मुख्यमंत्री जी, हमारा घर बचा लीजिए:- इंदौर के रानी सराय के तोतों की चिट्ठी वायरल, पेड़ों पर संकट से उजड़ने का डर

इंदौर के रानी सराय परिसर में रहने वाले तोतों के नाम से लिखा गया एक भावुक पत्र रविवार को सोशल मीडिया पर वायरल होता रहा। पत्र में मुख्यमंत्री से पुराने पेड़ों और पक्षियों के प्राकृतिक आवास को बचाने की गुहार लगाई गई है। तोतों की ओर से लिखे गए इस पत्र में कहा गया है कि वे पीढ़ियों से रानी सराय के पुराने पेड़ों पर रहते आए हैं। इन्हीं पेड़ों की शाखाओं पर उनके घोंसले हैं और पेड़ों के खोखलों में उनके बच्चों का संसार बसता है। पत्र में आशंका जताई गई है कि यदि पेड़ कटे तो पक्षियों के सामने अपने आशियाने खोने का संकट खड़ा हो जाएगा।
संबंधित खबर: इंदौर का पुलिस मुख्यालय अब नहीं गिरेगा – जनता के दबाव ने बदल दी मेट्रो की चाल
पत्र की शुरुआत ‘मुख्यमंत्री जी, राम-राम! माफ कीजिएगा, हम तोते हैं’ जैसे शब्दों से की गई है। इसमें लिखा है कि तोते इंसानों की तरह बोलना तो जानते हैं, लेकिन अपनी पीड़ा खुलकर नहीं बता सकते। इसलिए पहली बार अपनी चहचहाहट को चिट्ठी का रूप देकर अपनी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। पत्र के जरिए बताया गया है कि रानी सराय के पुराने पेड़ उनके लिए केवल हरियाली का हिस्सा नहीं, बल्कि उनका घर हैं। सुबह होते ही उनकी चहचहाहट से परिसर में दिन की शुरुआत होती है। वे इन्हीं पेड़ों पर घोंसले बनाते हैं, अपने बच्चों को पालते हैं और उन्हें खुले आसमान में उड़ना सिखाते हैं।
पेड़ कटे तो कहां जाएंगे हम?
वायरल पत्र में तोतों की ओर से सवाल उठाया गया है कि इंदौर का विकास और शहर की सुंदरता जरूरी है, लेकिन क्या विकास की राह में पुराने पेड़ों और पक्षियों के आशियानों के लिए थोड़ी-सी जगह नहीं बच सकती? पत्र में कहा गया है कि रानी सराय के पेड़ों और वहां रहने वाले पक्षियों के प्राकृतिक आवास पर संकट मंडराने की आशंका है। यदि पेड़ काट दिए गए तो पक्षी अपने घर कहां बनाएंगे? वे अपने घोंसले उठाकर दूसरी जगह नहीं ले जा सकते। उनके बच्चे भी अचानक किसी दूसरे पेड़ पर जाकर अपना संसार नहीं बसा सकते। ऐसे में पेड़ों की कटाई से पक्षियों का पूरा प्राकृतिक आवास प्रभावित हो सकता है।
ये भी पढ़ें: अमृतसर एयरपोर्ट पर रात में दिखे संदिग्ध ड्रोन! 3 फ्लाइट्स डायवर्ट,रनवे भी हुआ बंद
निर्माण से पहले पर्यावरणीय आकलन की मांग
पत्र में मुख्यमंत्री से अपील की गई है कि किसी भी तरह की पेड़ कटाई या निर्माण कार्य से पहले स्वतंत्र विशेषज्ञों से पर्यावरणीय आकलन कराया जाए। साथ ही, पक्षियों के घोंसलों और उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। पत्र में यह सुझाव भी दिया गया है कि परियोजना की रूपरेखा ऐसी बनाई जाए, जिससे पुराने पेड़ों को यथासंभव बचाया जा सके। इसमें कहा गया है कि पक्षी किसी बड़े महल या विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे, बल्कि केवल अपना आशियाना सुरक्षित रखने की गुहार लगा रहे हैं।
‘पेड़ हमारे लिए लकड़ी नहीं, घर हैं’
पत्र के अंतिम हिस्से में भावुक अपील करते हुए कहा गया है कि पेड़ पक्षियों के लिए सिर्फ लकड़ी नहीं, बल्कि उनका घर हैं। उनकी डालियां केवल शाखाएं नहीं, बल्कि उनके बच्चों के भविष्य का आधार हैं। यदि आज उनकी आवाज नहीं सुनी गई तो कल रानी सराय की सुबह तोतों की चहचहाहट के बिना हो सकती है। पत्र में बच्चों के भविष्य का जिक्र करते हुए सवाल उठाया गया है कि जब इंदौर के बच्चे पूछेंगे कि तोते कहां चले गए, तब उन्हें उनके उजड़ चुके आशियानों की कहानी क्यों सुनानी पड़े?
ये भी पढ़ें: शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय बने MP वॉलीबॉल संघ के अध्यक्ष, 2026-2030 तक संभालेंगे जिम्मेदारी
रविवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस पत्र ने रानी सराय के पुराने पेड़ों, पक्षियों के प्राकृतिक आवास और विकास कार्यों के बीच संतुलन बनाए रखने का मुद्दा सामने रखा। पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री से अपील की गई है कि विकास की योजनाओं में पक्षियों के आशियानों और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाए। हालांकि, पत्र के वायरल होने से संबंधित दावों और पेड़ों की कटाई या निर्माण की मौजूदा स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती।




















