PU Special :स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री छह दिन में सिर्फ 1035 प्लॉट तक सिमटी, 19 जिलों में एक भी रजिस्ट्री नहीं

पुष्पेन्द्र सिंह, भोपाल। छह दिन में औसतन 8.23 लाख संपत्तियों की रजिस्ट्री की कार्रवाई शुरू हो जानी चाहिए थी, लेकिन अब तक इसकी तुलना में बेहद कम कार्रवाई हुई है। सबसे ज्यादा कार्रवाई रायसेन में 785 प्लॉटों की हुई है, जबकि उमरिया और मंडला में पटवारी सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है। पटवारी पंजीयन दस्तावेज में खुद को निष्पादक या विक्रेता बनाए जाने से रिकॉर्ड की गलती और स्वामित्व विवाद की स्थिति में व्यक्तिगत कानूनी जोखिम की आशंका जता रहे हैं। शासन स्तर पर अब पटवारी की भूमिका में बदलाव कर बीच का रास्ता निकालने की तैयारी है और तीन सदस्यीय कमेटी भी अपनी रिपोर्ट तैयार कर चुकी है। पटवारियों के कानूनी जोखिम लेने से इनकार के चलते प्रक्रिया अटक गई है, जिसे देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को विभाग के अफसरों को तलब किया है।
बैंक से लोन मिल रहा तो रजिस्ट्री की जरूरत क्यों?
बैतूल जिले की प्रभात पट्टन तहसील के ग्राम धावला निवासी प्रकाश मुदाफले की संपत्ति का मामला योजना की प्रक्रिया पर अलग सवाल खड़ा करता है। उपलब्ध खसरा नकल में संपत्ति प्रकाश के नाम दर्ज है और रिकॉर्ड ऑनलाइन भी उपलब्ध है, वहीं इसी संपत्ति के आधार पर बैंक से लोन दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब संपत्ति राजस्व रिकॉर्ड में पहले से उसके नाम दर्ज है और उसके आधार पर बैंक ऋण भी मिल रहा है, तो उसी संपत्ति की स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री की जरूरत क्यों पड़ रही है। अगर प्रकाश पहले से राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज मालिक हैं और अब वही व्यक्ति पंजीयन दस्तावेज में खरीदार बनेंगे, तो विक्रेता कौन होगा, इसी बिंदु को लेकर पटवारी भी कानूनी जिम्मेदारी पर सवाल उठा रहे हैं।
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2022 के सरकारी पत्र से प्रक्रिया पर बढ़ा सवाल
13 अप्रैल 2022 को आयुक्त, भू-अभिलेख, मध्यप्रदेश की ओर से राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक के संदर्भ में जारी पत्र में आबादी भूमि में निवासरत भूखंड धारकों के अधिकार अभिलेख तैयार किए जाने की प्रक्रिया का उल्लेख है। पत्र के अनुसार आबादी भूमि में निवासरत भूखंड धारक ग्राम स्थापित होने के समय से भूमि स्वामी हक में भूमि धारण करते हैं और वर्तमान में उनके अथवा उनके वारिसों के नाम से अधिकार अभिलेख तैयार किए जा रहे हैं। यानी योजना के तहत अधिकार अभिलेख तैयार करने का उद्देश्य मौजूदा धारक के नाम स्वामित्व संबंधी रिकॉर्ड तैयार करना है। ऐसे में अब उसी संपत्ति के पंजीयन से कौन-सा अतिरिक्त कानूनी अधिकार मिलेगा, यह सरकार को स्पष्ट करना होगा।
पटवारियों ने कहा- रिकॉर्ड की गलती का जोखिम हमारा क्यों?
पंजीयन अभियान शुरू होते ही पटवारी संगठनों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि पंजीयन दस्तावेज में उन्हें व्यक्तिगत रूप से निष्पादक या विक्रेता बनाए जाने से भविष्य में रिकॉर्ड की त्रुटि, स्वामित्व विवाद और न्यायालयीन मामले की स्थिति में व्यक्तिगत कानूनी जोखिम पैदा हो सकता है। इसी कारण कई स्थानों पर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है। जानकारी के अनुसार अब पटवारी को व्यक्तिगत रूप से निष्पादक यानी विक्रेता बनाने के बजाय शासन के नाम से प्रक्रिया कराने की दिशा में बदलाव पर विचार किया जा रहा है।
तीन सदस्यीय कमेटी देगी रिपोर्ट
राज्य शासन ने प्रमुख राजस्व आयुक्त निधि निवेदिता की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है और विवाद और टकराव खत्म करने की संभावना है। शासन स्तर पर पटवारी की भूमिका में बदलाव को लेकर भी विचार किया जा रहा है, ताकि पंजीयन की प्रक्रिया आगे बढ़ सके। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि स्वामित्व योजना में अधिकार अभिलेखों की रजिस्ट्री के अभियान में जल्द गति आएगी और पटवारियों की समस्या दूर करने का प्लान बनाया गया है।
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6 दिनों में 19 जिलों में एक भी रजिस्ट्री नहीं
प्रदेश में कुल 55 जिले हैं और पंजीयन का लक्ष्य 50 लाख रखा गया है, जबकि कुल प्लॉट 49,39,105 और लाभार्थियों की संख्या 72,33,598 है। 22 सितंबर तक सिर्फ 1,035 प्लॉटों पर कार्रवाई शुरू हुई, जबकि छह दिन में अपेक्षित कार्रवाई 8.23 लाख थी। 19 जिलों में एक भी रजिस्ट्री शुरू नहीं हुई है, उमरिया और मंडला में पटवारी सत्यापन चल रहा है और सबसे ज्यादा कार्रवाई रायसेन में 785 प्लॉटों की हुई है। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने बताया कि स्वामित्व योजना में अधिकार अभिलेखों की रजिस्ट्री के अभियान में जल्द गति आएगी। पटवारियों की समस्या दूर करने का प्लान बनाया गया है। मुख्यमंत्री के सामने पूरी जानकारी रखने के बाद बीच का रास्ता निकाला जाएगा।




















