UJJAIN:महाकाल मंदिर में लड्डू प्रसाद पर सख्ती, FSSAI 5 स्टार रेटिंग वाले प्रसाद पर गड़बड़ी पर 25 लाख तक जुर्माना

उज्जैन। महाकालेश्वर मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और देशभर में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है और महाकाल की भव्य आरती और दिव्य वातावरण का अनुभव करते हैं। इसी पवित्र स्थल पर अब लड्डू प्रसाद की गुणवत्ता को लेकर बड़ा और सख्त कदम उठाया गया है। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस प्रसाद में किसी भी तरह की लापरवाही को रोकने के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं। FSSAI की 5 स्टार रेटिंग प्राप्त इस प्रसाद व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए नई निगरानी प्रणाली और आधुनिक सुविधाओं पर भी काम किया जा रहा है।
देश का पहला मंदिर जहां प्रसाद को मिली 5 स्टार रेटिंग
उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में मिलने वाला लड्डू प्रसाद अब सिर्फ आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि गुणवत्ता का उदाहरण भी बन गया है। यह देश का पहला मंदिर है जहां प्रसाद को FSSAI की 5 स्टार रेटिंग प्राप्त हुई है। इसका मतलब है कि यहां बनने वाले प्रसाद में स्वच्छता और शुद्धता के उच्चतम मानकों का पालन किया जा रहा है।
प्रसाद निर्माण में सख्त नियम लागू
मंदिर प्रशासन ने लड्डू प्रसाद की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कड़े नियम तय किए हैं। अब प्रसाद बनाने में किसी भी तरह की लापरवाही पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। यदि गंभीर गलती पाई जाती है तो 25 लाख रुपये तक का दंड तय किया गया है। वहीं घटिया सामग्री के उपयोग पर 5 लाख रुपये और वजन में कमी पाए जाने पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यह व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।
रोजाना हजारों श्रद्धालुओं को मिलता है प्रसाद
महाकाल मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। यहां रोजाना करीब 50 क्विंटल लड्डू प्रसाद तैयार किया जाता है, जबकि विशेष अवसरों और त्योहारों पर यह मात्रा 100 क्विंटल तक पहुंच जाती है। इतनी बड़ी मांग को देखते हुए अब प्रसाद व्यवस्था को और आधुनिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
शुद्ध सामग्री और पारंपरिक विधि
महाकाल मंदिर का लड्डू प्रसाद अपनी शुद्धता और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। इसमें देशी घी, बेसन, रागी, शक्कर, काजू, किशमिश, इलायची, केसर और जायफल जैसी सामग्री का उपयोग किया जाता है। खास बात यह है कि इसमें किसी भी प्रकार के रसायन या कृत्रिम रंग का इस्तेमाल नहीं किया जाता। प्रसाद को धीमी आंच पर पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाता है और इसे मंत्रोच्चार के बीच बनाया जाता है, जिससे इसकी धार्मिक मान्यता और बढ़ जाती है।
हाईटेक यूनिट से बदलेगा प्रसाद निर्माण का तरीका
बढ़ती मांग को देखते हुए अब मंदिर परिसर में आधुनिक लड्डू प्रसाद यूनिट तैयार की जा रही है। यह यूनिट करीब 50 हजार वर्गफुट क्षेत्र में बनाई जा रही है और इस पर लगभग 20 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसे त्रिवेणी संग्रहालय के पास स्थापित किया जाएगा, जहां आधुनिक मशीनों की मदद से प्रसाद तैयार किया जाएगा ताकि गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर हो सकें।
सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखकर बड़ी योजना
मंदिर प्रशासन ने आने वाले सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए तैयारियों को तेज कर दिया है। इस दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसी को देखते हुए लड्डू प्रसाद की क्षमता बढ़ाने के लिए करीब 40 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर श्रद्धालु को शुद्ध और समय पर प्रसाद मिल सके।
अनुभवी कंपनियों को मिलेगी जिम्मेदारी
इस नई व्यवस्था में केवल उन्हीं कंपनियों को शामिल किया जाएगा जिनके पास कम से कम तीन साल का अनुभव होगा। इसके साथ ही FSSAI और ISO 22000 जैसे प्रमाणन भी अनिवार्य किए गए हैं। कंपनी का टर्नओवर भी 40 करोड़ रुपये से अधिक होना जरूरी है, ताकि गुणवत्ता में किसी तरह की कमी न रहे।
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