MP के 70 हजार शिक्षकों को TET से राहत दिलाने की तैयारी!2005-09 में भर्ती टीचर्स को छूट दिलाने की कोशिश, सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार

मध्यप्रदेश सरकार करीब 70 हजार शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से राहत दिलाने के लिए एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रही है। स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि 2005 से 2009 के बीच भर्ती हुए शिक्षकों ने पहले ही सरकारी चयन परीक्षा पास कर नियुक्ति हासिल की थी, इसलिए उन्हें दोबारा TET देने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। यदि सुप्रीम कोर्ट सरकार की इस दलील को स्वीकार कर लेता है तो हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिल सकती है।
सितंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट आदेश के बाद शुरू हुआ विवाद
सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2025 के आदेश के बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने अप्रैल 2026 में निर्देश जारी किए थे कि स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग के उन सभी शिक्षकों के लिए जुलाई-अगस्त में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) आयोजित कराई जाए जिनकी नियुक्ति 1998 से 2009 के बीच, यानी शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून लागू होने से पहले हुई थी। इस आदेश से प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षक प्रभावित होंगे।
5 साल से ज्यादा सेवा बाकी तो TET अनिवार्य
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच साल से कम बची है, उन्हें TET से छूट मिलेगी। वहीं जिनकी सेवा अवधि पांच साल से अधिक है उनके लिए TET पास करना अनिवार्य होगा। यदि कोई शिक्षक निर्धारित समय में परीक्षा पास नहीं करता है तो उसे अनिवार्य सेवानिवृत्ति का सामना करना पड़ सकता है। पहले TET पास करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2027 तय की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दिया गया।
2005-09 में भर्ती शिक्षकों को छूट दिलाने की तैयारी
स्कूल शिक्षा विभाग का तर्क है कि 2005-06 और 2008-09 में भर्ती हुए करीब 70 हजार शिक्षकों ने सरकार द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा पास कर नियुक्ति प्राप्त की थी। हालांकि यह परीक्षा NCTE के मानकों के अनुसार शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) नहीं थी। अब सरकार सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध करेगी कि इन शिक्षकों को दोबारा TET देने से छूट दी जाए क्योंकि वे पहले ही चयन प्रक्रिया पूरी कर सरकारी सेवा में आ चुके हैं।
एक सप्ताह में दायर हो सकती है नई याचिका
सूत्रों के अनुसार विधि विभाग और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से राय लेने के बाद राज्य सरकार एक सप्ताह के भीतर नई याचिका दाखिल कर सकती है। हालांकि विभागीय अधिकारियों का मानना है कि राहत मिलने की संभावना सीमित है, लेकिन शिक्षकों के हित को देखते हुए यह कानूनी प्रयास किया जा रहा है। यदि अदालत राहत देती है तो TET के दायरे में आने वाले करीब आधे शिक्षकों को इसका लाभ मिल सकता है।
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व्यापमं के जरिए हुई थी भर्ती
स्कूल शिक्षा विभाग ने 2005-06 में पहली बार व्यापमं (व्यावसायिक परीक्षा मंडल) के माध्यम से शिक्षक भर्ती परीक्षा आयोजित की थी। इसके बाद 2008-09 में भी व्यापमं के जरिए भर्ती कर शिक्षकों की नियुक्ति हुई। वहीं 2010-11 और 2012-13 में गुरुजी और अनुदेशकों की भर्ती परीक्षा आयोजित की गई, जिसके बाद उन्हें अध्यापक के रूप में नियुक्त किया गया।
पहले भी राहत नहीं दे चुका है सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षक संगठनों और स्कूल शिक्षा विभाग ने अलग-अलग याचिकाएं दायर कर TET से छूट की मांग की थी लेकिन अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि पात्रता परीक्षा देना अनिवार्य होगा और इस शर्त में कोई छूट नहीं दी जा सकती। हालांकि कोर्ट ने शिक्षकों को राहत देते हुए परीक्षा पास करने की समय-सीमा एक साल बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी। साथ ही यह भी कहा कि जो शिक्षक पहली बार में सफल नहीं होंगे, उन्हें बाद में होने वाली हर TET परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा।
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65 से ज्यादा पुनर्विचार याचिकाएं हो चुकी हैं खारिज
TET को लेकर सुप्रीम कोर्ट अब तक 65 से अधिक पुनर्विचार याचिकाएं खारिज कर चुका है। ये याचिकाएं विभिन्न राज्य सरकारों, शिक्षक संगठनों और व्यक्तिगत शिक्षकों की ओर से दायर की गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि RTE Act का उद्देश्य सभी शिक्षकों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता सुनिश्चित करना है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि NCTE की अधिसूचनाएं मूल कानून से ऊपर नहीं हो सकतीं और नौकरी जाने की आशंका के आधार पर TET की अनिवार्यता समाप्त नहीं की जा सकती। बेंच ने कहा कि यदि बिना TET योग्यता वाले शिक्षकों को सेवा में बने रहने दिया गया तो इसका सीधा असर आने वाली पीढ़ियों की शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ेगा। इसलिए सभी पात्र शिक्षकों को निर्धारित समय के भीतर TET पास करना अनिवार्य होगा।












