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11 दवाओं के सैंपल फेल!ब्लीडिंग रोकने वाली दवा निकली नकली, डिलीवरी के बाद 4 महिलाओं की मौत का खुलासा

राजस्थान में डिलीवरी के दौरान इस्तेमाल होने वाले ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का सैंपल फेल होने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ड्रग कंट्रोल विभाग ने इसके उपयोग और बिक्री पर रोक लगा दी है। कोटा में इसी दवा के इस्तेमाल से कुछ प्रसूताओं की मौत का मामला सामने आया है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ गए हैं।
ब्लीडिंग रोकने वाली दवा निकली नकली, डिलीवरी के बाद 4 महिलाओं की मौत का खुलासा
फाइल फोटो

जयपुर। राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां डिलीवरी के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का सैंपल जांच में फेल पाया गया है। इसके बाद ड्रग कंट्रोल विभाग ने इस दवा की बिक्री और उपयोग पर पूरे राज्य में रोक लगा दी है। इस इंजेक्शन का उपयोग प्रसव के दौरान ब्लीडिंग रोकने के लिए किया जाता है। कोटा मेडिकल कॉलेज में इसी दवा के इस्तेमाल से कई प्रसूताओं की मौत की खबर सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। प्रशासन ने जांच तेज कर दी है।

सैंपल फेल होने के बाद बड़ा एक्शन

ड्रग कंट्रोल विभाग ने बताया कि जैक्सन लेबोरेट्रीज अमृतसर द्वारा बनाए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का सैंपल जांच में फेल हो गया है। जांच में पाया गया कि दवा में जरूरी कंपोनेंट पर्याप्त मात्रा में मौजूद नहीं थे। इसी कारण इसके उपयोग को तुरंत प्रभाव से रोक दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने आदेश जारी कर पूरे राज्य में इस इंजेक्शन के स्टॉक को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही संबंधित कंपनी की अन्य दवाओं के सैंपल भी जांच के लिए भेजे गए हैं।

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कोटा में इस्तेमाल और मौत का मामला

कोटा मेडिकल कॉलेज में इसी कंपनी के 1 एमएल और 5 एमएल बैच के इंजेक्शन का उपयोग किया गया था। बताया जा रहा है कि लगभग 12 हजार से अधिक महिलाओं को यह इंजेक्शन लगाया गया था। इनमें से कुछ मामलों में गंभीर स्थिति बनी और कुछ प्रसूताओं की मौत भी हुई। डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ एक दवा को मौत का कारण मानना जल्दबाजी होगी। उनका कहना है कि प्रसव के दौरान कई मेडिकल कारण हो सकते हैं, जिनकी जांच जरूरी है।

क्यों किया जाता है इंजेक्शन का उपयोग?

ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का उपयोग डिलीवरी के समय किया जाता है ताकि प्रसव प्रक्रिया को आसान बनाया जा सके। यह दवा बच्चे के जन्म के बाद होने वाले अत्यधिक रक्तस्राव को रोकने में मदद करती है। इसलिए इसे प्रसूति चिकित्सा में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है लेकिन अब सैंपल फेल होने के बाद इसकी गुणवत्ता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

अस्पतालों में दवा सप्लाई पर सवाल

कोटा में जिस बैच का इंजेक्शन इस्तेमाल हुआ, उसकी सप्लाई बड़े स्तर पर सरकारी अस्पतालों में की गई थी। हजारों महिलाओं को यह दवा दी गई थी। अब ड्रग कंट्रोल विभाग ने स्टॉक जब्त कर लिया है और आगे की जांच जारी है। इसके अलावा उसी कंपनी के अन्य बैच की जांच भी की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि समस्या सिर्फ एक बैच में थी या पूरी सप्लाई में।

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स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना के बाद राजस्थान की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की गुणवत्ता पर और सख्त निगरानी होनी चाहिए। दवा की जांच प्रक्रिया को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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