PU Special :अघोषित बिजली कटौती से हालात भयावह; मंत्री बोले-दूसरे राज्यों से मांग के मुताबिक सप्लाई नहीं, किसानों को फसलों की चिंता

राजीव सोनी, भोपाल। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों बिजली संकट से लोग भारी परेशान हैं। बिजली कंपनियां और सरकार भले ही 24 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा करें, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है। प्रदेश के ज्यादातर जिलों में मेंटेनेंस और लोड शेडिंग के नाम पर 7-8 घंटे तक बिजली कटौती होने की शिकायतें हैं। कई जिलों में रात के समय भी बिजली गुल हो रही है। मांग और आपूर्ति में करीब 1400 मेगावाट का अंतर आने से यह स्थिति बनी है। इधर, किसानों ने बिजली कटौती के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं।
सीएमडी ने बुलाई अफसरों की बुलाई
प्रदेश की तीनों बिजली वितरण कंपनियों में बिजली संकट को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हलचल है। बिजली वितरण कंपनी के सीएमडी विशेष गढ़पाले ने इस मुद्दे पर अधिकारियों की बैठक भी बुलाई। गढ़पाले से इस संबंध में चर्चा की गई तो उन्होंने सवाल टालते हुए एमडी से बात करने को कहा। निमाड़-मालवा, बुंदेलखंड, ग्वालियर-चंबल और विंध्य से लेकर भोपाल अंचल तक ग्रामीण क्षेत्रों में किसान और आम लोग अघोषित बिजली कटौती से परेशान हैं। इससे खेती-किसानी के कामकाज भी प्रभावित होने लगे हैं। मंदसौर जिले के गरोठ, सुवासरा और शामगढ़ में किसानों ने बिजली ग्रिड का घेराव किया।
बोवनी और सिंचाई को लेकर किसान चिंतित
किसानों का कहना है कि पानी की कमी के बीच रबी फसलों की बोवनी का समय है, लेकिन बिजली नहीं मिलने से सिंचाई पंप नहीं चल पा रहे हैं। समय पर सिंचाई नहीं हुई तो सालभर की मेहनत बर्बाद होने का डर है। रतलाम, खंडवा, बड़वानी, बैतूल, भिंड, सतना, नीमच, हरदा और सीहोर सहित कई जिलों में किसान धरना और चक्काजाम कर चुके हैं। रतलाम जिले में करीब 20 साल बाद ऐसे हालात बनने का दावा किया जा रहा है। यहां सामान्य तौर पर 35 इंच बारिश के मुकाबले इस साल कुल 23 इंच पानी गिरा। धोलावड़ बांध केवल 45 फीसदी भर पाया है। इस कारण बांध से सिंचाई पर रोक लगा दी गई है।
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राज्य के बांधों में औसत से कम पानी
बताया जा रहा है कि इस साल प्रदेश के बांधों में पर्याप्त पानी जमा नहीं हो पाया। इससे गांधीसागर, ओंकारेश्वर और इंदिरा सागर जैसे बड़े जलविद्युत गृहों में बिजली उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ गई है। पिछले साल की तुलना में प्रदेश के 54 बड़े बांधों में औसतन करीब 6 फीसदी कम पानी भरा है। इनमें से 19 बांधों की स्थिति और खराब बताई जा रही है। पश्चिमी मध्यप्रदेश में औसत से कमजोर मानसून के चलते बिजली संकट की आशंका बढ़ी है।
सरकार कर रही उपाय, जल्द सुधरेगी स्थिति: मंत्री तोमर
इस बारे में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का कहना है कि “मौजूदा बिजली संकट जल्द ही दूर हो जाएगा। बैंकिंग व्यवस्था के तहत हम जिन प्रदेशों से बिजली लेते हैं, वहां से अभी मांग के मुताबिक बिजली नहीं मिल पा रही है। सरकार वैकल्पिक उपाय भी कर रही है। चार-पांच दिन में स्थिति में सुधार हो जाएगा।”
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किसान संघ अध्यक्ष बोले- बिजली की स्थिति बहुत गंभीर
भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने कहा कि “प्रदेश के कई जिलों में बिजली को लेकर त्राहि-त्राहि मची है। स्थिति भयावह है। दिन में पांच-छह घंटे और रात में दो-दो घंटे बिजली कटौती से ग्रामीण और किसान परेशान हैं। इस मुद्दे पर हम सरकार को चेतावनी दे चुके हैं।”
पांच से आठ घंटे हो रही बिजली कटौती
बैतूल जिले के बेलकुंड गांव के रहवासी रामा धुर्वे का कहना है कि पांच से आठ घंटे बिजली कटौती से दिक्कतें बढ़ गई हैं। फसलों को पानी देने में परेशानी हो रही है, जिससे फसलें सूखने का डर बना हुआ है। मऊगंज के किशन सिंह ने कहा कि बिजली कटौती के कारण फसलों को पानी नहीं दे पा रहे हैं। बिजली विभाग की ओर से कोई जवाब नहीं मिल रहा है।
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रात में भी हो रही बिजली कटौती
बैतूल जिले के राठीपुर के रामकिशोर का कहना है कि रात में भी बिजली कटौती हो रही है। दिन में पांच से सात घंटे तक बिजली बंद रहती है। प्रशासन में सुनवाई नहीं हो रही है। नीमच के उमाकांत दीक्षित ने कहा कि जिले के कई गांवों में यही स्थिति बनी हुई है। किसान बिजली कटौती से परेशान हैं। डर है कि कहीं फसलें बर्बाद न हो जाएं।




















