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टूटी खिड़की, खाली बेंच और पानी की कमी: स्वतंत्रता दिवस पर CJP का ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान, सरकार पर उठाए सवाल

महाराष्ट्र में सरकारी स्कूलों की बदहाली को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया। CJP संयोजक अभिजीत दीपके ने हिंगोली के स्कूल में पानी, शौचालय, टूटी खिड़कियों और बेंच की कमी का दावा किया। उन्होंने सरकारी स्कूलों की सुविधाओं का डेटा जुटाने, शिक्षा व्यवस्था सुधारने और निजी स्कूलों की फीस सीमित करने की मांग उठाई।
टूटी खिड़की, खाली बेंच और पानी की कमी: स्वतंत्रता दिवस पर CJP का ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान, सरकार पर उठाए सवाल
महाराष्ट्र में सरकारी स्कूलों की बदहाली को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया।

महाराष्ट्र में सरकारी स्कूलों की हालत को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया है। पार्टी के संयोजक अभिजीत दीपके ने 15 अगस्त को हिंगोली जिले के अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी से इस अभियान की शुरुआत की। दीपके का कहना है कि सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का सबसे ज्यादा असर गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चों पर पड़ रहा है। उनका सवाल है कि अगर बच्चों को स्कूल में पानी, शौचालय, बैठने की जगह और ठीक इमारत जैसी जरूरी सुविधाएं ही नहीं मिलेंगी, तो देश को विकसित बनाने का सपना कैसे पूरा होगा?

अपने गांव के स्कूल का लिया जायजा

स्वतंत्रता दिवस पर अभिजीत दीपके अपने गांव पहुंचे थे। ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल होने के बाद वह जिला परिषद के एक सरकारी स्कूल में गए और वहां बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं का जायजा लिया। दीपके ने दावा किया कि स्कूल के शौचालयों में पानी की व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने स्कूल की कुछ खिड़कियां टूटी होने और विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त बेंच नहीं होने की बात भी कही। उनके मुताबिक स्कूल में सिर्फ चार बेंच थीं, जबकि विद्यार्थियों की संख्या इससे ज्यादा थी। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर निजी स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था हो सकती है, तो सरकारी स्कूलों में ऐसी कमी क्यों है?

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‘टूटी खिड़की को बैनर से ढका गया’

दीपके ने अपने गांव के स्कूल की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि टूटी हुई खिड़कियों को एक बैनर लगाकर ढका गया था। उन्होंने कहा कि इस बैनर पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की तस्वीर लगी हुई थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके स्कूल पहुंचने से कुछ समय पहले ही शौचालयों की सफाई कराई गई थी। दीपके के अनुसार, स्कूल में मौजूद सुविधाओं और वहां पढ़ने वाले बच्चों की संख्या के बीच काफी अंतर नजर आया।

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स्कूलों की सुविधाओं का तैयार होगा पूरा डेटा

CJP ने सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति पता करने के लिए एक सूची तैयार की है। इसमें यह दर्ज किया जाएगा कि स्कूलों में बच्चों के लिए जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं या नहीं। दीपके ने बताया कि अभियान के तहत महाराष्ट्र के अलग-अलग तालुकों के सरकारी स्कूलों में जाकर सुविधाओं का जायजा लिया जाएगा। इसके बाद इन स्कूलों से जुटाए गए आंकड़ों को एक जगह इकट्ठा किया जाएगा। पार्टी का कहना है कि इस अभियान का मकसद सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति सामने लाना और सरकार से जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग करना है।

‘10 साल में 94 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूल बंद हुए’

दीपके ने केंद्र सरकार की शिक्षा नीति और बजट को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा के बजट में कटौती की गई है और निजी स्कूलों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी स्कूलों को बंद किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में देश में 94 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूल बंद किए गए हैं। उनका कहना है कि जब ज्यादा बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए स्कूलों की जरूरत है, तब स्कूलों को बंद करना चिंता की बात है। हालांकि, ये आंकड़े और आरोप CJP संयोजक की ओर से लगाए गए हैं।

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‘गरीब बच्चों को भी मिलना चाहिए बराबर मौका’

दीपके का कहना है कि सरकारी स्कूलों में सुविधाओं की कमी के कारण गरीब और ग्रामीण बच्चों को शिक्षा में बराबरी का मौका नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि देश को विकसित बनाने की बात तभी सही मायने में पूरी होगी, जब गांवों और गरीब परिवारों के बच्चों को भी अच्छी शिक्षा और जरूरी सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि ग्रामीण इलाकों के कई बच्चों को स्कूल तक पहुंचने में परेशानी होती है। कुछ विद्यार्थी वीडियो बनाकर अपने स्कूलों तक खराब सड़क होने की शिकायत भी कर रहे हैं।

निजी स्कूलों की फीस पर भी उठाए सवाल

अभिजीत दीपके ने निजी स्कूलों की बढ़ती फीस को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि कई परिवार बच्चों की पढ़ाई के लिए बड़ी रकम खर्च करने को मजबूर हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ परिवार एक से डेढ़ लाख रुपये तक फीस दे रहे हैं। ऐसे में गरीब परिवारों के लिए बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ाना मुश्किल हो जाता है। दीपके ने निजी स्कूलों की फीस सीमित करने की मांग करते हुए कहा कि शिक्षा हर बच्चे को बराबर मिलनी चाहिए। उनके मुताबिक, जब तक बच्चों को समान अवसर और जरूरी सुविधाएं नहीं मिलेंगी, तब तक देश के विकसित होने की बात अधूरी रहेगी।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...

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