Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

MP हाईकोर्ट का फैसला: मनरेगा मेट का 1 साल अनुभव नहीं तो ग्राम रोजगार सहायक को नहीं मिलेंगे 15 अतिरिक्त अंक

MP हाईकोर्ट ने कहा कि मनरेगा में मेट के रूप में एक साल का वास्तविक अनुभव नहीं होने पर ग्राम रोजगार सहायक को 15 अतिरिक्त अंक नहीं मिलेंगे। बालाघाट के मामले में अपील खारिज हुई।
MP हाईकोर्ट का फैसला: मनरेगा मेट का 1 साल अनुभव नहीं तो ग्राम रोजगार सहायक को नहीं मिलेंगे 15 अतिरिक्त अंक

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने ग्राम रोजगार सहायक की नियुक्ति से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा में मेट के रूप में कम से कम एक वर्ष का वास्तविक कार्य अनुभव नहीं होने पर उम्मीदवार को 15 अतिरिक्त अंक का लाभ नहीं दिया जा सकता। अदालत ने इसी आधार पर करीब 15 वर्षों तक ग्राम रोजगार सहायक के पद पर काम कर चुके उम्मीदवार की नियुक्ति को अवैध ठहराने वाले एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखा और अपील खारिज कर दी। यह फैसला जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने नियुक्ति के लिए दिए गए अतिरिक्त अंकों के आधार और संबंधित उम्मीदवार के वास्तविक अनुभव की जांच को महत्वपूर्ण माना।

बालाघाट के जनवा पंचायत से जुड़ा था मामला

मामला बालाघाट जिले की जनपद पंचायत किरनापुर की ग्राम पंचायत जनवा का है। यहां सालिकराम लिल्हारे ग्राम रोजगार सहायक के पद पर कार्यरत थे। उनकी नियुक्ति को चुनौती देते हुए रामलाल नागेश्वर ने जिला कलेक्टर के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में नियुक्ति के दौरान मनरेगा के तहत अनुभव के आधार पर मिले अतिरिक्त अंकों पर सवाल उठाया गया था। शिकायत की जांच के बाद जिला स्तर पर सालिकराम की नियुक्ति रद्द करने का आदेश जारी किया गया।

9 मई 2011 को नियुक्ति रद्द करने का आदेश

मामले में जिला स्तर पर 9 मई 2011 को सालिकराम लिल्हारे की नियुक्ति निरस्त कर दी गई थी। आदेश में कहा गया था कि संबंधित ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत उनके कार्य अनुभव का पर्याप्त आधार नहीं था। इसके बाद मामला उच्च अधिकारियों और न्यायालय तक पहुंचा। नियुक्ति रद्द किए जाने के खिलाफ लंबी कानूनी प्रक्रिया चली और अलग-अलग स्तरों पर आदेश जारी हुए।

करीब 15 साल नौकरी करने के बाद भी नियुक्ति पर सवाल

मामले की खास बात यह रही कि नियुक्ति रद्द किए जाने के समय तक सालिकराम करीब 15 वर्षों तक ग्राम रोजगार सहायक के पद पर कार्य कर चुके थे। इसके बावजूद नियुक्ति के मूल आधार यानी चयन के समय मिले अनुभव संबंधी अंकों पर सवाल बना रहा। अदालत के समक्ष मुख्य मुद्दा यह था कि क्या मनरेगा में मेट के रूप में वास्तविक एक वर्ष का अनुभव नहीं होने के बावजूद उम्मीदवार को 15 अतिरिक्त अंक दिए जा सकते हैं और उन्हीं अंकों के आधार पर नियुक्ति को वैध माना जा सकता है।

हाईकोर्ट ने 15 अतिरिक्त अंकों पर साफ की स्थिति

डिवीजन बेंच ने कहा कि यदि उम्मीदवार के पास मनरेगा के तहत मेट के रूप में न्यूनतम एक वर्ष का वास्तविक कार्य अनुभव नहीं था तो उसे अतिरिक्त 15 अंक दिए जाने का आधार नहीं बनता। अतिरिक्त अंकों का लाभ नियुक्ति की पात्रता और चयन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा था। ऐसे में जब अनुभव की मूल शर्त पूरी नहीं हुई तो इन अंकों का लाभ देकर की गई नियुक्ति को वैध नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने एकलपीठ के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें सालिकराम लिल्हारे की नियुक्ति को अवैध माना गया था।

अतिरिक्त कमिश्नर के आदेश को भी नहीं मिली राहत

सालिकराम की ओर से इस मामले में राहत पाने के लिए उच्च स्तर पर भी अपील की गई थी। अतिरिक्त कमिश्नर की ओर से उनके पक्ष में आदेश जारी किया गया था। इसके खिलाफ मामला हाईकोर्ट पहुंचा। 18 अगस्त 2026 को एकलपीठ ने अतिरिक्त कमिश्नर के आदेश को खारिज कर दिया था। इसके बाद सालिकराम लिल्हारे की ओर से डिवीजन बेंच में अपील दाखिल की गई। अब डिवीजन बेंच ने भी एकलपीठ के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए अपील खारिज कर दी है।

ये भी पढ़ें: रीवा सड़क हादसे में हाईकोर्ट ने कहा-एजेंट ने प्रीमियम राशि में गबन किया तो भी बीमा कंपनी को करना होगा क्लेम का भुगतान

चयन प्रक्रिया में अनुभव की शर्त को माना अहम

इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि किसी पद पर लंबे समय तक काम कर लेने मात्र से नियुक्ति के समय पात्रता से जुड़ी मूल शर्तों की अनदेखी नहीं की जा सकती। कोर्ट के सामने संबंधित उम्मीदवार के वास्तविक मनरेगा अनुभव और उसके आधार पर दिए गए अतिरिक्त अंकों का मुद्दा था। मामले में अदालत ने यह भी देखा कि जिस अनुभव के आधार पर 15 अतिरिक्त अंक दिए गए थे, उसके लिए जरूरी न्यूनतम वास्तविक कार्य अनुभव उपलब्ध था या नहीं।

रामलाल नागेश्वर की ओर से रखी गई दलील

मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता रामलाल नागेश्वर की ओर से अधिवक्ता प्रशान्त कुमार बड़ारया ने पक्ष रखा। वहीं राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता राजेश तिवारी ने दलीलें पेश कीं। अपीलकर्ता सालिकराम लिल्हारे की ओर से नियुक्ति को बनाए रखने के लिए कानूनी आधार प्रस्तुत किए गए, लेकिन डिवीजन बेंच ने एकलपीठ के आदेश में दखल देने का आधार नहीं पाया।

ये भी पढ़ें: यूक्रेन से MBBS करने वाले डॉक्टर समेत 2 मेडिकल छात्रों की याचिका खारिज, MP हाईकोर्ट ने लगाया ₹20 हजार जुर्माना

क्या है पूरे मामले का मुख्य बिंदु

पूरे मामले का केंद्र ग्राम रोजगार सहायक की नियुक्ति में दिए जाने वाले 15 अतिरिक्त अंकों से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने माना कि इन अतिरिक्त अंकों के लिए मनरेगा के तहत मेट के रूप में न्यूनतम एक वर्ष का वास्तविक अनुभव जरूरी है। इस अनुभव के बिना अतिरिक्त अंक नहीं दिए जा सकते और यदि वही अंक चयन प्रक्रिया में नियुक्ति का आधार बने हों तो नियुक्ति की वैधता पर सवाल उठ सकता है। बालाघाट के जनवा ग्राम पंचायत से जुड़े इस मामले में इसी आधार पर लंबे समय तक सेवा देने वाले सालिकराम लिल्हारे को न्यायिक राहत नहीं मिली और उनकी अपील खारिज कर दी गई।

Sanjay Tiwari
By Sanjay Tiwari

Latest Posts