भोपाल। रातभर रखवाली के बाद जिस बाघ का रायसेन जिले के बाड़ी के पास से सुबह रेस्क्यू किया गया था, उसकी इलाज के दौरान वनविहार भोपाल में मौत हो गई। उसे रायसेन जिले के बाड़ी के पास से रेस्क्यू किया गया था। उम्मीद की जा रही थी कि वन विहार जाने के बाद उसे बचा लिया जाएगा लेकिन उसने दम तोड़ दिया।
रायसेन जिले में बाड़ी से 7 किलोमीटर दूर एनएच-45 सिंघोरी अभयारण्य पीपलवाली क्षेत्र में पुलिया के पास शनिवार-रविवार रात बाघ की गुर्राहट सुनाई दी। यहां बाघ घायल होने की सूचना वाहन चालकों ने गांववालों को दी, जिसके बाद वनविभाग को खबर की गई। इसके बाद वन अमला रातभर बाघ की रखवाली करता रहा, जिसका सुबह वनविहार भोपाल से पहुंची टीम ने रेस्क्यू किया।
जंगल में रास्ता नहीं होने से जेसीबी में बैठकर वन विहार के डॉ. अतुल गुप्ता और उनकी टीम घायल बाघ तक पहुंची। तब बेहोश करके प्राथमिक उपचार के बाद पिंजरे में शिफ्ट करके होश में लाया गया। हालांकि इलाज के दौरान दोपहर में ही बाघ की मौत हो गई। बाघ का रेस्क्यू और इलाज करने वाले वनविहार के वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. अतुल गुप्ता के अनुसार बाघ की उम्र करीब 12 साल थी, जिसके दो दांत घिस गए थे। बाकी दांत भी कमजोर होने से शिकार नहीं कर पा रहा था। बाघ के पीछे पैर के ऊपर का घाव सड गया था, जिससे बाघ ढ़ंग से चल नहीं पा रहा था और अत्यधिक कमजोर हो चुका था।
सीसीएफ अशोक सिंह ने बताया कि पीएम रिपोर्ट के अनुसार बाघ को पीछे पैर के ऊपर पुराना घाव सड़ गया था, वहीं बाडी में इंफेक्शन फैल गया था। इस बाघ को गांववालों ने देखा और सूचना दी, जिसके बाद रेस्क्यू किया गया था।