MP के पूर्वी जिलों में जोरदार बारिश का अलर्ट, 9 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, गरज-चमक के भी आसार

मध्य प्रदेश में बारिश का दौर अभी थमता नजर नहीं आ रहा है। 5 सितंबर को पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश का जोर रहने वाला है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इन इलाकों में भारी बारिश के साथ गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। ऐसे में लोगों को मौसम पर नजर रखने और जरूरी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
पूर्वी MP में इन जिलों में ज्यादा असर
5 सितंबर को जबलपुर, रीवा, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सतना, सीधी, सिंगरौली और मंडला में बारिश का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है। इन जिलों में कहीं तेज बारिश तो कहीं गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। खासकर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को बारिश के दौरान सतर्क रहने की जरूरत है। तेज बारिश होने पर खेतों, सड़कों और निचले हिस्सों में पानी जमा हो सकता है। लोगों को बिना जरूरत ऐसे स्थानों पर जाने से बचना चाहिए।
पश्चिमी MP में भारी बारिश का खास अलर्ट नहीं
वहीं 5 सितंबर को पश्चिमी मध्य प्रदेश के लिए भारी बारिश की खास चेतावनी नहीं है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पश्चिमी हिस्से में बारिश बिल्कुल नहीं होगी। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, नीमच, धार, खरगोन और खंडवा जैसे जिलों में स्थानीय स्तर पर बारिश या गरज-चमक हो सकती है। कुछ इलाकों में थोड़े समय के लिए तेज बारिश भी देखने को मिल सकती है। इसलिए पश्चिमी MP के लोगों को भी मौसम पूरी तरह साफ मानकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

बारिश के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
जिन जिलों में तेज बारिश हो सकती है, वहां खेतों और निचले इलाकों में पानी भरने की परेशानी हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में कच्ची सड़कों पर फिसलन और जलभराव की स्थिति बन सकती है। छोटी नदियों और नालों में पानी बढ़ने पर उन्हें पार करने की कोशिश न करें। गरज-चमक के दौरान खुले मैदान, पेड़ या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें। अगर आप लंबी दूरी की यात्रा पर निकल रहे हैं तो रास्ते के मौसम की जानकारी पहले जरूर देख लें।
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6 से 8 सितंबर तक भी बारिश का दौर
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में बारिश का असर अगले कुछ दिनों तक बना रह सकता है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 6 से 8 सितंबर तक भी भारी बारिश की चेतावनी बनी हुई है। वहीं 6 सितंबर को पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी भारी बारिश का अलर्ट है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर भारत में बना निम्न दबाव क्षेत्र और उससे जुड़ी मौसम प्रणाली बारिश की गतिविधियों को बढ़ा रही है। इसी वजह से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में आने वाले दिनों में बारिश और गरज-चमक का दौर देखने को मिल सकता है।


















