PU Special :चैटजीपीटी नहीं किताब खोलकर पढ़ो... पिता की बात पर रूठा बच्चा, प्रदेश में एक साल में घर छोड़ने के 22 मामले

मध्यप्रदेश में पढ़ाई के तरीके और माता-पिता की सख्ती को लेकर एक साल में 22 बच्चों के घर छोड़ने के मामले सामने आए। चैटजीपीटी, वीडियो और ऑनलाइन पढ़ाई भी बनी वजह।
चैटजीपीटी नहीं किताब खोलकर पढ़ो... पिता की बात पर रूठा बच्चा, प्रदेश में एक साल में घर छोड़ने के 22 मामले
चैटजीपीटी नहीं किताब खोलकर पढ़ो...

पल्लवी वाघेला, भोपाल। ‘किताब खोलकर पढ़ो, इससे पढ़ी हुई चीज ज्यादा समय तक याद रहती है। चैटजीपीटी की आदत ठीक नहीं है...’ पिता की यह समझाइश 15 साल के एक बच्चे को इतनी नागवार गुजरी कि वह नाराज होकर घर से निकल गया। बच्चे का कहना था कि उसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से पढ़ाई करना ज्यादा आसान और तेज लगता है, जबकि पिता पारंपरिक तरीके से किताब पढ़कर पढ़ाई करने पर जोर दे रहे थे। घर से निकलने के बाद बच्चे को रेस्क्यू किया गया। काउंसलिंग के दौरान उसने बताया कि पिता की इसी बात को लेकर वह नाराज था। यह मामला अब बदलते दौर में बच्चों की पढ़ाई के तरीके और माता-पिता की अपेक्षाओं के बीच बढ़ते अंतर की ओर भी इशारा कर रहा है।

पढ़ाई के तरीके को लेकर बच्चों और माता-पिता में टकराव

यह अकेला मामला नहीं है। पढ़ाई के तरीके लगातार निगरानी और माता-पिता की सख्ती को लेकर बच्चों के घर छोड़ने के मामले सामने आ रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 15 सितंबर 2025 से अब तक एक साल में प्रदेश में ऐसे 22 मामले सामने आए हैं जिनमें पढ़ाई को लेकर बच्चों और माता-पिता के बीच विवाद हुआ और इसके बाद बच्चों ने घर छोड़ दिया। इन मामलों में कहीं सुबह जल्दी उठकर पढ़ने का दबाव था, तो कहीं लिख-लिखकर उत्तर याद करने की बात। कुछ बच्चे ऑनलाइन क्विज, डिजिटल नोट्स और शैक्षणिक वीडियो के जरिए पढ़ना चाहते थे जबकि माता-पिता उन्हें पारंपरिक तरीके से पढ़ाई करने के लिए कहते रहे।

मां ने कहा- सुबह जल्दी उठकर पढ़ो, बेटी घर से निकल गई

भोपाल में नौवीं कक्षा की एक छात्रा को रेस्क्यू किया गया। काउंसलिंग में उसने बताया कि उसकी मां रोज सुबह जल्दी उठकर पढ़ने के लिए कहती थीं। छात्रा का कहना था कि वह सुबह जल्दी नहीं उठ पाती थी। वहीं उसकी मां रात में देर तक पढ़ने की अनुमति भी नहीं देती थीं। इसी बात को लेकर घर में विवाद हुआ और अगले दिन छात्रा घर से निकल गई। मां का कहना था कि रात में पढ़ाई के बजाय बच्ची दोस्तों से चैटिंग में ज्यादा समय बिताती थी। उनका मानना था कि सुबह दिमाग फ्रेश रहता है और उस समय पढ़ाई ज्यादा अच्छी तरह हो सकती है। इसी वजह से वह बेटी को सुबह पढ़ने के लिए कहती थीं और रात में देर तक जागने से रोकती थीं।

लिख-लिखकर याद कराने पर जोर देते रहे पिता

भोपाल का एक 11 वर्षीय बच्चा उज्जैन जिले में रेस्क्यू हुआ। उसने काउंसलिंग के दौरान बताया कि उसके पिता हर उत्तर को लिख-लिखकर याद करने के लिए कहते थे। इसके उलट बच्चे का कहना था कि उसे यूट्यूब पर उपलब्ध शैक्षणिक वीडियो और डिजिटल नोट्स से चीजें जल्दी समझ आती हैं। एक दिन पिता ने उसे ज्यादा डांट दिया जिसके बाद बच्चा घर से निकल गया। पिता का तर्क था कि बच्चा लिखने से बचता है और इसी वजह से परीक्षा में उसके अंक कटते हैं। इसलिए वह उसे उत्तर लिखकर याद करने के लिए कहते थे।

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ऑनलाइन क्विज और मॉक टेस्ट से पढ़ना चाहता था किशोर

इसी तरह इंदौर में भी दसवीं कक्षा के एक बच्चे का मामला सामने आया। उसकी मां उसे गलत उत्तर कॉपी में कई बार लिखकर याद करने के लिए कहती थीं। किशोर इसके बजाय ऑनलाइन क्विज और मॉक टेस्ट के जरिए तैयारी करना चाहता था। पढ़ाई के तरीके को लेकर दोनों के बीच रोज विवाद होने लगा। आखिरकार किशोर घर से निकल गया। काउंसलिंग के दौरान उसने कहा 'मैं पढ़ना चाहता हूं, लेकिन अपने तरीके से।'

बच्चों के सीखने का तरीका बदल रहा है

काउंसलर दिव्या दुबे मिश्रा के मुताबिक आज के बच्चे किताबों के साथ वीडियो, इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे माध्यमों का इस्तेमाल करके भी सीख रहे हैं। ऐसे में अगर माता-पिता यह तय कर दें कि पढ़ाई केवल उनके बताए तरीके से ही करनी है, तो बच्चे पर दबाव बढ़ सकता है। उनका कहना है कि लगातार डांटना, हर समय नंबरों की चिंता कराना या सुबह से रात तक पढ़ाई पर नजर रखना भी बच्चे पर उल्टा असर डाल सकता है। पढ़ाई से बच्चे को जोड़ने के लिए पहले यह समझना जरूरी है कि वह किस तरीके से चीजों को बेहतर तरीके से सीख पा रहा है। काउंसलर के अनुसार बच्चों के साथ अनुशासन बनाए रखना जरूरी है, लेकिन उसके साथ उन्हें अपनी बात रखने और सीखने के अलग-अलग तरीकों को आजमाने की गुंजाइश भी मिलनी चाहिए। माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद बना रहे तो पढ़ाई को लेकर होने वाले टकराव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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डिजिटल पढ़ाई और पारंपरिक तरीके के बीच संतुलन जरूरी

इन मामलों में एक समान बात यह सामने आती है कि बच्चे पढ़ाई से बचना नहीं चाहते, बल्कि कई बार वे पढ़ने और समझने का अपना तरीका चुनना चाहते हैं। दूसरी ओर माता-पिता का जोर अक्सर लिखकर याद करने, तय समय पर पढ़ने और परीक्षा में बेहतर अंक हासिल करने पर होता है। बदलते दौर में किताब, शिक्षक, डिजिटल सामग्री, शैक्षणिक वीडियो, ऑनलाइन अभ्यास और एआई जैसे माध्यम एक-दूसरे के विकल्प के बजाय पढ़ाई के अलग-अलग साधन हो सकते हैं। बच्चों की जरूरत और उनकी सीखने की शैली को समझते हुए इन माध्यमों के बीच संतुलन बनाना परिवारों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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