मप्र हाईकोर्ट ने कहा...2500 का नाश्ता लेकर ब्लाइंड स्कूल जाओ और वहां पर एक घंटा बिताओ

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने पहली बार वकील की गैरहाजिरी पर खारिज हुए मुकदमे को रिस्टोर करने के लिए कम्युनिटी सर्विस की अनोखी शर्त लगाई है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने रेलवे और उसके वकील को कहा है कि वे 2500 रुपए का नाश्ता लेकर दृष्टिबाधित छात्रों के स्कूल में जाएं और वहां पर एक घंटा बिताएं। वहां की रिपोर्ट देने के बाद ही बेंच ने मुकदमे को रिस्टोर करने कहा है। इस मामले को समाज के साधन संपन्न वर्ग की आंखें खोलने के लिए एक टेस्ट केस की तरह इस्तेमाल किया गया है।
रेलवे ने दाखिल किया था मामला
यह मामला केन्द्र सरकार ने पश्चिम मध्य रेलवे के महाप्रबंधक की ओर से केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के फैसले के खिलाफ दाखिल किया था। उस फैसले में कैट ने सागर में रहने वाले दशरथ की गैंगमैन पथ पर बहाली के आदेश दिए थे। केन्द्र सरकार की यह याचिका 4 मई 2025 को वकील की गैरहाजिरी पर खारिज कर दी गई थी। उसको रिस्टोर कराने बेंच के सामने अर्जी दाखिल की गई थी।
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15 दिन के भीतर करना होगा दौरा
कोर्ट ने अर्जी स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि याचिकाकर्ता के वकील को 15 दिन के भीतर जबलपुर के अंधमूक बाइपास के पास स्थित शासकीय दृष्टिबाधित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का दौरा करना होगा। वहां उन्हें बच्चों के लिए ढाई हजार रुपए मूल्य के खाद्य पदार्थ-स्नैक्स ले जाने होंगे और उनके बीच कम से कम एक घंटे का समय बिताना होगा।
संस्थाओं की मनमानी पर लगेगी लगाम
हाईकोर्ट ने सोशल ऑडिट की नई अवधारणा को मजबूत करने की वकालत भी की। कोर्ट ने कहा- अक्सर अनाथालयों, वृद्धाश्रमों और शेल्टर होम्स का प्रबंधन वहां रहने वाले बच्चों व महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार या गड़बड़ी करता है। यदि समाज के साधन संपन्न लोग लगातार वहां का नियमित दौरा करेंगे तो वहां प्रबंधन को यह डर रहेगा कि समाज की नजरें उनके कामकाज पर हैं। इससे संस्थागत शोषण पर लगाम लगेगी।
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