सीहोर में कोटवारों की हड़ताल से राजस्व कामकाज प्रभावित, 28 अक्टूबर तक धरना जारी रखने का ऐलान

सीहोर। फटी वर्दी, लंबित मांगें और सरकार की कथित अनदेखी से नाराज जिले के कोटवारों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। मध्य प्रदेश आजाद कोटवार कर्मचारी संघ के आह्वान पर सीहोर जिले के कोटवार जिला मुख्यालय स्थित टाउन हॉल के पास धरने पर बैठे हैं। शनिवार को भी उनकी हड़ताल जारी रही। कोटवारों ने 28 अक्टूबर तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है। इस हड़ताल का सीधा असर राजस्व विभाग के जमीनी कामकाज पर दिखाई देने लगा है, जिससे किसानों की परेशानियां बढ़ रही हैं।
फटी वर्दी पहनकर ड्यूटी करने से साफ इनकार
कोटवारों का कहना है कि उन्हें उपलब्ध कराई गई खाकी वर्दी अब फट चुकी है और गलने के कारण पहनने लायक नहीं बची है। राजस्व विभाग की ओर से दी जा रही सिली हुई वर्दी को लेकर भी उन्होंने नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि जिन कर्मचारियों पर गांवों में सरकारी व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्व निभाने की जिम्मेदारी है, उनकी बुनियादी जरूरतों तक की अनदेखी की जा रही है। इसी के विरोध में कोटवारों ने फटी वर्दी पहनकर काम करने से साफ इनकार कर दिया है।
तीन सूत्रीय मांगों पर अड़े कोटवार
कोटवारों की प्रमुख मांग है कि उन्हें सेवाभूमि का मालिकाना हक दिया जाए, सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए और वर्दी के लिए मिलने वाली राशि सीधे उनके बैंक खातों में जमा कराई जाए। कोटवारों का कहना है कि वर्षों से गांवों में जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद उनकी सेवा और सुविधाओं से जुड़े सवालों का समाधान नहीं हो रहा है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि मांगों पर ठोस पहल होने तक उनका विरोध जारी रहेगा।
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शिवराज सिंह चौहान का जिक्र, वर्तमान सरकार पर निशाना
मध्य प्रदेश आजाद कोटवार कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष छगनलाल मालवीय ने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में कोटवारों को पुलिस की तरह खाकी वर्दी उपलब्ध कराई गई थी। उनके केंद्र में जाने के बाद वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार में उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मालवीय ने कहा कि वर्दी की स्थिति खराब हो चुकी है और कोटवार अपनी मांगों को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
राजस्व के काम प्रभावित, किसानों की बढ़ीं मुश्किलें
हड़ताल का असर गांवों में राजस्व संबंधी गतिविधियों पर पड़ रहा है। सीमांकन, बंटवारे, कब्जा दिलाने जैसी कार्रवाइयों के साथ किसानों तक सूचनाएं पहुंचाने और उनके बीच सरकारी संदेशों के आदान-प्रदान का काम भी प्रभावित हो रहा है। कोटवारों की अनुपस्थिति में तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक (आरआई) और पटवारियों को मैदानी कामकाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसका खामियाजा उन किसानों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें अपने राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।
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28 अक्टूबर तक आंदोलन, धरने में सैकड़ों कोटवार शामिल
संघ के आह्वान पर जिले के विभिन्न गांवों के ग्राम चौकीदार और कोटवार आंदोलन में शामिल हैं। धरना-प्रदर्शन में जिला उपाध्यक्ष कालूराम, तहसील अध्यक्ष अमर सिंह, उपाध्यक्ष राकेश मालवीय, लालू सेन इछावर, राजमल, जितेंद्र, गोपाल सिंह, रामभरोस, मांगीलाल, राधेश्याम, आनंद, संतोष मालवीय, गोपाल सिंह अहिरवार, अजब सिंह सेवनिया, खुशीलाल, रमेश प्रसाद और बाबूलाल भारती सहित अनेक कोटवार मौजूद रहे। कोटवारों की हड़ताल ने गांवों में राजस्व व्यवस्था से जुड़े कामकाज को प्रभावित कर दिया है। अब निगाहें सरकार के रुख पर टिकी हैं कि वह मांगों पर बातचीत कर समाधान निकालती है या आंदोलन के चलते किसानों की मुश्किलें और बढ़ती हैं।




















