सोहागपुर:सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में लगा पहला फ्लोटिंग ट्रैश बैरियर, नदियों को प्लास्टिक कचरे से बचाने की पहल

सोहागपुर। पचमढ़ी की नदियों में प्लास्टिक कचरे की बढ़ती समस्या को देखते हुए यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। नया फ्लोटिंग ट्रैश बैरियर जल प्रवाह और जलीय जीवों की आवाजाही को प्रभावित किए बिना प्लास्टिक कचरे को रोकने का कार्य करेगा। इस पहल से जल गुणवत्ता और जैव विविधता संरक्षण को मजबूती मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल भविष्य में अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।
पचमढ़ी की धाराओं से तवा जलाशय पहुंचता है कचरा
क्षेत्र संचालक सतपुड़ा टाइगर रिजर्व राखी नंदा (आईएफएस) ने बताया कि पचमढ़ी की धाराएं भराना, बाणगंगा, मीठीझीरी, देनवा, नागद्वारी और चोरी जैसी नदियों में मिलकर तवा जलाशय तक पहुंचती हैं। यह जलाशय नर्मदापुरम और हरदा जिलों के लिए अहम जल स्रोत है। उन्होंने कहा कि मानसून में बहकर आने वाला प्लास्टिक कचरा जल गुणवत्ता और जलीय जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा बनता है। नया तैरता अवरोधक इस समस्या को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे संवेदनशील नदी तंत्र को संरक्षण मिलने की उम्मीद है।
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पर्यटकों के आने से बढ़ रहा कचरा
पचमढ़ी छावनी बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी राहुल गजभिये (आईडीईएस) ने बताया कि हर वर्ष लाखों पर्यटक और तीर्थयात्री पचमढ़ी आते हैं। इससे प्लास्टिक कचरे की मात्रा में लगातार वृद्धि होती है। यह कचरा आखिर में वन क्षेत्रों की धाराओं में पहुंचकर पर्यावरणीय चुनौतियां पैदा करता है। बढ़ते पर्यटन के साथ इस समस्या का समाधान आवश्यक हो गया था। इसी उद्देश्य से फ्लोटिंग ट्रैश बैरियर की स्थापना की गई है।

प्रमुख जल निकासी चैनल पर लगाया गया अवरोधक
इस समस्या के समाधान के लिए केंद्रीय विद्यालय के पास एक प्रमुख जल निकासी चैनल पर फ्लोटिंग ट्रैश बैरियर लगाया गया है। सर्वेक्षणों में इस चैनल को मानसून के दौरान अभयारण्य में प्लास्टिक कचरे के प्रवेश का प्रमुख मार्ग पाया गया था। डब्ल्यूसीटी के वन्यजीव वैज्ञानिक विवेक तुमसरे ने बताया कि यूरेशियन ऊदबिलावों और अन्य जलीय जीवों के आवासों के सर्वेक्षण के दौरान नदियों में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा पाया गया। यह अवरोधक कचरे को जंगल के संवेदनशील क्षेत्रों तक पहुंचने से पहले ही रोकने में मदद करेगा। साथ ही जल गुणवत्ता में भी सुधार लाने का कार्य करेगा।
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जलीय जीवों की होगी सुरक्षा
विशेष रूप से डिजाइन किया गया यह अवरोधक बदलते जलस्तर के अनुसार खुद समायोजित हो जाता है। इससे मछलियां, ऊदबिलाव और अन्य जलीय जीव इसके नीचे से आसानी से गुजर सकते हैं। अवरोधक जल प्रवाह को बाधित नहीं करता और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक है। पचमढ़ी छावनी बोर्ड इसके रखरखाव, कचरा संग्रहण, छंटाई और निपटान की जिम्मेदारी संभालेगा। कैमरा ट्रैप और नियमित निरीक्षणों के माध्यम से इसकी प्रभावशीलता की निगरानी भी की जाएगी।
भविष्य के लिए बनेगा संरक्षण का मॉडल
विशेषज्ञों का मानना है कि पचमढ़ी में शुरू किया गया यह प्रयोग भविष्य में नागद्वारी मेले जैसे आयोजनों से प्रभावित क्षेत्रों में भी प्लास्टिक प्रदूषण नियंत्रण के लिए मार्गदर्शक साबित हो सकता है। आगामी मानसून में इस अवरोधक से बड़ी मात्रा में कचरे को जंगल की धाराओं में जाने से रोके जाने की उम्मीद है। इससे सतपुड़ा की नदियों और वहां निवास करने वाले वन्यजीवों का संरक्षण सुनिश्चित हो सकेगा। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह पहल एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखी जा रही है। इससे प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को भी नई मजबूती मिलेगी।












