PU Special :मप्र फैमिली कोर्ट का ऑनलाइन मीडिएशन-दिल्ली में पति, भोपाल में पत्नी, स्क्रीन पर हुई बात, सुलझा विवाद

मप्र फैमिली कोर्ट का ऑनलाइन मीडिएशन अलग-अलग शहरों में रह रहे दंपतियों के विवाद सुलझाने का माध्यम बन रहा है। बीते साल सितंबर से अब तक 21 मामलों में समझौता हुआ है। भोपाल-दिल्ली और इंदौर-पुणे के मामलों में ऑनलाइन बातचीत के जरिए पति-पत्नी ने गलतफहमियां दूर कर साथ रहने पर सहमति जताई।
मप्र फैमिली कोर्ट का ऑनलाइन मीडिएशन-दिल्ली में पति, भोपाल में पत्नी, स्क्रीन पर हुई बात, सुलझा विवाद

पल्लवी वाघेला, भोपाल। पति दिल्ली में नौकरी कर रहा था और पत्नी बच्ची के जन्म के बाद से भोपाल स्थित मायके में रह रही थी। आमने-सामने बैठकर बात करना संभव नहीं था। दोनों के बीच का विवाद वर्षों से कुटुंब न्यायालय में चल रहा था। ऐसे में ऑनलाइन मीडिएशन ने दोनों के बीच की दूरी कम करने का रास्ता खोला। पति दिल्ली से और पत्नी भोपाल से ऑनलाइन जुड़े। मीडिएशन के दौरान दोनों को बेटी के भविष्य और उसकी परवरिश की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए साथ रहने के लिए समझाया गया। बातचीत आगे बढ़ी तो पति ने भरोसा दिलाया कि वह बच्ची की देखभाल में पत्नी का हर संभव सहयोग करेगा। पति की बात सुनने के बाद पत्नी भी दिल्ली जाने के लिए तैयार हो गई। इस तरह अदालत में लंबे समय से चल रहा विवाद आपसी संवाद और सहमति से सुलझ गया।

फैमिली कोर्ट बन रहा माध्यम

मप्र फैमिली कोर्ट का ऑनलाइन मीडिएशन उन पति-पत्नी के लिए उपयोगी माध्यम बन रहा है, जो नौकरी, रहने की जगह या अन्य परिस्थितियों के कारण एक ही स्थान पर पहुंचकर मीडिएशन में शामिल नहीं हो पाते। इसमें दोनों पक्ष अलग-अलग शहरों से एक ही समय पर ऑनलाइन जुड़कर अपनी बात रखते हैं और मीडिएटर की मौजूदगी में समाधान की राह तलाशते हैं। बीते साल सितंबर से अब तक प्रदेश में 21 मामलों में समझौते हुए हैं।

नौकरी बनी विवाद की वजह

एक अन्य मामले में पत्नी इंदौर में नौकरी करती थी, जबकि पति पुणे में काम कर रहा था। अलग-अलग शहरों में रहने के कारण दोनों के बीच गलतफहमियां बढ़ती गईं और बात तलाक तक पहुंच गई। पत्नी ने केस लगाया, लेकिन पति ने हर सुनवाई के लिए इंदौर आना संभव नहीं होने की बात कही। इसके बाद ऑनलाइन मीडिएशन के जरिए दोनों को जोड़ा गया। उन्हें बिना एक-दूसरे पर आरोप लगाए अपनी बात रखने के लिए कहा गया। संवाद शुरू हुआ तो दोनों ने एक-दूसरे की परिस्थितियों को समझा। इसके बाद उन्होंने आगे की जिंदगी को लेकर योजना बनाई और पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ रिश्ते को भी समय देने पर सहमति जताई।

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आमने-सामने जैसी बातचीत

ऑनलाइन मीडिएशन में पक्षकारों को आमने-सामने बातचीत जैसा अनुभव होता है। काउंसलर भी ऑनलाइन जुड़े रहते हैं, जिससे बातचीत को समाधान की दिशा में आगे बढ़ाया जाता है। समस्या के अनुरूप दोनों पक्षों को समझाया जाता है और आरोप-प्रत्यारोप के बजाय विवाद का कारण जानकर उसका हल तलाशने पर जोर रहता है। कई मामलों में यही संवाद रिश्ते को टूटने से बचाने की दिशा में पहला कदम बन रहा है।

ऑनलाइन मीडिएशन के फायदे

  • अलग-अलग शहरों में रहना बाधा नहीं बनता।
  • समय और यात्रा खर्च की बचत होती है।
  • नौकरीपेशा और व्यस्त दंपतियों के लिए सुविधाजनक विकल्प।
  • मीडिएटर की मौजूदगी में दोनों पक्ष अपनी बात रख सकते हैं।
  • संवाद के जरिए विवाद के कारण और समाधान पर सीधे बात होती है।
  • आपसी सहमति से समाधान तलाशने का अवसर मिलता है।

दूरी नहीं, संवाद की कमी बिगाड़ती है रिश्ता

अलग-अलग शहरों में रहने वाले पति-पत्नी के बीच कई बार दूरी से ज्यादा संवाद की कमी विवाद को बढ़ाती है। ऑनलाइन मीडिएशन में बिना यात्रा किए और ज्यादा समय गंवाए दोनों पक्षों के बीच बातचीत संभव हो पाती है। आमने-सामने टकराव के बजाय नियंत्रित माहौल में संवाद होने से समाधान की गुंजाइश बनती है। दोनों पक्ष अपनी अपेक्षाओं और जिम्मेदारियों पर विशेषज्ञ के सामने बात कर पाते हैं, जिससे विवाद को सुलझाने का रास्ता आसान होता है।

शैल अवस्थी, काउंसलर, फैमिली कोर्ट

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