नीम करोली बाबा से अहिल्याबाई तक… भोपाल में डोल ग्यारस की दिखी अनोखी धूम

भोपाल में मंगलवार को डोल ग्यारस के मौके पर आस्था, परंपरा और रंग-बिरंगी झांकियों का अद्भुत नजारा देखने को मिला। पुराने भोपाल की सड़कों पर हजारों श्रद्धालु जुटे और शहर का प्रसिद्ध डोल ग्यारस जुलूस निकाला गया। सबसे खास बात यह रही कि जुलूस में भोपाल के राजा, दूल्हे राजा और अलग-अलग समाजों के डोल लोगों के आकर्षण का केंद्र बने। वहीं नीम करोली बाबा, अहिल्याबाई होल्कर और महात्मा गांधी के रूप में तैयार कलाकारों ने भी लोगों का ध्यान खींचा।
पीपल चौक से शुरू हुआ भव्य जुलूस
डोल ग्यारस का जुलूस पीपल चौक स्थित पीपल जामा मस्जिद के पास से शुरू हुआ। सबसे आगे भोपाल के राजा की प्रतिमा रही। इसके पीछे दूल्हे राजा की झांकी और विभिन्न समाजों के डोल शामिल हुए। जुलूस में धार्मिक और ऐतिहासिक पात्रों के रूप में सजे कलाकार भी नजर आए। नीम करोली बाबा, देवी अहिल्याबाई होल्कर और महात्मा गांधी की झांकियों को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी रही।
पुराने शहर से गुजरकर खटलापुरा पहुंचेगा जुलूस
जुलूस पुराने भोपाल के प्रमुख मार्गों से होकर खटलापुरा मंदिर पहुंचेगा। शाम करीब 7:30 बजे यहां गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा और जुलूस का समापन होगा। जुलूस का मार्ग चौक बाजार, लखेरापुरा, भवानी मंदिर, पीरगेट, सेफिया कॉलेज रोड, इमामबाड़ा चौकी, जनकपुरी पानी की टंकी, जुमेराती गेट, सराफा चौक, इब्राहिमपुरा, रंजन पेन कॉर्नर, सुल्तानिया रोड, बुधवारा, तलैया काली मंदिर, लिली टॉकीज चौराहा और पीएचक्यू तिराहा होते हुए खटलापुरा तक तय किया गया है।
ये भी पढ़ें: डेटा नहीं चाहिए? अब आपके लिए अलग रिचार्ज प्लान देना होगा, TRAI का नया नियम लागू
ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव
डोल ग्यारस जुलूस को देखते हुए पुराने शहर में दोपहर 1 बजे से विशेष ट्रैफिक व्यवस्था लागू की गई है। जुलूस जिस मार्ग से गुजरेगा, वहां जरूरत के अनुसार वाहनों की आवाजाही रोकी जाएगी। पीरगेट, इमामबाड़ा चौकी, जनकपुरी, सुल्तानिया रोड, तलैया काली मंदिर और खटलापुरा के आसपास ट्रैफिक का ज्यादा असर देखने को मिल सकता है।
लोगों को दी गई सलाह
प्रशासन ने पुराने भोपाल और रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले लोगों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी है। वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील भी की गई है। डोल ग्यारस का यह पारंपरिक जुलूस भोपाल की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का अहम हिस्सा माना जाता है। हर साल बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल होकर आस्था और उत्साह का परिचय देते हैं।




















