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छह महीने में 15 हजार से ज्यादा स्ट्रीट डॉग्स की हुई नसबंदी व टीकाकरण, आवारा कुत्तों के नियंत्रण को लेकर मुख्य सचिव ने दिया हाईकोर्ट में जवाब

मध्यप्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। जनवरी से जून 2026 के बीच 15,117 कुत्तों की नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण किया गया। 1,62,622 नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। मामले में हाईकोर्ट ने अदालत मित्र से सुझाव मांगे हैं और अगली सुनवाई 14 अगस्त को होगी।
छह महीने में 15 हजार से ज्यादा स्ट्रीट डॉग्स की हुई नसबंदी व टीकाकरण, आवारा कुत्तों के नियंत्रण को लेकर मुख्य सचिव ने दिया हाईकोर्ट में जवाब
फाइल फोटो

जबलपुर। प्रदेश में आवारा कुत्तों (स्ट्रीट डॉग्स) के आतंक से मुक्ति दिलाने और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक पैमाने पर अभियान चलाया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा भेजे गए मामले पर मप्र के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने हाईकोर्ट में यह जवाब दिया है। इसके साथ ही यह भी बताया है कि सार्वजनिक परिसरों को आवारा कुत्तों से मुक्त रखने और नियमित निगरानी के लिए 1,62,622 नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस आनंद पाठक की डिवीजन बेंच ने इस जवाब पर अदालत मित्र को अपने सुझाव देने कहा है। मामले पर अगली सुनवाई 14 अगस्त को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे कड़े निर्देश

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक को लेकर 22 अगस्त 2025 और 7 नवंबर 2025 को इस संबंध में कई कड़े निर्देश जारी किए थे।  इसके बाद 19 मई 2026 को शीर्ष न्यायालय ने देश के सभी उच्च न्यायालयों को संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज करने के निर्देश दिए थे। शीर्ष कोर्ट ने कहा था कि ‘शहर आवारा कुत्तों के आतंक में, बच्चे चुका रहे हैं कीमत’ शीर्षक से दर्ज की जाने वाली जनहित याचिका पर तब तक लगातार मॉनिटरिंग की जाए, जब तक इस समस्या का ठोस समाधान नहीं हो जाता। इसी परिप्रेक्ष्य में मप्र हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर एक जनहित याचिका दर्ज की है। इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रायन डिसिल्वा और अधिवक्ता सरबवीर सिंह ओबेराय को अदालत मित्र नियुक्त किया गया है। 

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मुख्य सचिव के जवाब के प्रमुख बिंदु

  1. एक जनवरी 2026 से 30 जून 2026 के बीच राज्य के शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, बस स्टैंडों और रेलवे स्टेशनों जैसे चिह्नित सार्वजनिक स्थलों से 15,117 आवारा कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी तथा एंटी-रेबीज टीकाकरण किया गया है।
  2. सार्वजनिक परिसरों को आवारा कुत्तों से मुक्त रखने और नियमित निगरानी के लिए 1,62,622 नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं। जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रत्येक तीन माह में सार्वजनिक स्थलों के परिसरों का अनिवार्य रूप से निरीक्षण कराएं।
  3. आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षात्मक कदम उठाए गए हैं। प्रदेश के 1,00,262 संस्थानों/परिसरों में बाउंड्रीवॉल और फेंसिंग का कार्य पूर्ण कर लिया गया है, ताकि श्वान अंदर न प्रवेश कर सकें। 
  4.  शहरी निकायों द्वारा आवारा कुत्तों को भोजन कराने के लिए 965 फीडिंग पॉइंट निर्धारित किए गए हैं। खाद्य सामग्री बेचने वाले वेंडरों को जागरूक किया जा रहा है कि वे अपने कचरे को बंद डस्टबिन में रखें और खान-पान के स्टॉल के आसपास कुत्तों को खाना न खिलाएं।
  5.  प्रदेश के 11 जिलों की 12 नगरीय निकायों में 12 श्वान आश्रय स्थल में 982 कुत्तों को पहुंचाया गया। 28 नगरीय निकायों में डॉग स्क्वाड का गठन किया गया है। वहीं 69 निकायों में 81 डॉग कैचर वाहन उपलब्ध कराए हैं।

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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