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जबलपुर:प्रमोशन में आरक्षण मामला, सरकार ने पेश किया जवाब; हाईकोर्ट ने कर्मचारियों का डेटा साझा करने के दिए निर्देश

मध्यप्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले में मंगलवार को हाईकोर्ट की स्पेशल बेंच ने अहम सुनवाई की। राज्य सरकार ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए प्रमोशन प्रक्रिया का आधार बताया। सुनवाई के बाद अदालत ने पारदर्शिता पर जोर देते हुए सरकार को कर्मचारियों से जुड़ा पूरा डेटा याचिकाकर्ताओं के साथ शेयर करने के निर्देश दिए।
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प्रमोशन में आरक्षण मामला, सरकार ने पेश किया जवाब; हाईकोर्ट ने कर्मचारियों का डेटा साझा करने के दिए निर्देश
प्रमोशन में आरक्षण मामला

जबलपुर। सरकार ने कोर्ट में कहा कि प्रमोशन पिछड़ेपन और प्रतिनिधित्व के आंकड़ों के आधार पर दिए जा रहे हैं। MP High Court माना कि बिना डेटा उपलब्ध कराए याचिकाकर्ता अपनी आपत्तियां प्रभावी ढंग से नहीं रख सकते। अदालत ने सरकार को सर्वे का रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई 21 जुलाई तय की है।

सरकार ने प्रमोशन का आधार कोर्ट के सामने रखा

प्रमोशन में आरक्षण मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस की ओर से गठित स्पेशल बेंच में हुई। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि प्रमोशन का निर्णय पिछड़ेपन और सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व से जुड़े आंकड़ों के आधार पर लिया जा रहा है। सरकार ने अपने पक्ष में संबंधित डेटा भी अदालत के सामने पेश किए और कहा कि प्रक्रिया नियमानुसार अपनाई गई है।

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हाईकोर्ट ने डेटा साझा करने के दिए स्पष्ट निर्देश

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों से संबंधित क्वांटिफायबल डेटा कोई गोपनीय दस्तावेज नहीं है। इसलिए इसे याचिकाकर्ताओं से छिपाया नहीं जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ताओं को पूरा रिकॉर्ड नहीं मिलेगा तो वे अपनी आपत्तियां प्रभावी तरीके से कैसे दर्ज करेंगे। इसी आधार पर सरकार को निर्देश दिया गया कि पूरा डेटा प्रतिवादियों के साथ शेयर किया जाए।

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रिकॉर्ड में आदेशों के पालन पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुराने रिकॉर्ड का भी अवलोकन किया। अदालत ने पाया कि 16 अक्टूबर 2025 को सरकार को स्टडी और सर्वे का पूरा डेटा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद 28 अक्टूबर को केवल सीलबंद लिफाफे में कुछ दस्तावेज जमा किए गए, जबकि बाकी रिकॉर्ड बाद में देने की बात कही गई थी। कोर्ट ने माना कि सरकार ने पहले दिए गए निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया। 

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17 जुलाई तक आपत्तियां दाखिल करने का मौका

हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि रूल-5 के तहत तैयार सभी स्टडी और सर्वे का डेटा अगले दिन तक याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराया जाए। इसके बाद प्रतिवादियों को 17 जुलाई तक अपनी लिखित आपत्तियां दाखिल करने का समय दिया गया है। अदालत ने यह भी कहा कि डेटा साझा किए जाने की जानकारी सरकार कोर्ट के समक्ष भी प्रस्तुत करेगी, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। 

21 जुलाई को फिर होगी सुनवाई

जस्टिस विनय सराफ और जस्टिस विवेक अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई तय की है। अदालत ने कहा कि वह इस मामले की लगातार सुनवाई करना चाहती है, लेकिन अन्य लंबित मामलों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं की उपलब्धता को देखते हुए अगली तारीख निर्धारित की गई है। अब सभी पक्षों की आपत्तियां और उपलब्ध कराए गए डेटा के आधार पर आगे की बहस होगी। 

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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