मोआब (अमेरिका)। यूटा के मोआब शहर के पास कोलोराडो नदी के किनारे कई दशकों से पड़ा 17 मिलियन टन यूरेनियम का खतरनाक कचरा आखिरकार हटा दिया गया है। यह इलाका अपनी लाल चट्टानों और टूरिज्म के लिए दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन नदी किनारे पड़े इस कचरे ने पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी। यह कचरा कोल्ड वॉर के समय चलने वाली यूरेनियम प्रोसेसिंग फैक्ट्री से निकला था। U.S. डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी के मुताबिक 2009 में इस मलबे को रेल के जरिए 30 मील दूर क्रेसेंट जंक्शन में बने खास डिस्पोजल सेल में शिफ्ट करना शुरू किया गया था। सितंबर 2026 में मोआब यूरेनियम मिल टेलिंग्स रिमेडियल एक्शन (UMTRA) प्रोजेक्ट ने यह बड़ी उपलब्धि पूरी की।
नदी किनारे कैसे पहुंचा परमाणु कचरा
मोआब में जो मटीरियल पड़ा था, वह यूरेनियम मिल टेलिंग्स था (यूरेनियम अयस्क को प्रोसेस करने के बाद बचा हुआ रेत जैसा कचरा)। यह चमकीले पीले यूरेनियम जैसा नहीं दिखता है लेकिन इसमें रेडियोएक्टिव तत्व और कई हानिकारक केमिकल्स होते हैं, जिन्हें लंबे समय तक मैनेज करने की जरूरत होती है। पुरानी मोआब यूरेनियम मिल कोलोराडो नदी के बिल्कुल पास चलती थी। यह नदी दक्षिण-पश्चिम अमेरिका के लिए लाइफलाइन है। यह आसपास की कम्युनिटी को पीने का पानी देती है, खेती में काम आती है और बेहद नाजुक इकोसिस्टम से होकर गुजरती है।
खुले में छोड़ दिया था
मिल बंद होने के बाद टेलिंग्स का विशाल ढेर वहीं नदी किनारे छोड़ दिया गया। कई सालों तक यह कचरा खुले में पड़ा रहा। इससे सबसे बड़ा खतरा यह था कि हवा, कटाव, बाढ़ और जमीन के अंदर पानी की हलचल से रेडियोएक्टिव प्रदूषण फैल सकता था। यह आम कंस्ट्रक्शन वेस्ट नहीं था, इसलिए इसे हटाने के लिए एक पूरी सेफ्टी प्लान के साथ काम करना पड़ा। सावधान यह बरती गई कि मजदूरों, आसपास के लोगों, ट्रांसपोर्ट रूट और नदी के इलाके को सुरक्षित रखा जा सके।
2009 से शुरू हुआ रेल से कचरा हटाने का मिशन
ऊर्जा विभाग ने ट्रकों से बस्तियों और सड़कों के बीच से खतरनाक कचरा ले जाने के बजाय रेल रूट को चुना। 2009 में टेलिंग्स को मोआब साइट से क्रेसेंट जंक्शन तक ले जाने के लिए स्पेशल रेल शिपमेंट शुरू किया गया। डिस्पोजल सेल मोआब से करीब 30 मील दूर बनाया गया है। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि अंदर रखा मटीरियल पूरी तरह सील रहे और पानी, हवा या कटाव से प्रदूषण फैलने का खतरा न हो।
बहुत बड़ा ऑपरेशन चलाया
17 मिलियन टन मलबा हटाना कोई छोटा काम नहीं था, यह एक बड़ा लॉजिस्टिक ऑपरेशन था। कर्मचारियों ने पहले टेलिंग्स की खुदाई की, फिर उसे रेल कंटेनरों में लोड किया, डिस्पोजल साइट तक पहुंचाया और इंजीनियरिंग से तैयार किए गए सेल के अंदर सुरक्षित रखा। इस पूरी प्रक्रिया के हर स्टेप पर निगरानी और सेफ्टी प्रोटोकॉल का पालन किया गया। काम के दौरान मौसम में बदलाव, मशीनों के मेंटेनेंस, रेल के टाइम-टेबल और धूल या प्रदूषित कणों को फैलने से रोकने जैसी चुनौतियों का भी खास ध्यान रखा गया।
लोकेशन इतनी अहम क्यों थी
कोलोराडो नदी के किनारे टेलिंग्स के पहाड़ की मौजूदगी ही इस सफाई अभियान को इतना जरूरी बनाती थी। यह नदी सिर्फ पानी का सोर्स नहीं, बल्कि पूरे इलाके की पहचान है। मोआब अपने नेशनल पार्क, रेगिस्तानी नजारों और एडवेंचर एक्टिविटीज के लिए फेमस है। नदी का किनारा वन्यजीवों का घर है और पानी की कमी वाले इस रेगिस्तानी इलाके में जीवन की धुरी है। ऐसे में यहां की सुरक्षा के लिए दिखने वाले कचरे के साथ-साथ मिट्टी और भूजल में घुले अदृश्य प्रदूषण पर भी ध्यान देना जरूरी था। ऊर्जा विभाग के इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य सिर्फ ऊपर पड़ा कचरे का ढेर हटाना नहीं, बल्कि उसके नीचे और आसपास की जमीन में फैले प्रदूषण को भी ठीक करना है। नदी किनारे से रेडियोएक्टिव मलबा हटने से बड़ा खतरा तो टल गया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सफाई का काम पूरी तरह खत्म हो गया। साइट पर अभी भी निगरानी, कंस्ट्रक्शन और जमीन को फिर से पहले जैसा बनाने का काम बाकी है।