अलग होने के बाद समझ आई रिश्तों की अहमियत:मप्र में 2021 से 2025 के बीच बढ़े दोबारा शादी के मामले, तलाक कैंसिल कर फिर साथ आए 182 दंपति

पल्लवी वाघेला, भोपाल।
भोपाल समेत बड़े शहरों में बढ़े दोबारा साथ आने के मामले
अकेले भोपाल में पिछले साल 9 ऐसे मामले सामने आए जबकि इंदौर और ग्वालियर में 5-5 तथा जबलपुर में 7 दंपति दोबारा एक हुए।
भोपाल में पांच साल की स्थिति
- 2021 - 2 मामले
- 2022 - 8 मामले
- 2023 - 15 मामले
- 2024 - 7 मामले
- 2025 - 9 मामले
चार प्रमुख जिलों में बीते साल की स्थिति
- भोपाल - 9
- इंदौर - 5
- ग्वालियर - 5
- जबलपुर - 7
ये आंकड़े फैमिली कोर्ट से प्राप्त उन मामलों के हैं जिनमें तलाक की डिक्री कैंसिल कर दोबारा शादी के आवेदन किए गए।
कोविड के दौरान फिर करीब आए भोपाल के दंपति
भोपाल के एक दंपति ने साल 2018 में तलाक ले लिया था। कोविड के दौरान पति की आर्थिक स्थिति खराब हो गई और तनाव के चलते उसे हार्ट अटैक आ गया। इस दौरान पूर्व पत्नी अस्पताल से लेकर बाद तक उसके साथ खड़ी रही। दोनों को एहसास हुआ कि उनके बीच प्यार अभी भी बाकी है। इसके बाद दोनों ने तलाक की डिक्री कैंसिल करवाई और जनवरी 2025 में दोबारा शादी कर ली।
बेटी के लिए फिर एक हुए ग्वालियर के पति-पत्नी
ग्वालियर के एक दंपति ने तलाक के बाद नए रिश्तों की तलाश की लेकिन उन्हें महसूस हुआ कि उनका पहला रिश्ता ज्यादा बेहतर था। इस बीच उनकी बेटी में अवसाद के लक्षण दिखने लगे। बेटी की परवरिश और भविष्य को देखते हुए दोनों ने मतभेद खत्म किए और दो साल बाद फिर शादी कर ली।
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डेटिंग साइट पर फिर मिले इंदौर के पूर्व पति-पत्नी
इंदौर के एक मामले में पत्नी को एहसास हुआ कि उसने जल्दबाजी में तलाक ले लिया। मायके के दबाव में उसने रिश्ता तोड़ दिया था लेकिन बाद में खुद को उपेक्षित महसूस किया। उसने दोबारा रिश्ते को जोड़ने की पहल की। वहीं इंदौर के ही एक अन्य मामले में तलाक के बाद पूर्व पति-पत्नी अलग-अलग नाम से डेटिंग साइट पर जुड़े। बातचीत के बाद जब दोनों आमने-सामने आए तो उन्हें महसूस हुआ कि रिश्ता कागजों से खत्म नहीं होता। इसके बाद दोनों ने दोबारा साथ रहने का फैसला किया।
ये रहे दोबारा साथ आने के प्रमुख कारण
- गुस्से या जल्दबाजी में तलाक लेने का एहसास होना
- बच्चों के भविष्य और परवरिश की चिंता
- दोस्तों या रिश्तेदारों के दबाव में लिया गया फैसला गलत लगना
- गलतफहमी दूर होने के बाद भरोसा लौटना
- तलाक के बाद अवसाद और काउंसलिंग से सोच में बदलाव
- आर्थिक समस्या या रिश्तेदारों के हस्तक्षेप जैसी बाहरी वजहों का खत्म होना
- भावनात्मक जुड़ाव बना रहना
- नए रिश्तों की तलाश में पुराने रिश्ते की अहमियत समझ आना
- किसी बुरी लत के कारण रिश्ता टूटने के बाद पछतावा होना
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दूसरी बार ज्यादा मजबूत होता है रिश्ता
काउंसलर शैल अवस्थी के मुताबिक कई बार पति-पत्नी को अलग होने के बाद महसूस होता है कि उनकी समस्या स्थायी नहीं थी बल्कि परिस्थितिजन्य थी। बच्चों का भावनात्मक जुड़ाव भी दोनों को फिर करीब लाता है। उनका कहना है कि ज्यादातर मामलों में दोबारा बना रिश्ता पहले से ज्यादा मजबूत और समझदारी भरा साबित होता है।












