मंडला की आदिवासी महिलाओं के बनाए गोबर के बहुरंगी दीयों से कई राज्य होंगे रोशन

100 से अधिक महिलाओं ने गोंडी कला से सजे दीये बनाकर बनी आत्मनिर्भर
मंडला की  आदिवासी महिलाओं के बनाए गोबर के बहुरंगी दीयों से कई राज्य होंगे रोशन

संजय कुमार तिवारी
जबलपुर। आदिवासी बहुल जिले मंडला में इस दीपावली एक नई रोशनी फैल रही है। आदिवासी महिलाएं गोबर से बने रंग-बिरंगे दीयों से किस्मत चमका रही हैं। 100 से अधिक आदिवासी महिलाओं का समूह पारंपरिक गोबर दीयों को आधुनिक गोंडी पेंटिंग से सजा रहा है। इन सुंदर देसी दीयों की मांग अब देश के अन्य राज्यों महाराष्ट्र, छत्तीसगढ व उप्र तक पहुंच चुकी है। अब तक 15 हजार से अधिक दीये इन राज्यों में आॅनलाइन भेजे जा चुके हैं और 30 हजार से ज्यादा की आॅनलाइन बुकिंग है। 

कितने दीये कहां भेजे गए

मुंबई     3500
पुणे       2000
ठाणे     1800
छग     2000
उप्र      2000
डिंडौरी     1200
लोकल     2500 

पवित्रता-पर्यावरण का संरक्षण 

दीपावली के चलते गोबर से बने दीपकों की डिमांड तेजी से बढ़ी है। लोग इन्हें न केवल सजावट के लिए बल्कि पवित्रता और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी अपने घरों में स्थान दे रहे हैं। क्योंकि गोबर को परंपरागत रूप से शुद्ध और शुभ माना जाता है।

 घर बैठे आमदनी का साधन मिला

हमें न केवल नई कला सीखने का मौका मिला है, बल्कि घर बैठे आमदनी का साधन भी। हमें इससे अब 7 हजार रुपए की कमाई हो चुकी है। अभी काम चल रहा है, इससे भी कमाई होगी। 
प्रमिला उइके, आदिवासी महिला 

People's Reporter
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