नाना पाटेकर होते 'शेखर टुनाइट' के आखिरी मेहमान, अब खाली रहेगी वो कुर्सी; कैंसिल किया शो का फिनाले, पोस्ट VIRAL

एंटरटेनमेंट डेस्क। दिग्गज एक्टर नाना पाटेकर के निधन ने फिल्म इंडस्ट्री और उनके चाहने वालों को गहरे दुख में डाल दिया है। 8 अक्टूबर 2026 को 75 वर्ष की उम्र में नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आई। इस बीच अभिनेता और होस्ट शेखर सुमन ने अपने टॉक शो 'शेखर टुनाइट' के पहले सीजन का फिनाले एपिसोड कैंसिल करने का फैसला किया है। इसकी वजह भी बेहद भावुक है। नाना पाटेकर इस शो के आखिरी मेहमान बनने वाले थे, लेकिन उनके निधन के बाद शेखर सुमन ने उनकी जगह किसी दूसरे कलाकार को बुलाने से इनकार कर दिया। शेखर सुमन ने नाना को याद करते हुए कहा कि उनकी जगह कोई नहीं ले सकता। उनके लिए यह सिर्फ एक शो का फिनाले नहीं, बल्कि उस मुलाकात का अधूरा रह जाना है, जिसका उन्हें बेसब्री से इंतजार था।
नाना पाटेकर बनने वाले थे 'शेखर टुनाइट' के आखिरी मेहमान
शेखर सुमन के टॉक शो 'शेखर टुनाइट' के पहले सीजन का आखिरी एपिसोड नाना पाटेकर के साथ होना तय था। दोनों कलाकारों के बीच इस मुलाकात को लेकर बातचीत भी हुई थी। शेखर सुमन को उम्मीद थी कि इस बातचीत में पुरानी यादें ताजा होंगी, हंसी-मजाक होगा और नाना अपने बेबाक अंदाज में जिंदगी और सिनेमा से जुड़े सवालों के जवाब देंगे। लेकिन नाना पाटेकर के अचानक निधन ने इस योजना को अधूरा छोड़ दिया। शेखर सुमन ने फैसला किया कि वह इस एपिसोड में किसी दूसरे कलाकार को नहीं बुलाएंगे। उनके मुताबिक, नाना के लिए तय की गई जगह को किसी और से भरना उनके प्रति भावनाओं के साथ न्याय नहीं होगा।
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'वह कुर्सी खाली रहेगी', शेखर सुमन की भावुक श्रद्धांजलि
नाना पाटेकर को याद करते हुए शेखर सुमन ने अपने संदेश में उस खाली कुर्सी का जिक्र किया, जिस पर नाना को बैठना था। उन्होंने बताया कि वह इस मुलाकात में नाना के साथ हंसने, पुरानी बातें करने और उनके खास अंदाज को करीब से देखने की कल्पना कर रहे थे। लेकिन अब वह मुलाकात कभी नहीं हो सकेगी। शेखर सुमन की श्रद्धांजलि का भाव यही था कि कभी-कभी जिंदगी हमें किसी अपने से वह बात कहने का मौका नहीं देती, जिसे कहने के लिए हम अगली मुलाकात का इंतजार करते रहते हैं। नाना के साथ होने वाली बातचीत भी इसी तरह अधूरी रह गई।
शेखर सुमन ने बताया, नाना पाटेकर क्यों थे सबसे अलग
शेखर सुमन ने नाना पाटेकर को सिर्फ एक शानदार अभिनेता नहीं, बल्कि एक बेबाक और सच्चे इंसान के रूप में याद किया। नाना की खासियत थी कि वह अपनी बात सीधे तरीके से रखते थे। उनके व्यक्तित्व में गुस्सा, हास्य, भावुकता, मस्ती और बगावती तेवर जैसे कई रंग थे। फिल्म इंडस्ट्री में जहां अक्सर कलाकारों से एक खास छवि बनाए रखने की उम्मीद की जाती है, वहीं नाना पाटेकर अपने अंदाज में जीने के लिए जाने जाते थे। उनकी यही बेबाकी और अभिनय की अनोखी शैली उन्हें दूसरे कलाकारों से अलग बनाती थी। पर्दे पर उनके दमदार संवाद और प्रभावशाली आवाज ने दर्शकों के बीच उनकी एक अलग पहचान बनाई।
क्यों खास है शेखर सुमन का फैसला?
शेखर सुमन ने फिनाले एपिसोड कैंसिल करके नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि देने का फैसला किया। यह निर्णय दिखाता है कि उनके लिए नाना के साथ होने वाली बातचीत कितनी मायने रखती थी।
नाना पाटेकर के निधन पर बॉलीवुड में शोक
नाना पाटेकर के निधन के बाद फिल्म जगत की कई हस्तियों ने उन्हें याद किया और श्रद्धांजलि दी। उनके लंबे अभिनय करियर में हिंदी और मराठी सिनेमा की कई यादगार फिल्में शामिल रहीं। 'क्रांतिवीर', 'परिंदा', 'अब तक छप्पन' और 'वेलकम' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया। गंभीर किरदारों से लेकर हास्य भूमिकाओं तक, नाना ने अपनी प्रतिभा के अलग-अलग रंग दिखाए। उनकी आवाज, संवाद बोलने का अंदाज और किरदारों में उतर जाने की क्षमता ने उन्हें सिनेमा में एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उनके जाने से फिल्म जगत में एक ऐसी जगह खाली हुई है, जिसे भरना आसान नहीं होगा।



















