Peoples Update Special :आबकारी विभाग में प्रमोशन लिस्ट पर ब्रेक, जांच के दायरे में चार अफसर; रुक सकती है पदोन्नति

पुष्पेन्द्र सिंह ,भोपाल। बताया जा रहा है कि आबकारी विभाग के 70 से अधिक अधिकारियों की पदोन्नति सूची अब तक जारी नहीं हो सकी है। दूसरी ओर, जांच के दायरे में आए अधिकारियों और पदोन्नति के पात्र अधिकारियों के बीच अलग-अलग स्तर पर गतिविधियां तेज हैं। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने भी ग्वालियर मुख्यालय में पदस्थ स्थापना बाबू की भूमिका पर नाराजगी जताई है। इसके बावजूद विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है।
प्रमोशन लिस्ट जारी करने में लगातार हो रही देरी
सरकार के निर्देश पर अन्य विभागों में प्रमोशन की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है, लेकिन आबकारी विभाग में वरिष्ठ अधिकारियों की पदोन्नति सूची जारी करने में टालमटोल की स्थिति बनी हुई है। बताया जा रहा है कि कई दिनों से नोटशीट प्रमुख सचिव अमित राठौर के पास लंबित है। विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक नहीं होने से पूरी प्रक्रिया रुकी हुई है। इससे पदोन्नति का इंतजार कर रहे अधिकारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
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मुख्य सचिव और उप मुख्यमंत्री ने जताई नाराजगी
मामले की जानकारी मिलने के बाद मुख्य सचिव अनुराग जैन ने मंगलवार को प्रमुख सचिव अमित राठौर को आवश्यक निर्देश दिए। वहीं ग्वालियर मुख्यालय में पदस्थ स्थापना बाबू की भूमिका को लेकर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने भी नाराजगी जताई है। इसके बावजूद 70 से अधिक अधिकारियों की प्रमोशन सूची जारी नहीं हो सकी। विभाग के भीतर इस देरी को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं।
इन अधिकारियों के प्रमोशन पर बनी हुई है स्थिति
जानकारी के अनुसार, जबलपुर में पदस्थ सहायक आबकारी आयुक्त संजीव दुबे इंदौर के 68 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच के कारण चर्चा में हैं। भोपाल के सहायक आबकारी आयुक्त वीरेन्द्र धाकड़ को शिवपुरी में पदस्थापना के दौरान दंडित किया गया था। मुख्यालय ग्वालियर में स्थापना प्रभारी प्रमोद झा उज्जैन की तीन करोड़ रुपये की बैंक गारंटी वसूली मामले में लोकायुक्त जांच के दायरे में हैं। वहीं इंदौर के राजनारायण सोनी भी चार करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी मामले में जांच का सामना कर रहे हैं।
पदोन्नति के लिए दोनों पक्ष हुए सक्रिय
जिन अधिकारियों की पदोन्नति प्रस्तावित है, उनके स्तर पर भी सूची जारी कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। दूसरी ओर जांच के दायरे में आए अधिकारियों के मामलों को लेकर भी अलग-अलग स्तर पर चर्चाएं जारी हैं। इसी कारण विभाग के भीतर दोनों पक्ष सक्रिय नजर आ रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि जल्द निर्णय होने पर लंबे समय से लंबित प्रक्रिया पूरी हो सकती है।
अधिकारी और डिप्टी सीएम कॉल रिसीव नहीं कर रहे
एडीओ से जिला आबकारी अधिकारी, डीईओ से सहायक आयुक्त, सहायक आयुक्त से उप आयुक्त पीएस कॉल रिसीव नहीं कर रहे। मामले की वास्तविकता जानने पीपुल्स समाचार ने मंगलवार को मोबाइल नंबर 9993062474 पर पीएस अमित राठौर और बाद में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा से कई बार संपर्क किया लेकिन रिस्पॉन्स नहीं मिला।












