सीहोर : लोड शेडिंग की आड़ में अघोषित बिजली कटौती से उबल पड़ा जिला, गांव-गांव प्रदर्शन और चक्काजाम
सीहोर। जिले में लोड शेडिंग के नाम पर लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती अब जनाक्रोश का कारण बन गई है। पिछले कई दिनों से दिन और रात में घंटों बिजली गुल रहने से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोग भारी परेशानी झेल रहे हैं। हालात यह हैं कि कई गांवों में ग्रामीण सड़क पर उतर आए हैं। कहीं चक्काजाम हुआ तो कहीं प्रदर्शन और नारेबाजी की गई। किसानों और ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री और कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपते हुए बिजली व्यवस्था में तत्काल सुधार तथा बढ़े हुए बिजली बिलों में राहत देने की मांग की है।
सेमरादांगी के किसानों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा ज्ञापन
ग्राम सेमरादांगी के किसान और ग्रामीण मंगलवार को बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने अघोषित बिजली कटौती के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री और कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि रातभर बिजली बंद रहने से आमजन का जीवन प्रभावित हो रहा है। उमस और गर्मी के बीच कूलर-पंखे बंद रहने से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। गांव के विनय सिंह दांगी, पूर्व सरपंच मदन लाल दांगी ,नेपाल सिंह,गोपाल, हरी सिंह सहित अनेक शामिल थे।
कांकरखेड़ा, गुडभेला और मुगीससपुर में चक्काजाम, सड़क पर उतरे ग्रामीण
इछावर रोड स्थित कांकरखेड़ा के समीप सोमवार देर रात दर्जनों गांवों के ग्रामीणों ने विद्युत वितरण कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। इसके चलते सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात प्रभावित रहा। मुगीसपुर, गुड़भेला, खजुरिया बंगला,बरखेड़ी, चंदेरी, बिलकिसगंज, बडवेली सहित अन्य गांवों में भी ग्रामीणों ने बिजली कंपनी के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध दर्ज कराया। वहीं बिलकिसगंज में लोगों ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर अघोषित कटौती तत्काल बंद करने की मांग की।
गर्मी, उमस और रातभर की कटौती से बढ़ी परेशानी
ग्रामीणों का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना के लोड शेडिंग के नाम पर घंटों बिजली बंद कर दी जाती है। इससे लोगों की रातों की नींद उड़ गई है। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, छोटे बच्चों और बीमार लोगों को हो रही है। किसानों का कहना है कि बिजली नहीं मिलने से सिंचाई कार्य प्रभावित हो रहा है, जबकि छोटे व्यापारियों का कारोबार भी प्रभावित हो रहा है।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी उठे सवाल
लगातार बढ़ते जनाक्रोश के बीच ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी नाराजगी जताई। लोगों का कहना है कि बिजली जैसी गंभीर समस्या पर अब तक कोई प्रभावी पहल नहीं हुई है। इससे ग्रामीणों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। लोगों ने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो जिलेभर में चरणबद्ध जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।
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शहर में भी अघोषित कटौती से लोग परेशान
बिजली संकट केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। जिला मुख्यालय सीहोर शहर में भी घोषित कटौती के अलावा बार-बार होने वाली अघोषित बिजली कटौती से लोग परेशान हैं। नागरिकों का कहना है कि बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और विभाग के दावे धरातल पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। लोगों ने नियमित और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
समझाइश के बाद खुला जाम, लेकिन आंदोलन की चेतावनी बरकरार
कांकरखेड़ा में हुए चक्काजाम की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया और बिजली व्यवस्था में सुधार का आश्वासन दिया। इसके बाद जाम समाप्त कराया गया, लेकिन ग्रामीणों ने साफ कर दिया कि यदि 24 घंटे के भीतर अघोषित बिजली कटौती पर रोक नहीं लगी तो इससे भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
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क्या बोली बिजली कंपनी
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की अधीक्षण यंत्री पूनम तुमराम ने कहा कि लोड शेडिंग का निर्णय जिला स्तर पर नहीं होता। उनके अनुसार ऊपर से मिलने वाले निर्देशों के अनुसार ही विद्युत आपूर्ति प्रभावित होती है। जिला स्तर से किसी प्रकार की अलग से बिजली कटौती नहीं की जा रही है।














