मचारियों के मुताबिक, कई बार मंत्रालय जाते समय बसें रास्ते में चार से पांच बार तक बंद हो जाती थीं। इसके बावजूद बसों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
आग की घटना ने बढ़ाई सुरक्षा की चिंता
कर्मचारियों का कहना है कि बस में आग लगने की घटना को सिर्फ एक सामान्य तकनीकी घटना मानकर छोड़ना उचित नहीं होगा। उनका दावा है कि इससे पहले भी इन बसों में छोटी-मोटी घटनाएं सामने आती रही हैं और अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जाती रही है। अब सवाल यह है कि क्या बसों की नियमित फिटनेस और तकनीकी जांच वास्तव में निर्धारित मानकों के अनुसार हो रही थी?
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नई बसें या मौजूदा बसों की पूरी जांच की मांग
कर्मचारियों ने मांग की है कि यदि संभव हो तो मंत्रालय स्टाफ के लिए नई और सुरक्षित बसों की व्यवस्था की जाए। वहीं, जब तक नई बसें उपलब्ध नहीं होतीं, तब तक मौजूदा बसों की फिटनेस और तकनीकी स्थिति की नियमित एवं गंभीरता से जांच कराई जाए। कर्मचारियों का कहना है कि केवल कागजी फिटनेस के बजाय बसों के इंजन, वायरिंग, ब्रेक, टायर, फ्यूल सिस्टम और अन्य तकनीकी हिस्सों की वास्तविक स्थिति की जांच सुनिश्चित होनी चाहिए।
फिटनेस जांच पर भी उठे सवाल
कर्मचारियों ने परिवहन विभाग की फिटनेस जांच प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बसों की फिटनेस जांच होने की बात कही जाती है, लेकिन यह स्पष्ट होना चाहिए कि जांच केवल औपचारिकता तक सीमित है या वास्तव में वाहनों का तकनीकी परीक्षण किया जाता है। घटना के बाद कर्मचारियों ने मांग की है कि बसों की फिटनेस रिपोर्ट और तकनीकी निरीक्षण की प्रक्रिया की भी समीक्षा की जाए।
जांच कमेटी करेगी जिम्मेदारी तय?
घटना के बाद मामले की जांच के लिए कमेटी गठित किए जाने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि कमेटी में मंत्रालय के कर्मचारियों के साथ NRDA, निगम के अधिकारी, बस ऑपरेटर और संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों के साथ भी कमेटी की बैठक होने की बात कही गई है। बैठक में घटना के कारणों और जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।
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अब सबसे बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?
कर्मचारियों की मांग है कि जांच सिर्फ घटना के कारणों तक सीमित न रहे, बल्कि यह भी तय किया जाए कि बस की तकनीकी स्थिति खराब थी तो इसके लिए जिम्मेदार कौन था और शिकायतों के बावजूद समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई।जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना के पीछे वास्तविक तकनीकी कारण क्या थे और सुरक्षा व्यवस्था में कहीं लापरवाही हुई या नहीं।




















