पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मोकामा से जेडीयू विधायक और चर्चित बाहुबली नेता अनंत सिंह को करीब चार महीने बाद बड़ी राहत मिली है। पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद सोमवार को उन्हें पटना की बेऊर जेल से रिहा कर दिया गया। जेल से बाहर निकलते ही समर्थकों की भारी भीड़ जमा हो गई।
समर्थकों ने नारेबाजी की, फूल बरसाए और आतिशबाजी कर अपनी खुशी जाहिर की। जेल से बाहर आने के बाद अनंत सिंह लैंड क्रूजर गाड़ी में अपने पटना स्थित आवास के लिए रवाना हुए, जहां करीब 50 गाड़ियों का काफिला उनके साथ चल रहा था। रिहाई के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि, उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है और घटना के समय वे मौके से करीब 4 किलोमीटर दूर थे।
अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्याकांड में 19 मार्च को पटना हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सोमवार 23 मार्च को उन्हें बेऊर जेल से रिहा किया गया। करीब चार महीने से वे जेल में बंद थे। उनकी गिरफ्तारी 1 नवंबर 2025 को हुई थी, जब बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मोकामा टाल इलाके में दुलारचंद यादव की हत्या हुई थी।
जेल से बाहर आते ही अनंत सिंह ने कहा कि, हमने समर्थकों से पहले ही कहा था कि हम जल्दी बाहर आ जाएंगे। हमें झूठे केस में फंसाया गया है। जहां घटना हुई थी, वहां से हम चार किलोमीटर दूर थे।
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अनंत सिंह की रिहाई की खबर मिलते ही बेऊर जेल के बाहर सैकड़ों समर्थक जमा हो गए थे। जैसे ही वे जेल से बाहर आए, समर्थकों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। जेल से निकलने के बाद वे सीधे पटना के माल रोड स्थित अपने आवास पहुंचे। वहां पहले से ही स्वागत की भव्य तैयारी की गई थी। उनके आवास को फूल-मालाओं और सजावट से सजा दिया गया था। समर्थकों ने फूलों की बारिश की और आतिशबाजी कर खुशी मनाई।
अनंत सिंह की रिहाई को लेकर उनके पटना स्थित आवास पर हजारों समर्थकों के लिए भव्य भोज का भी आयोजन किया गया है। जानकारी के मुताबिक, उनके समर्थकों के लिए करीब 3 लाख रसगुल्ले तैयार किए गए हैं। इसके अलावा कई तरह के व्यंजन भी बनाए जा रहे हैं।
भोज में शामिल व्यंजन
बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम में 10 से 15 हजार समर्थकों के शामिल होने की संभावना है। इसके लिए बड़ा पंडाल लगाया गया है और करीब 1 से डेढ़ हजार कुर्सियां लगाई गई हैं।
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रिहाई के बाद अनंत सिंह अब अपने विधानसभा क्षेत्र मोकामा में शक्ति प्रदर्शन की तैयारी में हैं। जानकारी के मुताबिक, मंगलवार को वे पटना से मोकामा के लिए रवाना होंगे और इस दौरान करीब 50 किलोमीटर लंबा रोड शो करेंगे। यह रोड शो मोकामा से बड़हिया तक जाएगा और रास्ते में कई जगह समर्थक उनका स्वागत करेंगे। बड़हिया पहुंचने के बाद अनंत सिंह महारानी स्थान मंदिर में पूजा-अर्चना भी करेंगे।
मीडिया से बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि, उन्हें बार-बार ऐसे मामलों में क्यों फंसाया जाता है, तो उन्होंने तीखे अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि, बार-बार काहे फंसाया जाता है, ये हम बताएं? आप लोग ही जाकर पूछिए। सब लोग जानते हैं कि हम चार किलोमीटर दूर थे। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे मामले की सच्चाई जल्द ही सामने आएगी और वे जल्द ही विस्तार से इस बारे में बात करेंगे।
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यह मामला 30 अक्टूबर 2025 का है। उस समय बिहार विधानसभा चुनाव का प्रचार चल रहा था। मोकामा टाल इलाके में दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में आरोप लगाया गया कि इस घटना में अनंत सिंह और उनके समर्थक शामिल थे। इसके बाद 1 नवंबर की देर रात पटना के तत्कालीन एसएसपी कार्तिकेय शर्मा खुद मोकामा पहुंचे और अनंत सिंह को उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया। 2 नवंबर को कोर्ट में पेशी के बाद उन्हें बेऊर जेल भेज दिया गया था।
अनंत सिंह के वकीलों ने पटना हाईकोर्ट में जमानत के लिए कई महत्वपूर्ण दलीलें दीं।
1. गोली मारने का आरोप साबित नहीं
अनंत सिंह पर आरोप था कि उन्होंने दुलारचंद यादव के पैर में गोली मारी थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण लाठी से मारना और वाहन से कुचलना बताया गया।
2. पुलिसकर्मियों के बयान
घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों के बयान में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि अनंत सिंह ने गोली चलाई थी।
3. पोते का पहला बयान
दुलारचंद यादव के पोते ने अपने पिता को फोन कर सिर्फ इतना कहा था कि दादा की मौत हो गई है। उसने हत्या का जिक्र नहीं किया था।
4. राजनीतिक कारण
वकीलों ने कहा कि अनंत सिंह एक बड़े राजनीतिक नेता हैं, इसलिए उन पर अक्सर राजनीतिक कारणों से आरोप लगाए जाते हैं।
दुलारचंद यादव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई गंभीर चोटों का जिक्र किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, शरीर पर कई गहरे घाव मिले, छाती की कई पसलियां टूटी हुई थीं। फेफड़े फटे हुए मिले, सिर, घुटने और पीठ पर गंभीर चोटें थीं। दाहिने पैर के पास गोली लगने का निशान भी मिला। मेडिकल रिपोर्ट में मौत का कारण छाती और सिर पर गंभीर चोटों से हुआ कार्डियो-पल्मोनरी फेल्योर बताया गया।
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पटना पुलिस के अनुसार इस मामले में अब तक चार एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
जानकारी के मुताबिक, हत्या से दो दिन पहले दुलारचंद यादव ने अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि, नीलम देवी असल में नीलम खातून हैं और चुनाव के दौरान उनके बारे में अपमानजनक टिप्पणियां की थीं। इस बयान के बाद इलाके में राजनीतिक और सामाजिक तनाव बढ़ गया था।
दुलारचंद यादव बाढ़-मोकामा इलाके का कुख्यात अपराधी माना जाता था। उस पर कई आपराधिक मामले दर्ज थे। उसके खिलाफ जमीन कब्जा, रंगदारी, फायरिंग, मारपीट और अवैध वसूली जैसे आरोप थे। 1990 के दशक में लालू प्रसाद यादव के शासनकाल में उसकी क्षेत्र में काफी पकड़ मानी जाती थी। 1995 में उसने बाढ़ से निर्दलीय चुनाव भी लड़ा था। बाद में वह आरजेडी से जुड़ा और लालू यादव का करीबी माना जाता था। हालांकि, 2025 के विधानसभा चुनाव में वह जनसुराज के समर्थन में सक्रिय था।
अनंत सिंह बिहार की राजनीति में एक बेहद प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। खास बात यह है कि जेल में रहने के बावजूद उन्होंने चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की। मोकामा सीट पर उन्होंने कद्दावर नेता सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को हराया था। हाल ही में राज्यसभा चुनाव के दौरान भी वे जेल से विधानसभा पहुंचे थे और मतदान किया था।
अनंत सिंह का राजनीतिक करियर भी काफी दिलचस्प रहा है।
उनकी पहचान बिहार की राजनीति में एक मजबूत और प्रभावशाली नेता के रूप में रही है।
संपत्ति और केस
चुनावी हलफनामे के अनुसार
कुल संपत्ति: करीब 100 करोड़ रुपये
आपराधिक केस: 28 मामले दर्ज
हालांकि कई मामलों में उन्हें कोर्ट से राहत भी मिली है।
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2022 में अनंत सिंह को अवैध हथियार रखने के मामले में दोषी ठहराया गया था। इस मामले में उन्हें 10 साल की सजा हुई थी और उनकी विधानसभा सदस्यता भी खत्म हो गई थी। लेकिन 14 अगस्त 2024 को पटना हाईकोर्ट ने उन्हें इस मामले में बरी कर दिया।
हाल ही में अनंत सिंह ने राजनीति से संन्यास लेने के संकेत भी दिए थे। राज्यसभा चुनाव के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा था कि अब वे खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा था कि भविष्य में उनके बच्चे राजनीति की जिम्मेदारी संभालेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजनीति में सक्रिय नहीं रहेंगे, तो वे भी चुनाव नहीं लड़ेंगे।