Peoples Update Special :दूध में पेस्टिसाइड मिला तो पूरा दूध लॉट होगा रिजेक्ट, खरीदी केंद्रों में प्रोसेसिंग प्लांट तक होगी जांच

अशोक गौतम, भोपाल।
किसान स्तर पर होगी निगरानी
एमपीसीडीएफ प्रदेश के ढाई लाख से अधिक दुग्ध उत्पादक किसानों से प्रतिदिन करीब 10 लाख लीटर दूध एकत्र कर रहा है। फेडरेशन का फोकस अब केवल संग्रहण बढ़ाने पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता सुधार पर है। इसके लिए प्रदेशभर में 40 स्थानों पर उन्नत जांच व्यवस्था विकसित की गई है। यदि किसी क्षेत्र से रसायनयुक्त दूध मिलने की शिकायत मिलती है, तो उसकी जांच सीधे किसान स्तर तक की जाएगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित किसान से दूध की खरीदी बंद की जा सकती है।

मशीन बताएगी दूध की गुणवत्ता
हर खरीदी, संग्रहण और चिलिंग सेंटर पर डिजिटल गुणवत्ता जांच मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। ये मशीनें दूध का वजन, फैट और अन्य गुणवत्ता मानकों की जांच कर मोबाइल ऐप के माध्यम से स्वत: ऑनलाइन दर्ज करेंगी। इससे मिल्क यूनियन और फेडरेशन मुख्यालय को तत्काल जानकारी मिलेगी। यही मशीनें दूध में मानक से अधिक रसायनों की भी पहचान कर सकेंगी। इस व्यवस्था की शुरुआत उज्जैन से हुई थी, जिसे अब पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है।
प्रति गोवंश उत्पादकता बढ़ाने की तैयारी
प्रदेश में प्रति गोवंश दूध उत्पादकता वर्तमान में लगभग 4.5 लीटर प्रतिदिन है। इसे बढ़ाकर 6.5 लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए नस्ल सुधार, उन्नत एवं हाईब्रिड गोवंश उपलब्ध कराने और किसानों को ऋण सुविधा देने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
पांच साल में 50 लाख लीटर होगी प्रोसेसिंग क्षमता
प्रदेश में वर्तमान में दूध प्रोसेसिंग की क्षमता 18 लाख लीटर प्रतिदिन है, जबकि औसतन 10 लाख लीटर दूध का प्रोसेसिंग हो रहा है। अगले पांच वर्षों में प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाकर 50 लाख लीटर प्रतिदिन करने की योजना है। वर्तमान में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और सागर में बड़े प्रोसेसिंग प्लांट संचालित हैं। इनके अलावा प्रदेश में 11 मिनी डेयरी प्लांट भी संचालित हो रहे हैं।
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ज्यादा केमिकल हुआ तो तुरंत जानकारी मिलेगी
कलेक्शन सेंटरों पर गुणवत्ता जांच के लिए आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। इनके माध्यम से मानक से अधिक रसायन होने की तुरंत जानकारी मिल जाएगी। किसानों को भी जागरुक किया जा रहा है कि वे दुधारू पशुओं को पेस्टिसाइड व इन्सेक्टिसाइड युक्त चारा न खिलाएं और दूध बढ़ाने वाली दवाओं या इंजेक्शन का उपयोग न करें।
डॉ. संजय गोवानी, प्रबंध संचालक, एमपीसीडीएफ
अभी तक किसी भी दूध में हानिकारक रसायन नहीं मिले
खरीदी केंद्रों पर दूध गुणवत्ता की नियमित जांच की जा रही है। अभी तक किसी भी दूध में हानिकारक रसायन नहीं मिले हैं। गुणवत्ता जांच मशीनों से किसानों को उनकी गुणवत्ता के अनुसार उचित मूल्य मिल रहा है।
रमेश मिश्रा, किसान, मऊगंज
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