विभाजन का झेला दर्द!पाकिस्तान में जन्म, भारत में मिली पहचान... ऐसे बने करोड़ों दिलों के 'भारत कुमार'

मुंबई। भारतीय सिनेमा में जब भी देशभक्ति फिल्मों की बात होती है, सबसे पहले मनोज कुमार का नाम याद आता है। उन्होंने सिर्फ फिल्मों में अभिनय ही नहीं किया बल्कि ऐसी कहानियां भी बड़े पर्दे पर उतारीं, जिन्होंने लोगों के दिलों में देश के प्रति गर्व की भावना जगाई। यही वजह रही कि उन्हें प्यार से 'भारत कुमार' कहा जाने लगा। उनका जीवन संघर्ष, मेहनत और सफलता की ऐसी कहानी है, जो आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करती है।
विभाजन के दर्द से शुरू हुआ जीवन का सफर
मनोज कुमार का जन्म 24 जुलाई 1937 को एबटाबाद में हुआ था, जो उस समय ब्रिटिश भारत का हिस्सा था और अब पाकिस्तान में है। उनका असली नाम हरिकृष्ण गिरी गोस्वामी था। देश के विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया। शुरुआती दिनों में परिवार ने कई मुश्किलों का सामना किया लेकिन इन परिस्थितियों ने उनके हौसले को कमजोर नहीं होने दिया। आगे चलकर उन्होंने अपनी पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से पूरी की और यहीं से फिल्मों में करियर बनाने का सपना मजबूत हुआ।
दिलीप कुमार से मिली नई पहचान
बचपन में उन्होंने दिलीप कुमार की फिल्म 'शबनम' देखी थी। इस फिल्म में दिलीप कुमार के किरदार का नाम मनोज था। यह नाम उन्हें इतना पसंद आया कि उन्होंने अभिनेता बनने के बाद अपना नाम हरिकृष्ण गिरी गोस्वामी से बदलकर मनोज कुमार रख लिया। यही नाम बाद में भारतीय सिनेमा की बड़ी पहचान बन गया।
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शुरुआत नहीं रही आसान
मनोज कुमार ने वर्ष 1957 में फिल्म 'फैशन' से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। शुरुआती फिल्मों से उन्हें बड़ी सफलता नहीं मिली। कई साल तक उन्होंने लगातार मेहनत की और छोटे-बड़े किरदार निभाए। उनकी लगन और धैर्य ने आखिरकार उन्हें वह पहचान दिलाई, जिसका वह सपना देखते थे।
'शहीद' ने बदल दी किस्मत
साल 1965 में रिलीज हुई फिल्म 'शहीद' उनके करियर का बड़ा मोड़ साबित हुई। इस फिल्म में उन्होंने भगत सिंह का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। फिल्म के देशभक्ति गीत और उनका दमदार अभिनय आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। इसी फिल्म के बाद उन्हें गंभीर और प्रभावशाली अभिनेता के रूप में पहचान मिली।
'उपकार' से बने पूरे देश के 'भारत कुमार'
मनोज कुमार के करियर की सबसे बड़ी सफलता फिल्म 'उपकार' रही। यह फिल्म तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के 'जय जवान, जय किसान' के संदेश से प्रेरित थी। फिल्म में देशभक्ति, किसान और सैनिक के जीवन को बेहद भावुक तरीके से दिखाया गया। दर्शकों ने इसे खूब पसंद किया और इसी के बाद मनोज कुमार को 'भारत कुमार' के नाम से जाना जाने लगा। इस फिल्म के जरिए उन्होंने निर्देशन की दुनिया में भी कदम रखा।
एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्में
'उपकार' के बाद मनोज कुमार ने कई ऐसी फिल्मों में काम किया, जो आज भी याद की जाती हैं। 'पूरब और पश्चिम' में उन्होंने भारतीय संस्कृति का महत्व दिखाया। 'रोटी कपड़ा और मकान' ने समाज की बड़ी समस्याओं को सामने रखा, जबकि 'क्रांति' और 'शोर' जैसी फिल्मों ने भी दर्शकों का दिल जीत लिया। उनकी फिल्मों की खास बात यह थी कि उनमें मनोरंजन के साथ मजबूत संदेश भी होता था।
यादगार गीतों ने बढ़ाई फिल्मों की पहचान
मनोज कुमार की फिल्मों के कई गीत आज भी लोगों की पसंद बने हुए हैं। 'मेरे देश की धरती', 'एक प्यार का नगमा है', 'कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे', 'कसमें वादे प्यार वफा' और 'मैं ना भूलूंगा' जैसे गीत आज भी हर पीढ़ी सुनना पसंद करती है। इन गीतों ने उनकी फिल्मों को और भी खास बना दिया।
सादा जीवन और पारिवारिक छवि
फिल्मी दुनिया में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बावजूद मनोज कुमार का नाम किसी बड़े विवाद से नहीं जुड़ा। उनकी पत्नी शशि गोस्वामी थीं। उनके दो बेटे विशाल गोस्वामी और कुनाल गोस्वामी हैं। उन्होंने हमेशा अपने परिवार और काम को प्राथमिकता दी। यही वजह रही कि उनकी छवि एक सादगी पसंद और पारिवारिक अभिनेता की बनी रही।
सम्मानों से भरा रहा शानदार सफर
भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें कई बड़े सम्मान मिले। वर्ष 1992 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया। इसके बाद उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से भी नवाजा गया। इसके अलावा उन्हें कई फिल्मफेयर पुरस्कार और अन्य सम्मान भी मिले। उनके अभिनय, निर्देशन और लेखन को हमेशा सराहा गया।
हमेशा याद रहेंगे 'भारत कुमार'
4 अप्रैल 2025 को मुंबई में 87 वर्ष की आयु में मनोज कुमार का निधन हो गया। उनके जाने से भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसने फिल्मों के जरिए देशभक्ति को नई पहचान दी। उनकी फिल्में आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं और आने वाली पीढ़ियां भी उन्हें एक ऐसे अभिनेता के रूप में याद रखेंगी, जिसने मनोरंजन के साथ देशप्रेम का संदेश भी दिया।











