Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

Peoples Update Special :दूध में पेस्टिसाइड मिला तो पूरा दूध लॉट होगा रिजेक्ट, खरीदी केंद्रों में प्रोसेसिंग प्लांट तक होगी जांच

मप्र राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन (MPCDF) ने दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए पेस्टिसाइड, कीटनाशक और अन्य हानिकारक रसायनों की जांच शुरू कर दी है। यदि किसी किसान के दूध में मानक से अधिक रसायन पाए गए तो पूरे कलेक्शन लॉट को रिजेक्ट किया जाएगा। इसके लिए प्रदेशभर के खरीदी और चिलिंग केंद्रों पर आधुनिक डिजिटल जांच मशीनें लगाई गई हैं।
दूध में पेस्टिसाइड मिला तो पूरा दूध लॉट होगा रिजेक्ट, खरीदी केंद्रों में प्रोसेसिंग प्लांट तक होगी जांच
AI Generated

अशोक गौतम, भोपाल। मध्यप्रदेश राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन (MPCDF) ने दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए पेस्टिसाइड, इन्सेक्टिसाइड (कीटनाशक) समेत अन्य हानिकारक रसायनों की जांच शुरू कर दी है। खरीदी केंद्रों से लेकर प्रोसेसिंग प्लांट तक आधुनिक मशीनों से दूध की जांच की जाएगी। यदि किसी एक किसान के दूध में निर्धारित मानक से अधिक पेस्टिसाइड या अन्य रसायन पाए गए, तो उस कलेक्शन का पूरा लॉट रिजेक्ट कर दिया जाएगा। इसके लिए कलेक्शन सेंटर संचालकों को भी निर्देश जारी किए गए हैं।

किसान स्तर पर होगी निगरानी

एमपीसीडीएफ प्रदेश के ढाई लाख से अधिक दुग्ध उत्पादक किसानों से प्रतिदिन करीब 10 लाख लीटर दूध एकत्र कर रहा है। फेडरेशन का फोकस अब केवल संग्रहण बढ़ाने पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता सुधार पर है। इसके लिए प्रदेशभर में 40 स्थानों पर उन्नत जांच व्यवस्था विकसित की गई है। यदि किसी क्षेत्र से रसायनयुक्त दूध मिलने की शिकायत मिलती है, तो उसकी जांच सीधे किसान स्तर तक की जाएगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित किसान से दूध की खरीदी बंद की जा सकती है।

/img/89/1784476151504

मशीन बताएगी दूध की गुणवत्ता

हर खरीदी, संग्रहण और चिलिंग सेंटर पर डिजिटल गुणवत्ता जांच मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। ये मशीनें दूध का वजन, फैट और अन्य गुणवत्ता मानकों की जांच कर मोबाइल ऐप के माध्यम से स्वत: ऑनलाइन दर्ज करेंगी। इससे मिल्क यूनियन और फेडरेशन मुख्यालय को तत्काल जानकारी मिलेगी। यही मशीनें दूध में मानक से अधिक रसायनों की भी पहचान कर सकेंगी। इस व्यवस्था की शुरुआत उज्जैन से हुई थी, जिसे अब पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है।

प्रति गोवंश उत्पादकता बढ़ाने की तैयारी

प्रदेश में प्रति गोवंश दूध उत्पादकता वर्तमान में लगभग 4.5 लीटर प्रतिदिन है। इसे बढ़ाकर 6.5 लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए नस्ल सुधार, उन्नत एवं हाईब्रिड गोवंश उपलब्ध कराने और किसानों को ऋण सुविधा देने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

Breaking News

पांच साल में 50 लाख लीटर होगी प्रोसेसिंग क्षमता

प्रदेश में वर्तमान में दूध प्रोसेसिंग की क्षमता 18 लाख लीटर प्रतिदिन है, जबकि औसतन 10 लाख लीटर दूध का प्रोसेसिंग हो रहा है। अगले पांच वर्षों में प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाकर 50 लाख लीटर प्रतिदिन करने की योजना है। वर्तमान में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और सागर में बड़े प्रोसेसिंग प्लांट संचालित हैं। इनके अलावा प्रदेश में 11 मिनी डेयरी प्लांट भी संचालित हो रहे हैं।

ये भी पढ़ें: MP UCC Update: एमपी कैबिनेट ने यूसीसी विधेयक को दी मंजूरी, विधानसभा के मानसून सत्र में पेश होगा बिल

ज्यादा केमिकल हुआ तो तुरंत जानकारी मिलेगी

कलेक्शन सेंटरों पर गुणवत्ता जांच के लिए आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। इनके माध्यम से मानक से अधिक रसायन होने की तुरंत जानकारी मिल जाएगी। किसानों को भी जागरुक किया जा रहा है कि वे दुधारू पशुओं को पेस्टिसाइड व इन्सेक्टिसाइड युक्त चारा न खिलाएं और दूध बढ़ाने वाली दवाओं या इंजेक्शन का उपयोग न करें।

डॉ. संजय गोवानी, प्रबंध संचालक, एमपीसीडीएफ

अभी तक किसी भी दूध में हानिकारक रसायन नहीं मिले

खरीदी केंद्रों पर दूध गुणवत्ता की नियमित जांच की जा रही है। अभी तक किसी भी दूध में हानिकारक रसायन नहीं मिले हैं। गुणवत्ता जांच मशीनों से किसानों को उनकी गुणवत्ता के अनुसार उचित मूल्य मिल रहा है।

रमेश मिश्रा, किसान, मऊगंज

ये भी पढ़ें: दमोह: संरक्षित स्थल के जर्जर भवन में ड्यूटी करने मजबूर गार्ड

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

Latest Posts