नैनीताल में दूषित पानी से दो लोगों की मौत, छह इंजीनियर निलंबित

नैनीताल। ज्योलिकोट क्षेत्र में दूषित पानी पीने के बाद 400 से ज्यादा लोग बीमार हुए हैं, जिनमें पीलिया और डायरिया के मरीज शामिल हैं। बीमारी के दौरान एक छात्र और एक महिला की मौत के बाद प्रशासन पर भी सवाल उठे थे। सरकार ने लापरवाही की जांच के बाद छह अधिकारियों को निलंबित किया है, जबकि नैनीताल जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को चेतावनी दी गई है। हाईकोर्ट ने स्वच्छ पानी और पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ पानी की जांच निजी प्रयोगशालाओं से कराने के निर्देश भी दिए हैं।
दूषित पानी से 400 से ज्यादा लोग हुए बीमार
ज्योलिकोट और आसपास के बेलुवाखान, गेठिया, सड़ियाताल, दुर्गापुर, गंजा, वीरभट्टी और छीना समेत कई इलाकों में दूषित पेयजल की वजह से बीमारी फैलने की जानकारी सामने आई। शुरुआत में डायरिया, उल्टी-दस्त और टायफाइड के मामले सामने आए, जिसके बाद पीलिया के मरीजों की संख्या भी बढ़ी। इस पूरे घटनाक्रम में 400 से ज्यादा लोगों के बीमार होने की जानकारी सामने आई है और कई मरीजों को हल्द्वानी के अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती कराया गया। पानी के नमूनों की जांच में कोलीफॉर्म, ई-कोलाई, फीकल कॉलिफॉर्म और फीकल स्ट्रेप्टोकोकस जैसे बैक्टीरिया भी मिले हैं।
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दो मौतों के बाद बढ़ी प्रशासन की चिंता
बीमारी के बीच दो लोगों की मौत के बाद क्षेत्र में चिंता बढ़ गई थी। दोनों की मौत के बाद प्रशासन ने प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाईं और मेडिकल टीमों को घर-घर भेजकर लोगों की जांच शुरू कराई। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को क्लोरीन की गोलियां और ओआरएस वितरित किए गए, जबकि मरीजों के इलाज के लिए डॉक्टरों और एंबुलेंस की व्यवस्था की गई। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के साथ पेयजल व्यवस्था और क्लोरीनेशन की स्थिति की भी जानकारी जुटाई।
छह अधिकारियों को किया गया निलंबित
सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जल संस्थान और पेयजल निगम के छह अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित अधिकारियों पर सरकारी दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने का आरोप है। नैनीताल जल संस्थान के अधिशासी अभियंता अनीश एम पिल्लई को भविष्य में लापरवाही मिलने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
हाईकोर्ट ने कहा, स्वच्छ पानी और इलाज की व्यवस्था हो
मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी संज्ञान लेते हुए प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल और पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। 8 सितंबर की सुनवाई में अदालत ने स्थिति को गंभीर बताते हुए जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल को राहत कार्यों की व्यक्तिगत निगरानी करने को कहा था। अदालत के सामने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि पंत ने दूषित पानी को बीमारी की वजह बताया था। हाईकोर्ट ने पानी की जांच केवल विभागीय स्तर पर कराने के बजाय निजी प्रयोगशालाओं से भी कराने के निर्देश दिए हैं।
सीवर और पेयजल पाइपलाइन की जांच के निर्देश
हाईकोर्ट ने जल संस्थान और पेयजल निगम को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि सीवर और पेयजल की पाइपलाइन आपस में न मिलें। अदालत ने नैनीताल शहर में पानी के दूषित होने और सीवर लीकेज की जांच करने के साथ 20 से 25 स्थानों से पानी के नमूने लेने को कहा है। कोर्ट ने जरूरत पड़ने पर बाहर से विशेषज्ञ डॉक्टरों को बुलाने और प्रभावित लोगों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं। इसके अलावा कुमाऊं क्षेत्र में जल परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने के प्रस्ताव पर संबंधित सचिव को जल्द निर्णय लेने को कहा गया है।
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जांच के बाद तय हुई जिम्मेदारी
दूषित पानी से बीमारी फैलने और दो मौतों के बाद प्रशासन ने मामले की जांच तेज कर दी थी। जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में छह सदस्यीय स्थायी समिति गठित कर कारण, जिम्मेदारी और सुधारात्मक कार्रवाई को लेकर रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद शासन ने अधिकारियों के जवाब तलब किए और संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर छह अधिकारियों को निलंबित किया। सरकार ने साफ किया है कि भविष्य में भी अगर पेयजल व्यवस्था में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।




















