ड्रग्स, सट्टा और धोखाधड़ी... तीन मामलों में नाना पटवारी का नाम, फिर भी गिरफ्तारी नहीं

इंदौर। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र उर्फ जीतू पटवारी के छोटे भाई कुलभूषण उर्फ नाना पटवारी का नाम ड्रग्स, ऑनलाइन सट्टा और धोखाधड़ी से जुड़े तीन अलग-अलग मामलों में सामने आने के बावजूद नौ दिन बाद भी उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। पुलिस ने अब तक उससे तीन बार पूछताछ की है, लेकिन गिरफ्तारी के बजाय जांच को वित्तीय लेनदेन और बैंक ट्रांजेक्शन की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।
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ड्रग्स केस के मेमो में दर्ज है नाम
जांच के दौरान ब्राउन शुगर तस्करी के आरोपी इरफान उर्फ गोलू, संजय कौशल उर्फ डॉक्टर, पूर्व ड्राइवर भुरु बैंड और फैजल ने पूछताछ में नाना पटवारी का नाम लिया। पुलिस ने आरोपियों के मेमोरेंडम में उसका नाम दर्ज किया, लेकिन उसे सह-आरोपी नहीं बनाया। जबकि इसी आधार पर अन्य आरोपियों अयान और रेहान को मामले में आरोपी बनाया जा चुका है।
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ऑनलाइन सट्टे में भी सामने आई भूमिका
पुलिस जांच में ऑनलाइन सट्टे के मामले में भी नाना पटवारी की कथित संलिप्तता सामने आई है। डीसीपी जोन-1 नरेंद्र सिंह रावत स्वयं मोबाइल में मिले बैटिंग एप और बैंक ट्रांजेक्शन की पुष्टि कर चुके हैं। इसके बावजूद मामले में नाना को आरोपी नहीं बनाया गया। गुरुवार को पुलिस ने संजय कौशल, मनीष जादौन, दिनेश उर्फ लल्ला चौहान और प्रीतेश त्रिपाठी को आरोपी बनाया, लेकिन नाना का नाम शामिल नहीं किया।
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धोखाधड़ी केस में दस्तावेजी साक्ष्य
धोखाधड़ी के मामले में पुलिस के हाथ दस्तावेजी साक्ष्य भी लगे हैं। पलसीकर कॉलोनी निवासी पायल साहनी की शिकायत पर पुलिस ने नाना पटवारी द्वारा तैयार किया गया कथित अनुबंध (एग्रीमेंट) जब्त कर लिया है। इसके आधार पर भी जांच आगे बढ़ रही है।
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मेडिकल सर्टिफिकेट पर भी सवाल
शुक्रवार को पुलिस ने कॉलोनाइजर सुमित मंत्री और डॉ. दीपक बंसल को पूछताछ के लिए बुलाया था। सुमित मंत्री ने एक दिन पहले डॉ. बंसल द्वारा जारी बीमारी का मेडिकल प्रमाण पत्र पुलिस को सौंपा था। हालांकि शुक्रवार को वह थाने पहुंचा, लेकिन डॉक्टर को देखकर बयान दिए बिना ही वहां से चला गया।डॉ. दीपक बंसल ने पुलिस को बताया कि उन्होंने सामान्य सर्दी-जुकाम के कारण आराम की सलाह देते हुए मेडिकल प्रमाण पत्र जारी किया था, लेकिन सुमित मंत्री ने उसका गलत इस्तेमाल किया।












