MP में सफाईकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, भोपाल में 400 से ज्यादा कचरा गाड़ियां खड़ी

भोपाल। वेतन बढ़ाने, स्थायी करने और सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने सहित चार मांगों को लेकर मध्यप्रदेश के सफाईकर्मी बुधवार से हड़ताल पर चले गए हैं। इसका असर राजधानी भोपाल में भी दिखाई दिया। शहर के गली-मोहल्लों और बाजारों से कचरा नहीं उठाया गया। डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन में लगी 400 से अधिक गाड़ियां भी खड़ी कर दी गईं। सफाईकर्मियों ने साफ किया है कि सरकार के साथ बातचीत के बाद ही हड़ताल खत्म करने पर फैसला लिया जाएगा। मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होने पर आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रखने की चेतावनी दी गई है। अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन (7262) के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट के मुताबिक संगठन के सभी पदाधिकारियों ने आपसी सहमति से हड़ताल का निर्णय लिया है। बुधवार को नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रमुख सचिव मनोज दुबे से मुलाकात प्रस्तावित है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि बातचीत में मांगों पर सहमति नहीं बनी तो दीपावली पर भी कचरा नहीं उठाया जाएगा।
प्रदेश के एक लाख से अधिक कर्मचारियों के काम बंद करने का दावा
यूनियन का दावा है कि प्रदेश के 16 नगरीय निकायों और 374 नगर परिषदों के एक लाख से अधिक सफाईकर्मी काम बंद कर रहे हैं। हड़ताल के दौरान घरों से डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के साथ सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई भी नहीं होगी। इससे शहरों में कचरा जमा होने और सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।
भोपाल में रोज निकलता है करीब 850 टन कचरा
राजधानी में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए 400 से अधिक गाड़ियां संचालित होती हैं। प्रत्येक गाड़ी रोजाना दो से तीन ट्रिप लगाती है। इन गाड़ियों से एकत्रित कचरा शहर के 17 गार्बेज स्टेशनों तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद कैप्सूल टैंकरों के जरिए कचरे को आदमपुर छावनी भेजा जाता है। शहर से प्रतिदिन करीब 850 टन कचरा निकलता है। हड़ताल के कारण कचरा कलेक्शन से लेकर उसके परिवहन तक की पूरी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। बुधवार को गाड़ियां खड़ी रहने और सफाई नहीं होने से घरों, गलियों और बाजारों में कचरा उठाव का काम प्रभावित रहा।
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सफाईकर्मियों की ये हैं चार प्रमुख मांगें
यूनियन ने सरकार के सामने चार मांगें रखी हैं:
- सरकारी कर्मचारी का दर्जा: सफाईकर्मियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
- अनुकंपा नियुक्ति: पति या पत्नी की मृत्यु होने पर दूसरे जीवनसाथी को अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता मिले।
- न्यूनतम वेतन: सफाईकर्मियों का न्यूनतम वेतन 25 हजार रुपए तय किया जाए।
- स्थायीकरण और ठेका व्यवस्था खत्म: सभी सफाईकर्मियों को स्थायी किया जाए और ठेका व्यवस्था समाप्त की जाए।
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हड़ताल से एक दिन पहले भी किया था प्रदर्शन
हड़ताल शुरू होने से पहले मंगलवार को भी सफाईकर्मियों ने भोपाल में प्रदर्शन किया था। कर्मचारी मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपना चाहते थे लेकिन उनके मुताबिक कोई जिम्मेदार अधिकारी ज्ञापन लेने नहीं पहुंचा। इससे नाराज कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने की रणनीति बनाई। पुलिस ने जहांगीराबाद चौराहे पर बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इसके बाद सफाईकर्मी करीब दो घंटे तक सड़क पर बैठे रहे। समझाइश के बाद उन्होंने जाम खत्म किया, लेकिन रात में शाहजहांनी पार्क में धरना जारी रखा। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। उनका कहना है कि जब तक सरकार मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।




















