ईरान ने अमेरिका को दी खुली चेतावनी!'अभी कोई बातचीत नहीं'... हमला हुआ तो मिलेगा करारा जवाब

ईरान ने अमेरिका के साथ रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है। ईरान ने कहा है कि फिलहाल उसकी अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत दोबारा शुरू करने की कोई योजना नहीं है। ईरान का कहना है कि इस समय उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता देश की सुरक्षा और रक्षा है। इसलिए बातचीत के बजाय सरकार का पूरा ध्यान अपनी सीमाओं और राष्ट्रीय हितों की रक्षा पर है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगई ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि जब तक अमेरिका अपने किए गए वादों और समझौतों का पालन नहीं करता, तब तक ईरान बातचीत की मेज पर वापस नहीं आएगा। उनका यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब पश्चिम एशिया में दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।
अमेरिका से बातचीत पर फिलहाल पूर्ण विराम
इस्माइल बगई ने साफ शब्दों में कहा कि अभी अमेरिका के साथ किसी भी तरह की नई वार्ता की कोई योजना नहीं है। उनका कहना है कि हालात ऐसे नहीं हैं कि दोनों देश बातचीत शुरू करें। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पहले हुए समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया। ऐसे में ईरान भी खुद को उस समझौते के लिए बाध्य नहीं मानता। उनका कहना है कि किसी भी समझौते की सफलता दोनों पक्षों के भरोसे और जिम्मेदारियों पर टिकी होती है। अगर एक पक्ष अपने वादे तोड़ देता है, तो दूसरे पक्ष से भी पूरी तरह पालन की उम्मीद नहीं की जा सकती।
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क्या है पूरा मामला?
ईरान के अनुसार, 17 जून को दोनों देशों के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ था। इस समझौते का उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करना और संघर्ष रोकना था। लेकिन ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने शुरुआत से ही इस समझौते की शर्तों का सही तरीके से पालन नहीं किया। इसलिए अब ईरान भी खुद को इस समझौते से बंधा हुआ नहीं मानता। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अगर कोई देश समझौते की पहली ही शर्त का सम्मान नहीं करता, तो दूसरे देश पर उसे निभाने का दबाव नहीं बनाया जा सकता।
'अमेरिका ने अपने वादे तोड़े'
इस्माइल बगई ने कहा कि समझौता दोनों देशों की आपसी जिम्मेदारियों पर आधारित था। लेकिन अमेरिका ने शुरुआत से ही अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने समझौते के पहले ही अनुच्छेद से अपने वादों का उल्लंघन किया। ऐसे में ईरान के पास भी अपनी रणनीति बदलने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। उनका कहना है कि यह केवल राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों का सामान्य सिद्धांत है। अगर एक पक्ष नियम तोड़ता है तो दूसरा पक्ष भी अपने फैसलों पर दोबारा विचार कर सकता है।
अमेरिका के दावे पर ईरान का जवाब
अमेरिका का दावा रहा है कि उसके सैन्य अभियान और दबाव की नीति से ईरान आखिरकार बातचीत के लिए मजबूर हो जाएगा, लेकिन ईरान ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। इस्माइल बगई ने कहा कि दबाव या सैन्य कार्रवाई से ईरान झुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि बातचीत तभी संभव होगी, जब अमेरिका पहले अपने व्यवहार में बदलाव लाए और समझौते का सम्मान करे।
होर्मुज पर भी सख्त रुख
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया है। ईरान का कहना है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को लेकर वह किसी तरह का समझौता नहीं करेगा। अगर अमेरिका यह सोचता है कि सैन्य कार्रवाई करके इस क्षेत्र में अपनी शर्तें लागू कर देगा, तो यह संभव नहीं होगा। ईरान का दावा है कि समझौते के अनुच्छेद-5 के तहत इस समुद्री मार्ग से होने वाले आवागमन के प्रबंधन की जिम्मेदारी तेहरान को दी गई है।
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हमला हुआ तो मिलेगा करारा जवाब
ईरान ने अमेरिका को चेतावनी भी दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अगर ईरान पर किसी भी तरह का सैन्य हमला किया गया, तो उसकी सेना पूरी ताकत से जवाब देगी। उन्होंने कहा कि देश की रक्षा के लिए ईरान पूरी तरह तैयार है और किसी भी खतरे का मजबूती से सामना करेगा। बगई का कहना है कि देश की जनता भी इस मुद्दे पर सरकार और सेना के साथ खड़ी है। अमेरिका के दबाव का सामना करने के लिए पूरे देश में व्यापक समर्थन मौजूद है।
लगातार बढ़ रहा है दोनों देशों के बीच तनाव
पिछले कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिका ने ईरान के तटीय इलाकों और समुद्री ढांचे को निशाना बनाते हुए कई सैन्य अभियान चलाए हैं। इन कार्रवाइयों के बाद दोनों देशों के रिश्ते और अधिक खराब हो गए हैं। अमेरिका का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल व्यावसायिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने में किया जा सकता है।
अमेरिका के आरोपों को ईरान ने किया खारिज
अमेरिका का आरोप है कि ईरान की गतिविधियों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। हालांकि, ईरान ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उसका कहना है कि वह नियमों के तहत काम कर रहा है और अमेरिका बेवजह उस पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।











