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‘अंधेरे में किसी ने आरोपी को देखा नहीं, फिर भी हुई सजा’, झूठे केस में 6 साल जेल काटने के बाद हाईकोर्ट ने आरोपी को किया बरी

मप्र हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामले में सिवनी की विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा रद्द करते हुए छह वर्ष से जेल में बंद आरोपी को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि घटना के समय अंधेरा था, किसी गवाह ने आरोपी को नहीं देखा और ठोस साक्ष्य भी नहीं थे।
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‘अंधेरे में किसी ने आरोपी को देखा नहीं, फिर भी हुई सजा’, झूठे केस में 6 साल जेल काटने के बाद हाईकोर्ट ने आरोपी को किया बरी
फाइल फोटो

जबलपुर। पॉक्सो के आरोप में सिवनी की अदालत द्वारा एक आरोपी को सुनाई गई सजा मप्र हाईकोर्ट ने रद्द कर दी है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने कहा है कि अंधेरा होने के कारण किसी ने भी आरोपी को नहीं देखा था। गवाहों के बयानों में विरोधाभास थे। और तो और आरोपी के खिलाफ कोई ठोस सबूत भी नहीं था। ऐसे में सिर्फ आशंका के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती। बेंच ने 6 साल से जेल में बंद आरोपी को बरी कर दिया। साथ ही सरकार को कहा है कि जेल से छूटने के बाद आवेदक को 6 माह की वोकेशनल ट्रेनिंग दी जाए, ताकि वह रोजगार पा सके।

पिता से दुश्मनी के चलते फंसाया

यह अपील सिवनी जिले की कुरई में स्थित चांदनी चौक में रहने वाले नंदू उर्फ नंदकिशोर की ओर से दाखिल की गई थी। एक 12 साल से कम उम्र की बच्ची से दुष्कर्म की कोशिश करने के आरोप में सिवनी की विशेष अदालत ने 8 अप्रैल 2023 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। आरोपी की ओर से अधिवक्ता विकेश प्रताप सिंह ने दलीलें रखीं। सुनवाई के बाद अदालत ने पाया कि बच्ची के पिता से दुश्मनी के चलते ही नंदू को मामले में झूठा फंसाया गया। गवाहों के बयानों में बड़े विरोधाभास को देखते हुए डिवीजन बेंच ने आवेदक को बरी कर दिया।

एफआईआर न लिखने वालों पर करो कार्रवाई, भोपाल पुलिस कमिश्नर को 3 दिन की मोहलत 

शादी का झांसा देकर दुष्कर्म, जबरन गर्भपात, मारपीट और धमकी के मामले में भोपाल के कमला नगर थाना पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज न करने के आरोपों को मप्र हाईकोर्ट ने काफी गंभीरता से लिया है। जस्टिस हिमान्शु जोशी की सिंगल बेंच ने पीड़िता की याचिका पर पुलिस कमिश्नर को कहा है कि उसकी (पीड़िता की) शिकायत पर वे 3 दिन के भीतर विधि अनुसार कार्रवाई कर उचित निर्णय लें।

एफआईआर नहीं की याचिका को धमकाया

पीड़ित महिला की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया था कि उसने आरोपी राजपाल अहिरवार के खिलाफ शादी का झांसा देने और फिर जबरदस्ती गर्भपात कराने का आरोप लगाते हुए कमला नगर थाने में 10 जुलाई 2026 को शिकायत दी थी। याचिका में आरोप था कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बजाए याचिकाकर्ता को धमकाया कि एफआईआर दर्ज कराने पर उस पर भी हनी ट्रैप का मामला दर्ज होगा।

कमिश्नर को शिकायत दी फिर भी एफआईआर नहीं

पुलिस द्वारा आरोपी को बचाने और याचिकाकर्ता पर दबाव बनाने की शिकायत भोपाल पुलिस आयुक्त को शिकायत दी गई। वहां पर भी कोई सुनवाई न होने पर यह याचिका दायर कर तत्कालीन थाना प्रभारी रूपा पांडे, उप निरीक्षक शैलेंद्र राजावत और महिला प्रधान आरक्षक डॉली चौरसिया के खिलाफ विभागीय जांच और आपराधिक कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की राहत हाईकोर्ट से चाही थी। मामले पर हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एके शाह ने दलीलें रखीं। मामले की गंभीरता और पीड़िता की सीमित प्रार्थना को देखते हुए अदालत ने पुलिस कमिश्नर को विधि अनुसार कार्रवाई करने के आदेश दिए।

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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