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मोदी सरकार का किसानों को तोहफा : PM धन-धान्य कृषि योजना को मोदी कैबिनेट की मंजूरी, 100 जिलों में 1.7 करोड़ किसानों को मिलेगा फायदा

- फसल विविधता, टिकाऊ खेती, भंडारण और सस्ती ऋण सुविधा पर फोकस; रिन्यूएबल एनर्जी को भी 27,000 करोड़ का निवेश
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मोदी सरकार का किसानों को तोहफा : PM धन-धान्य कृषि योजना को मोदी कैबिनेट की मंजूरी, 100 जिलों में 1.7 करोड़ किसानों को मिलेगा फायदा
मोदी कैबिनेट मीटिंग
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY)’ को औपचारिक मंजूरी दे दी गई। यह योजना 2025-26 से शुरू होकर 6 वर्षों तक चलेगी और इसका उद्देश्य देश के 100 चयनित कम कृषि उत्पादन वाले जिलों में किसानों की उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधता को बढ़ावा देना और कृषि को टिकाऊ बनाना है। इस योजना से 1.7 करोड़ किसानों को सीधे लाभ मिलने का अनुमान है।

    100 जिलों में होगी योजना की शुरुआत

    प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना नीति आयोग के “आकांक्षी जिलों” कार्यक्रम से प्रेरित है, लेकिन इसका केंद्रबिंदु केवल कृषि और इससे जुड़े क्षेत्र होंगे। योजना में कम उत्पादकता, सीमित फसल चक्र और कम ऋण वितरण वाले जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी। हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से कम से कम एक जिला इसमें शामिल किया जाएगा।

    योजना की प्रमुख विशेषताएं

    • योजना के तहत किसानों को सिर्फ गेहूं और धान जैसे पारंपरिक फसलों पर निर्भर न रहकर अन्य वैकल्पिक फसलों और प्राकृतिक, जैविक व जल-संवेदनशील खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
    • कटाई के बाद की हानि को कम करने के लिए पंचायत और ब्लॉक स्तर पर गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और वैल्यू ऐडिशन यूनिट्स बनाए जाएंगे।
    • प्रत्येक किसान तक लंबी और छोटी अवधि के सस्ते कर्ज और आधुनिक सिंचाई प्रणाली की सुविधा पहुंचाई जाएगी।

    स्थानीय स्तर पर योजना और निगरानी

    हर जिले में “धन-धान्य समिति” बनाई जाएगी, जिसमें स्थानीय विशेषज्ञ, किसान और अधिकारी मिलकर कृषि संबंधी कार्यों की योजना और मॉनिटरिंग करेंगे। इसके अलावा, नीति आयोग द्वारा तैयार डिजिटल डैशबोर्ड पर 117 बिंदुओं के आधार पर हर जिले की प्रगति पर निगरानी की जाएगी।

    36 केंद्रीय योजनाओं का होगा समन्वय

    इस योजना को सफल बनाने के लिए 11 मंत्रालयों की 36 योजनाओं को एकीकृत किया जाएगा। इसके अलावा राज्य सरकारों की योजनाएं और निजी क्षेत्र की भागीदारी भी इसमें जोड़ी जाएगी। इस एकीकृत प्रयास से केंद्र सरकार को हर साल 24,000 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे।

    कैबिनेट ने दो बड़े रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स को भी दी मंजूरी

    1. एनटीपीसी को 20,000 करोड़ का निवेश : कैबिनेट ने एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (NGEL) को रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश के लिए 20,000 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। यह निवेश सोलर, विंड और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे प्रोजेक्ट्स में किया जाएगा, जिससे 2032 तक 60 गीगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता विकसित की जा सकेगी।
    2. एनएलसी इंडिया लिमिटेड को 7,000 करोड़ की पूंजी : एनएलसी इंडिया लिमिटेड को भी अपनी सहायक कंपनी NLC इंडिया रिन्यूएबल्स लिमिटेड (NIRL) के जरिए क्लीन टेक्नोलॉजी, बैटरी स्टोरेज, स्मार्ट ग्रिड आदि क्षेत्रों में निवेश के लिए 7,000 करोड़ रुपए की विशेष मंजूरी मिली है।

    क्या बोले केंद्रीय मंत्री?

    सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता को बढ़ाएगी, सिंचाई व्यवस्था में सुधार करेगी और कृषि उत्पादकता को ऊंचा ले जाएगी। इससे कृषि क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन की नींव रखी जाएगी।

    Mithilesh Yadav
    By Mithilesh Yadav

    वर्तमान में पीपुल्स समाचार के डिजिटल विंग यानी 'पीपुल्स अपडेट' में बतौर सीनियर सब-एडिटर कार्यरत हूं।...Read More

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