एमपी विधानसभा के मानसून सत्र में आएंगे कई अहम विधेयक:UCC, फायर, कोचिंग और निजी विश्वविद्यालयों पर रहेगा फोकस

अशोक गौतम, भोपाल। प्रस्तावित विधेयकों के लागू होने से निवेशकों, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। फायर सेवा से लेकर निजी विश्वविद्यालय, कोचिंग संस्थानों और अवैध कॉलोनियों के लिए नए नियम लागू किए जा सकते हैं। यूसीसी को लेकर भी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके अलावा कई संशोधन और नए विधेयक भी मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।
अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक
प्रस्तावित अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक में आगजनी की घटनाओं पर फायरकर्मियों को भवन सील करने का अधिकार देने का प्रावधान किया गया है। उन्हें किसी भी जल स्रोत और जल संचय स्थल से पानी लेने का अधिकार भी मिलेगा। घटना स्थल पर पहुंचने की समय-सीमा निर्धारित की जाएगी, ताकि राहत कार्य तेजी से हो सके। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आगजनी की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए एक अलग डायरेक्ट्रेट बनाने का भी प्रस्ताव है। इससे फायर सेवाओं को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।
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यूसीसी और निजी विश्वविद्यालयों में बड़े बदलाव
मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का उद्देश्य सभी धर्मों के नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में समान कानून लागू करना है। प्रस्तावित कानून में विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य करने, बहुविवाह पर रोक और पैतृक संपत्ति में बेटियों को समान अधिकार देने जैसे प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। वहीं निजी विश्वविद्यालय संहिता में संशोधन कर विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की तैयारी है। इसके तहत जमीन की सीमा में छूट, हाईराइज कैंपस और विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए उनकी मुद्रा में फीस लेने का प्रावधान भी किया जा सकता है।
अवैध कॉलोनियों और निजी कोचिंग पर सख्ती
अवैध कॉलोनी संशोधन विधेयक के तहत अनाधिकृत कॉलोनियां विकसित करने वाले कॉलोनाइजरों के खिलाफ सजा और जुर्माने का दायरा बढ़ाया जाएगा। इसमें 10 वर्ष तक की सजा और 5 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है। पुलिस से लेकर पार्षद तक की जिम्मेदारी तय करने और 15 दिन के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित करने की व्यवस्था भी की जाएगी। वहीं निजी कोचिंग संस्थानों के लिए भारत सरकार के निजी कोचिंग रेगुलेट्री 2025 के अनुसार रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा तथा विद्यार्थियों की सुरक्षा, बैठने की व्यवस्था, पार्किंग और फीस वापसी जैसे नियम भी लागू किए जाएंगे।
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विद्यार्थियों और निवेशकों को मिलेगा लाभ
सरकार का मानना है कि प्रस्तावित विधेयकों के लागू होने से उच्च शिक्षा, निवेश और शहरी विकास को नई गति मिलेगी। निजी विश्वविद्यालयों में विदेशी निवेश बढ़ने से शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर विकसित होंगे। वहीं कोचिंग संस्थानों के लिए स्पष्ट नियम बनने से विद्यार्थियों के हितों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी। अवैध कॉलोनियों पर सख्ती और फायर सेवा के नए प्रावधान आम नागरिकों की सुरक्षा और सुविधा को मजबूत करने में मदद करेंगे।
ये अन्य विधेयक भी आ सकते हैं
मानसून सत्र में मध्य प्रदेश विनियोग विधेयक, 2026, मध्य प्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026, मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) विधेयक, 2026, मध्य प्रदेश नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्य प्रदेश संशोधन) विधेयक, 2026, मध्य प्रदेश श्रम संहिता, 2026 तथा मध्य प्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पेश किए जा सकते हैं। इन सभी प्रस्तावित विधेयकों पर विधानसभा में चर्चा के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सरकार का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में कानूनी व्यवस्था को अधिक प्रभावी और समयानुकूल बनाना है।












