मुंबई कूच से पहले भावुक हुए मनोज जरांगे, बोले- शायद ये आखिरी मुलाकात हो..!

मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल 17वें दिन भी अनशन पर हैं। उन्होंने कहा कि सलाइन और दूसरी चिकित्सा मदद बंद करने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ रही है। जरांगे आज जालना से मुंबई के लिए रवाना होंगे। उन्होंने समर्थकों से रास्ते में भीड़ न जुटाने और फिलहाल उनके मार्च में शामिल नहीं होने की अपील की है।
मुंबई कूच से पहले भावुक हुए मनोज जरांगे, बोले- शायद ये आखिरी मुलाकात हो..!
मनोज जरांगे का मुंबई मार्च

जालना। मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे मनोज जरांगे पाटिल ने मंगलवार को भावुक बयान दिया। उन्होंने कहा कि 17 दिन से जारी भूख हड़ताल के बीच उनकी हालत कमजोर हो रही है और मुंबई की यह यात्रा महाराष्ट्र के लोगों से उनकी आखिरी मुलाकात भी हो सकती है। जरांगे 15 सितंबर को जालना के अंतरवाली सराटी से मुंबई के लिए निकलने की तैयारी में हैं। उनका रास्ता पटोदा, श्रीगोंदा, हडपसर और खोपोली से होकर गुजरेगा। वह 19 सितंबर को मुंबई पहुंचने की योजना बना रहे हैं। इस बीच उन्होंने यात्रा में सिर्फ चार-पांच लोगों के साथ जाने की बात कही है।

17वें दिन अनशन, चिकित्सा मदद भी छोड़ी

मनोज जरांगे ने बताया कि अनशन के दौरान कुछ समय तक उन्होंने सलाइन और दूसरी मेडिकल मदद ली थी। उनका कहना है कि सरकार और समाज की अपील पर उन्होंने इलाज स्वीकार किया था लेकिन मांगों पर कोई ठोस जवाब नहीं मिलने के बाद उन्होंने इसे फिर बंद कर दिया। जरांगे के मुताबिक सलाइन लेने के दौरान उनका ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन स्तर सामान्य था। अब चिकित्सा सहायता और पानी छोड़ने के बाद उन्हें कमजोरी और पेट में जलन जैसी परेशानी महसूस हो रही है।

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बोले- शायद यह आखिरी मुलाकात हो

जरांगे ने अपने समर्थकों से कहा कि वह मुंबई की ओर लगभग अकेले रवाना होंगे। उन्होंने रास्ते में बड़े स्वागत कार्यक्रम नहीं करने की अपील की। उनका कहना है कि वह ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे हैं, इसलिए अनावश्यक भीड़ और कार्यक्रम से बचा जाए। उन्होंने लोगों से कहा कि अगर रास्ते में उनसे मिलना हो तो आशीर्वाद देने आएं, लेकिन अभी मुंबई मार्च में शामिल न हों। जरांगे ने यह भी कहा कि यह यात्रा गोदावरी क्षेत्र और महाराष्ट्र के लोगों के साथ उनकी आखिरी विदाई भी हो सकती है।

फडणवीस सरकार पर साधा निशाना

जरांगे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मराठा आरक्षण आंदोलन को कमजोर करने के लिए राजनीतिक रणनीति अपनाई जा रही है। उन्होंने समाज से एकजुट रहने और सरकार के हर कदम का जवाब देने की अपील की। जरांगे ने कहा कि मराठा समाज में नेतृत्व की कमी नहीं है। उनका कहना है कि अगर एक व्यक्ति आंदोलन में आगे नहीं रह पाएगा तो दूसरा नेतृत्व संभाल लेगा। उन्होंने समाज से ऐसे नेता या दल का साथ देने को कहा, जो आरक्षण की मांग को आगे बढ़ाए।

'शरीर गिर जाए, लेकिन लड़ाई नहीं रुके'

अपने संबोधन में जरांगे ने आंदोलन को लेकर बेहद भावुक बात कही। उन्होंने कहा कि उनका शरीर जहां भी गिर जाए लेकिन मराठा समाज को अपने अधिकार की लड़ाई मजबूती से जारी रखनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह बिना उद्देश्य के मरना नहीं चाहते, बल्कि समाज के अधिकार की लड़ाई लड़ते हुए आगे बढ़ना चाहते हैं।

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मुंबई जाने से पहले समर्थकों को खास संदेश

जरांगे ने समर्थकों से स्वागत के दौरान माला और शॉल नहीं पहनाने को कहा। उनका कहना है कि इससे संक्रमण और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी बढ़ सकती है। उन्होंने बड़े मंच बनाने के बजाय रास्ते में छोटे आराम केंद्र तैयार करने की सलाह दी है, ताकि यात्रा के दौरान जरूरत पड़ने पर वह कुछ देर रुक सकें। उन्होंने समर्थकों से फिलहाल उनके पीछे आने में पैसा खर्च नहीं करने की अपील भी की। जरांगे ने कहा कि बड़े मुंबई आंदोलन के लिए धन और वाहनों की व्यवस्था संभालकर रखी जाए।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी)| एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारियों...Read More

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