कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चुनाव की तारीखों का ऐलान होने से ठीक पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दो अहम घोषणाएं की हैं। इन फैसलों में पुजारियों और मुअज्जिनों के मासिक भत्ते में बढ़ोतरी और राज्य कर्मचारियों के डीए (महंगाई भत्ता) एरियर को लेकर बड़ा ऐलान शामिल है। चुनाव आयोग आज कुछ ही समय में चार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित करने वाला है। इनमें पश्चिम बंगाल भी शामिल है। तारीखों की घोषणा के बाद आचार संहिता लागू हो जाएगी। इसके बाद राज्य सरकार नई योजनाओं की घोषणा नहीं कर पाएगी। इसी कारण ममता बनर्जी की इन घोषणाओं को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यह घोषणा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की। उन्होंने लिखा कि राज्य सरकार ने पुरोहितों (पुजारियों) और मुअज्जिनों के मासिक भत्ते में 500 रुपये की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि इन लोगों की सेवा समाज के आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन को मजबूत करती है। सरकार उनके योगदान को सम्मान देती है।
इस बढ़ोतरी के बाद पुजारियों और मुअज्जिनों का मासिक भत्ता बढ़कर 2,000 रुपये हो जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम धार्मिक कार्यों से जुड़े लोगों को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से उठाया गया है। पहले जो भत्ता दिया जा रहा था, उसमें अब 500 रुपये की वृद्धि की गई है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पुजारियों और मुअज्जिनों द्वारा सम्मान के लिए किए गए सभी नए आवेदन राज्य सरकार द्वारा मंजूर कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जो आवेदन सही तरीके से जमा किए गए हैं, उन्हें स्वीकृति दे दी गई है। इससे और अधिक लोगों को इस योजना का लाभ मिल सकेगा।
पुजारियों और मुअज्जिनों के भत्ते के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने राज्य कर्मचारियों के डीए एरियर को लेकर भी बड़ा ऐलान किया है। हालांकि विस्तृत जानकारी अलग से दी गई है, लेकिन सरकार के इस कदम को कर्मचारियों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है। यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब राज्य में चुनावी माहौल बन चुका है और सभी दल अपनी तैयारियों में लगे हैं।
चुनाव आयोग की ओर से तारीखों की घोषणा के बाद आचार संहिता लागू हो जाएगी। इसका मतलब है कि राज्य सरकार किसी नई योजना या बड़े वित्तीय फैसले की घोषणा नहीं कर सकेगी। इसलिए तारीखों की घोषणा से ठीक पहले किए गए इन फैसलों को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव से पहले की गई ऐसी घोषणाएं मतदाताओं को संदेश देने का काम करती हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि यह निर्णय समाज के विभिन्न वर्गों के हित में लिया गया है। सरकार का दावा है कि धार्मिक कर्मकांड से जुड़े लोग समाज में अहम भूमिका निभाते हैं और उनके काम को सम्मान मिलना चाहिए। ममता बनर्जी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि उनकी सरकार समाज के सभी वर्गों के विकास के लिए काम करती है और यह फैसला उसी दिशा में एक कदम है।