मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा:सिटी बसों की कमान अब प्रशासन के हाथ में, 398 बसों के साथ बदलेगा पूरा सिस्टम

भोपाल। भोपाल की सिटी बस सेवा को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। अब भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड को राज्य सरकार की नई मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत शामिल कर दिया गया है। इस फैसले के बाद शहर की बस व्यवस्था से राजनीतिक दखल खत्म होने की बात कही जा रही है। अब बस संचालन की जिम्मेदारी स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पास होगी। इस बदलाव से बस सेवा को अधिक तेज और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने का दावा किया गया है।
सिटी बस सेवा में बड़ा प्रशासनिक बदलाव
भोपाल में सिटी बस सेवा के संचालन में अब एक नया ढांचा लागू किया गया है। पहले जहां इस व्यवस्था में महापौर और मेयर इन काउंसिल के सदस्यों की भूमिका अहम होती थी, वहीं अब पूरी जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ में दी गई है। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड को राज्य की नई परिवहन नीति के तहत मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा में शामिल कर दिया गया है। इस बदलाव के बाद बस सेवा से जुड़े सभी प्रमुख निर्णय अब अधिकारी स्तर पर लिए जाएंगे, जिससे राजनीतिक हस्तक्षेप समाप्त होने का दावा किया जा रहा है।
स्मार्ट सिटी CEO के पास रहेगा प्रभार
नई व्यवस्था के अनुसार जब तक नया कार्यकारी बोर्ड पूरी तरह गठित नहीं हो जाता, तब तक भोपाल स्मार्ट सिटी की CEO अंजू अरुण इस सेवा की प्रभारी बनी रहेंगी। अब बसों के संचालन, निगरानी और निर्णय प्रक्रिया में पार्षदों या स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सीधी भूमिका नहीं रहेगी।
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पूरे प्रदेश में नई नीति लागू
राज्य सरकार ने नई परिवहन नीति के तहत पूरे प्रदेश को सात अलग अलग जोनों में विभाजित किया है। भोपाल क्षेत्र के साथ नर्मदापुरम संभाग को भी एक ही क्लस्टर में जोड़ा गया है। इस जोन का संचालन कलेक्टरों की निगरानी में होगा, जो बोर्ड के सदस्य के रूप में काम करेंगे।
रूट और बस संचालन पर प्रशासन का नियंत्रण
नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब बसों के रूट, स्टॉपेज और नई बसों की अनुमति जैसे मामलों में किसी भी तरह की सिफारिशों की भूमिका खत्म कर दी गई है। पहले इन मामलों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों का प्रभाव देखा जाता था लेकिन अब यह पूरा अधिकार क्षेत्रीय परिवहन कंपनी को दे दिया गया है।
398 बसों के साथ नई परिवहन योजना की शुरुआत
भोपाल क्लस्टर में परिवहन सेवा को मजबूत करने के लिए पहले चरण में 398 बसों के संचालन की योजना बनाई गई है। ये बसें 104 अलग अलग रूटों पर चलाई जाएंगी, जो शहर के प्रमुख इलाकों के साथ उपनगरीय क्षेत्रों को भी जोड़ेंगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बसों की खरीदारी खुद नहीं की जाएगी बल्कि निजी ऑपरेटरों के माध्यम से पीपीपी मॉडल के तहत संचालन कराया जाएगा।
तकनीक के जरिए होगी बस सेवा की निगरानी
नई व्यवस्था में बस संचालन को तकनीक से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है। इसके लिए इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जाएगा, जिसके जरिए बसों की लाइव ट्रैकिंग की जाएगी। इससे बसों की समय पर उपलब्धता, चालकों की निगरानी और संचालन की पूरी व्यवस्था को डिजिटल रूप से नियंत्रित किया जाएगा।
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घटती बसों की संख्या और नई उम्मीदें
भोपाल में पहले सिटी बसों की संख्या काफी अधिक थी लेकिन समय के साथ यह घटकर बहुत कम रह गई। पहले जहां साढ़े तीन सौ से अधिक बसें चलती थीं, वहीं अब यह संख्या घटकर लगभग 70 तक पहुंच गई है।











