PU Special :सरकारी वेबसाइटों की खुली पोल! क्लिक पर क्लिक, जानकारी गायब; दफ्तर के चक्कर काटने को जनता मजबूर, RTI कितनी बनी सहारा?

नेशनल आरटीआई दिवस पर पीपुल्स समाचार ने भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर सहित मध्यप्रदेश के प्रमुख सरकारी विभागों की वेबसाइटों का रियलिटी चेक किया। पड़ताल में योजनाओं, बजट, आवेदन प्रक्रिया और ऑनलाइन सेवाओं से जुड़ी कई कमियां सामने आईं। वहीं शोधकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रूपाली दुबे ने मध्यप्रदेश के RTI पोर्टल की शुल्क व्यवस्था, प्रथम अपील की ऑनलाइन सुविधा और तकनीकी खामियों पर सवाल उठाए।
सरकारी वेबसाइटों की खुली पोल! क्लिक पर क्लिक, जानकारी गायब; दफ्तर के चक्कर काटने को जनता मजबूर, RTI कितनी बनी सहारा?
सरकारी वेबसाइटों का रियलिटी चेक

पीपुल्स टीम: भोपाल/जबलपुर/ग्वालियर/इंदौर। सरकारी विभागों की वेबसाइटों का उद्देश्य केवल सूचनाएं अपलोड करना नहीं, बल्कि आम नागरिक को घर बैठे योजनाओं, सरकारी सेवाओं, बजट और विभागीय कामकाज की जानकारी उपलब्ध कराना भी है। लेकिन हकीकत यह है कि कई वेबसाइटों पर जानकारी होने के बावजूद उसे खोजना और समझना आसान नहीं है। कहीं योजना का विवरण तो मिलता है लेकिन आवेदन की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होती। कहीं ऑनलाइन सेवा उपलब्ध है, लेकिन जरूरी फॉर्म डाउनलोड करने में परेशानी आती है। कई जगह बजट, टेंडर, संबंधित एजेंसी और काम की मौजूदा स्थिति का पूरा ब्योरा एक साथ नहीं मिलता।

नेशनल आरटीआई दिवस पर पीपुल्स समाचार ने इसी सवाल के साथ प्रमुख सरकारी विभागों की वेबसाइटों का रियलिटी चेक किया। पड़ताल में यह देखने की कोशिश की गई कि आम आदमी को विभागीय योजनाओं का नाम और उद्देश्य, पात्रता, आवेदन की प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज, बजट और खर्च की जानकारी कितनी आसानी से मिलती है। वेबसाइटों को 20 अंकों के पैमाने पर परखा गया। इसमें कई विभागों की वेबसाइटें नागरिकों की जरूरतों की कसौटी पर पूरी तरह खरी नहीं उतरीं। पड़ताल के मुताबिक जबलपुर की जांच में शामिल वेबसाइटों को औसतन 17.5 अंक मिले, जबकि भोपाल का औसत 11 और ग्वालियर का 10.5 अंक रहा। वेबसाइटों पर सूचनाएं मौजूद होने के बावजूद आम नागरिक को कई मामलों में जानकारी के लिए दूसरे पोर्टल, विभागीय कार्यालय या अधिकारियों के पास जाना पड़ सकता है।

भोपाल: सुविधाएं हैं लेकिन जानकारी हासिल करना आसान नहीं

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1. नगर निगम: ऑनलाइन सेवाएं कई लेकिन नए यूजर के लिए प्रक्रिया जटिल

वेबसाइट: https://www.bmconline.gov.in/

कुल अंक: 20 में से 15

क्या देखा: जन्म प्रमाणपत्र, विवाह पंजीयन और बजट से संबंधित जानकारी।

क्या मिला: नगर निगम की वेबसाइट पर संपत्ति संबंधी सेवाएं, पानी का कनेक्शन, जन्म-मृत्यु पंजीयन, विवाह पंजीयन, लीज रेंट, आवास योजना, स्ट्रीट वेंडर और राजस्व से जुड़ी सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध हैं। संबंधित सेवाओं के फॉर्म और प्रारूप भी मिल जाते हैं।

हालांकि नए यूजर के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया जटिल है। कुछ सवालों और निर्देशों की भाषा ऐसी है, जिसे सामान्य नागरिक के लिए समझना आसान नहीं है। ऐसे में आवेदन की प्रक्रिया समझने के लिए लोगों को वार्ड कार्यालय जाना पड़ सकता है। वेबसाइट पर सुविधाओं की मौजूदगी के बावजूद उनके इस्तेमाल में आने वाली कठिनाइयों को देखते हुए इसे नए यूजर की सुविधा के लिहाज से पूरी तरह आसान नहीं माना गया।

2. स्वास्थ्य विभाग: योजनाओं की जानकारी है, लेकिन लाभ लेने की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं

वेबसाइट: https://www.health.mp.gov.in/

कुल अंक: 20 में से 8

क्या देखा: मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना सहित आम नागरिकों से जुड़ी योजनाओं की जानकारी।

क्या मिला: स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट पर विभागीय जानकारियां, हेल्पलाइन, संपर्क विवरण, प्रशासकीय प्रतिवेदन, आवंटित बजट और आदेश उपलब्ध हैं। इनमें से कई जानकारियां वेबसाइट पर देखी जा सकती हैं। लेकिन आम नागरिक को यह समझने में परेशानी हो सकती है कि किसी योजना का लाभ लेने के लिए कहां आवेदन करना है, कौन से दस्तावेज चाहिए और आगे की प्रक्रिया क्या होगी। योजनाओं के बारे में जानकारी होने के बावजूद लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया का स्पष्ट विवरण नहीं मिलना बड़ी कमी है।

इसी आधार पर स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट को 20 में से 8 अंक दिए गए।

3. जिला प्रशासन: वेबसाइट अपडेट लेकिन कई जानकारियां अधूरी

वेबसाइट: https://bhopal.nic.in/

कुल अंक: 20 में से 10

क्या देखा: जिले में चल रही योजनाओं और उनका लाभ लेने की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी।

क्या मिला: भोपाल जिला प्रशासन की वेबसाइट पर शहर और जिले से संबंधित सामान्य जानकारियां उपलब्ध हैं। हालांकि, कई विभागीय योजनाओं के लिए नागरिकों को दूसरी वेबसाइटों का सहारा लेना पड़ता है।

वेबसाइट पर कोलार, हुजूर और बैरसिया तहसीलों की जानकारी दी गई है, लेकिन गोविंदपुरा, बैरागढ़, एमपी नगर, टीटी नगर और शहर वृत्त के पांच नजूल कार्यालयों से संबंधित जानकारी नहीं मिली। बीपीएल आवेदन, विवाह पंजीयन, आय प्रमाणपत्र और अनुसूचित जाति-जनजाति प्रमाणपत्र जैसी सेवाओं के लिए लोक सेवा गारंटी पोर्टल पर जाना पड़ता है। पड़ताल के दौरान इस पोर्टल पर कुछ सेवाएं बंद मिलीं। इससे नागरिकों को जरूरी जानकारी और सेवा हासिल करने में परेशानी हो सकती है।

ग्वालियर: ऑनलाइन जानकारी है, लेकिन कामकाज का पूरा ब्योरा नहीं

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औसत अंक: 10.5

1. नगर निगम: शिकायत और योजनाओं की जानकारी, परियोजनाओं का विवरण अधूरा

कुल अंक: 20 में से 11

वेबसाइट: उपलब्ध कराई गई सामग्री में वेबसाइट का पता नहीं दिया गया।

क्या देखा: नगर निगम की वेबसाइट पर योजनाओं, विकास कार्यों, शिकायतों और टेंडर से जुड़ी ऑनलाइन जानकारी।

क्या मिला: अमृत योजना, पेयजल, सीवर और सड़क से संबंधित शिकायतों की जानकारी उपलब्ध मिली। लेकिन विकास परियोजनाओं का बजट, टेंडर, काम करने वाली एजेंसी, कार्यादेश और वास्तविक प्रगति का पूरा विवरण एक जगह नहीं मिला।

टेंडर के लिए अलग सेक्शन मौजूद है, लेकिन जांच के समय उसमें कोई टेंडर उपलब्ध नहीं दिखा। इससे नागरिकों के लिए विकास कार्यों की लागत, जिम्मेदारी और मौजूदा स्थिति को एक साथ समझना मुश्किल हो सकता है।

2. कलेक्ट्रेट: सामान्य जानकारी उपलब्ध, विभागीय सूचनाओं के लिए दूसरे पोर्टल पर निर्भरता

कुल अंक: 20 में से 10

वेबसाइट: उपलब्ध कराई गई सामग्री में वेबसाइट का पता नहीं दिया गया।

क्या देखा: जिले में चल रही योजनाओं और उनका लाभ लेने की प्रक्रिया।

क्या मिला: जिला प्रशासन से जुड़ी सामान्य जानकारी उपलब्ध है, लेकिन विभागीय योजनाओं के लिए दूसरी वेबसाइटों पर जाना पड़ता है। मूल पड़ताल में तहसीलों और नजूल कार्यालयों की जानकारी से संबंधित कमियां भी दर्ज की गई हैं।

कोलार, हुजूर और बैरसिया तहसीलों की जानकारी उपलब्ध होने के बावजूद गोविंदपुरा, बैरागढ़, एमपी नगर, टीटी नगर और शहर वृत्त के पांच नजूल कार्यालयों की जानकारी नहीं मिली। बीपीएल आवेदन, विवाह पंजीयन, आय प्रमाणपत्र और अनुसूचित जाति-जनजाति प्रमाणपत्र के लिए लोक सेवा गारंटी पोर्टल पर जाना पड़ता है। जांच के दौरान वहां भी कई सेवाएं बंद मिलीं।

नोट: उपलब्ध मूल सामग्री में कलेक्ट्रेट के इस विवरण में भोपाल की वेबसाइट से संबंधित जानकारी दोबारा दर्ज है। इसलिए ग्वालियर के लिए इन बिंदुओं की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

जबलपुर: वेबसाइटों पर ज्यादातर जानकारियां उपलब्ध

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औसत अंक: 17.5

1. स्वास्थ्य विभाग: ज्यादातर जानकारी अपडेट

कुल अंक: 20 में से 17

वेबसाइट: उपलब्ध कराई गई सामग्री में वेबसाइट का पता नहीं दिया गया।

क्या देखा: स्वास्थ्य विभाग के मंत्रियों और अधिकारियों, नोटिफिकेशन, निविदा, नोटिस तथा सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों से जुड़ी जानकारी।

क्या मिला: स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर मंत्रियों और अधिकारियों के नाम तथा नोटिफिकेशन की जानकारी अपडेट मिली। सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध थी। हालांकि निविदा और नोटिस वाले सेक्शन में जनवरी 2026 के बाद कोई नया अपडेट नहीं मिला। बाकी जानकारियां अपेक्षाकृत नियमित रूप से अपडेट होती मिलीं। इसी आधार पर वेबसाइट को 20 में से 17 अंक दिए गए।

2. जबलपुर विकास प्राधिकरण: ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध, ईडब्ल्यूएस फॉर्म डाउनलोड करने में परेशानी

कुल अंक: 20 में से 18

वेबसाइट: उपलब्ध कराई गई सामग्री में वेबसाइट का पता नहीं दिया गया।

क्या देखा: अधिकारियों, नोटिफिकेशन, टाउन प्लानिंग, नोटिस बोर्ड, सिटीजन सर्विसेज, प्रॉपर्टी और ऑनलाइन सेवाओं की जानकारी।

क्या मिला: जबलपुर विकास प्राधिकरण यानी जेडीए की वेबसाइट पर अधिकारियों के नाम और नोटिफिकेशन की जानकारी अपडेट मिली। होम पेज के अलावा प्राधिकरण के बारे में जानकारी, टाउन प्लानिंग, नोटिस बोर्ड, सिटीजन सर्विसेज, प्रॉपर्टी और ऑनलाइन सेवाओं से जुड़े सेक्शन भी उपलब्ध हैं। हालांकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस से संबंधित फॉर्म वेबसाइट पर होने के बावजूद उसे डाउनलोड करने में परेशानी आई। इस कमी के कारण दो अंक काटते हुए वेबसाइट को 20 में से 18 अंक दिए गए।

3. नगर निगम: ई-सर्विस उपलब्ध, लेकिन नोटिस और अन्य जानकारियां पुरानी

कुल अंक: 20 में से 18

वेबसाइट: उपलब्ध कराई गई सामग्री में वेबसाइट का पता नहीं दिया गया।

क्या देखा: ई-नगर पालिका पोर्टल की सेवाएं, नोटिस, ऑनलाइन सुविधाएं और विभागीय जानकारियां।

क्या मिला: नगर निगम की ऑनलाइन सेवाओं से जुड़ी जानकारी उपलब्ध मिली। हालांकि, ई-नगर पालिका पोर्टल के ‘कौन क्या है’ सेक्शन में ‘नो रिकॉर्ड फाउंड’ दिखाई दिया। किसी भी सेवा का इस्तेमाल करने के लिए पोर्टल पर सबसे पहले समग्र आईडी या मोबाइल नंबर दर्ज करना होता है। ई-सर्विस से संबंधित जानकारी अपडेट मिली लेकिन नोटिस सहित अन्य जानकारियों में जुलाई 2026 के बाद कोई नया अपडेट नहीं मिला।

ऑनलाइन सेवाओं की उपलब्धता को देखते हुए नगर निगम की वेबसाइट को 20 में से 18 अंक दिए गए।

4. कलेक्ट्रेट: 32 विभागों की आरटीआई जानकारी, आदेश-परिपत्र अपडेट नहीं

वेबसाइट: जबलपुर डॉट एनआईसी डॉट इन

कुल अंक: 20 में से 18

क्या देखा: डीएम की प्रोफाइल, विभागों की जानकारी, फोटो गैलरी, हेल्पलाइन नंबर, जिले का इतिहास, भू-अर्जन और आदेश-परिपत्र।

क्या मिला: जबलपुर कलेक्ट्रेट के आधिकारिक पोर्टल पर डीएम की प्रोफाइल, विभिन्न विभागों की जानकारी, फोटो गैलरी, हेल्पलाइन नंबर, जिले का इतिहास और भू-अर्जन से संबंधित जानकारी उपलब्ध मिली। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत 32 विभागों से जुड़ी जानकारी भी वेबसाइट पर उपलब्ध है। हालांकि आदेश एवं परिपत्र वाले हिस्से में जानकारी अपडेट नहीं मिली। जरूरी सूचनाओं की उपलब्धता को देखते हुए वेबसाइट को 20 में से 18 अंक दिए गए।

इंदौर नगर निगम: सुविधाएं ज्यादा, लेकिन सर्वर और प्रक्रिया बनी परेशानी

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वेबसाइट: https://imcindore.mp.gov.in/

कुल अंक: 20 में से 14

इंदौर नगर निगम की वेबसाइट पर नागरिक सुविधाओं से जुड़ी कई सेवाएं एक ही जगह उपलब्ध हैं। प्रॉपर्टी टैक्स, वाटर बिल, भवन अनुज्ञा, शिकायत दर्ज कराने और स्वच्छता से जुड़ी सेवाओं के लिंक होम पेज पर ही मिल जाते हैं। इससे जरूरी सेवाओं तक पहुंचना आसान होता है। जन्म प्रमाणपत्र का फॉर्म भी आसानी से मिल गया लेकिन ऑनलाइन आवेदन करने के दौरान पेज एरर और सर्वर धीमा होने जैसी समस्याएं सामने आईं।

वेबसाइट पर मौजूद कई लिंक दूसरे पोर्टल, खासकर लोक सेवा गारंटी पोर्टल पर रीडायरेक्ट हो जाते हैं। ऐसे में उपयोगकर्ता को आवेदन की प्रक्रिया दोबारा समझनी पड़ती है, जिससे काम जटिल हो जाता है। वेबसाइट की भाषा में हिंदी और अंग्रेजी का मिश्रण भी है, जिसे हर उपयोगकर्ता के लिए समझना आसान नहीं है। हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध होने के बावजूद संपर्क करने पर संतोषजनक रिस्पॉन्स नहीं मिलने की शिकायत भी सामने आई।

कुल मिलाकर नगर निगम की वेबसाइट पर सुविधाओं की कमी नहीं है, लेकिन तकनीकी दिक्कतें, धीमा सर्वर और आवेदन प्रक्रिया की जटिलता नागरिकों के अनुभव को प्रभावित करती हैं। इसी आधार पर वेबसाइट को 20 में से 14 अंक दिए गए।

स्वास्थ्य विभाग: योजनाओं के नाम और बजट की जानकारी, लेकिन आवेदन प्रक्रिया गायब

वेबसाइट: https://www.health.mp.gov.in/

कुल अंक: 20 में से 8

मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट पर मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना, आयुष्मान योजना और टीकाकरण से जुड़ी योजनाओं की जानकारी देखी गई। वेबसाइट पर विभागीय आदेश, बजट, टेंडर और भर्ती से संबंधित जानकारियां उपलब्ध हैं। हालांकि आम नागरिक के लिए योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया समझने में कई जरूरी जानकारियां नहीं मिलतीं। यह राज्य स्तरीय वेबसाइट है, इसलिए इंदौर जिले से जुड़ी योजनाओं और सेवाओं की अलग से विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं मिली। मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना को खोजने पर योजना का नाम और बजट तो दिखाई दिया, लेकिन आवेदन कहां करना है, कौन से दस्तावेज जरूरी हैं और पात्र व्यक्ति को किस कार्यालय से संपर्क करना चाहिए, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं मिली।

वेबसाइट पर स्वास्थ्य संबंधी हेल्पलाइन नंबर 104 दिया गया है लेकिन केवल हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। नागरिकों को योजनाओं की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज और संबंधित अधिकारियों की जानकारी भी आसानी से मिलनी चाहिए। इस कमी के चलते वेबसाइट को 20 में से 8 अंक दिए गए।

जिला प्रशासन: वेबसाइट का लुक नया, लेकिन कई जानकारियां पुरानी

वेबसाइट: https://indore.nic.in/

कुल अंक: 20 में से 13

इंदौर जिला प्रशासन की वेबसाइट पर कलेक्टर के आदेश, चुनाव, जनसुनवाई और हेल्पलाइन से जुड़ी जानकारियां होम पेज पर उपलब्ध हैं। जिले के इतिहास और इंदौर, महू, देपालपुर, सांवेर तथा हातोद तहसीलों से संबंधित विवरण भी वेबसाइट पर मौजूद हैं। पहली नजर में वेबसाइट व्यवस्थित दिखाई देती है और प्रशासनिक जानकारियों तक पहुंचने के लिए कई उपयोगी लिंक उपलब्ध हैं। हालांकि योजनाओं और नागरिक सेवाओं के सेक्शन में जाने पर उपयोगकर्ता को लोक सेवा गारंटी पोर्टल (https://mpedistrict.gov.in/) या मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की ओर भेज दिया जाता है। जाति प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र और मूल निवासी प्रमाणपत्र जैसी सेवाओं के लिए जिला प्रशासन की वेबसाइट से सीधे आवेदन नहीं किया जा सकता। इससे उपयोगकर्ता को अलग-अलग पोर्टल पर जाना पड़ता है और प्रक्रिया समझने में अतिरिक्त समय लग सकता है।

वेबसाइट के कुछ सेक्शन में वर्ष 2023-24 का डेटा ही उपलब्ध मिला, जिससे जानकारी की नियमित अपडेटिंग पर सवाल उठते हैं। अधिकारियों के संपर्क नंबर दिए गए हैं लेकिन जांच के दौरान कई नंबर बंद मिले। इससे नागरिकों के लिए संबंधित अधिकारी तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

इस तरह इंदौर जिला प्रशासन की वेबसाइट पर कई उपयोगी जानकारियां और सेवाओं के लिंक उपलब्ध हैं लेकिन पुराने डेटा, दूसरे पोर्टल पर रीडायरेक्शन और संपर्क नंबरों की समस्या इसकी उपयोगिता को सीमित करती है। इन कमियों को ध्यान में रखते हुए वेबसाइट को 20 में से 13 अंक दिए गए।

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दूसरे विभागों की वेबसाइटों का भी आकलन

शहरों की वेबसाइटों के अलावा मध्य प्रदेश के विभिन्न विभागों के पोर्टल भी योजनाओं, ऑनलाइन सेवाओं, अधिकारियों के संपर्क, बजट और लाभार्थियों की जानकारी के आधार पर परखे गए। कई पोर्टल नागरिक सुविधाओं के मामले में उपयोगी मिले लेकिन कुछ जगह योजनाओं के परिणाम, लाभार्थियों का विवरण और काम की मौजूदा स्थिति एक साथ उपलब्ध नहीं थी।

1. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी - 15/20

वेबसाइट: https://www.mpcz.in/

यह पोर्टल बिजली उपभोक्ताओं की सुविधाओं पर केंद्रित है। यहां शिकायत दर्ज कराने के लिए कस्टमर केयर नंबर 1922, टोल-फ्री नंबर और व्हाट्सएप नंबर उपलब्ध कराए गए हैं। उपभोक्ता ऑनलाइन बिजली बिल जमा करने के साथ नए बिजली कनेक्शन, लोड बढ़वाने और सोलर रूफटॉप से संबंधित जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं। पोर्टल पर जोनवार अधिकारियों के संपर्क नंबर और ईमेल भी उपलब्ध हैं। इन सुविधाओं के आधार पर इसे 20 में से 15 अंक दिए गए।

2. मध्य प्रदेश पर्यटन - 15/20

वेबसाइट: https://www.mptourism.com/

एमपी टूरिज्म कॉर्पोरेशन और एमपी टूरिज्म बोर्ड से संबंधित इस पोर्टल पर प्रदेश के प्रमुख और ग्रामीण पर्यटन स्थलों की तस्वीरों के साथ विस्तृत जानकारी उपलब्ध है। यहां टूर प्लानर, गाइड, होटल, होम-स्टे, रूट मैप और पीएम पर्यटन हेली सेवा से संबंधित सुविधाएं भी दी गई हैं। वेबसाइट की उपयोगिता और उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे 20 में से 15 अंक दिए गए।

3. वन विभाग - 15/20

वेबसाइट: https://mpforest.gov.in/

वन विभाग की वेबसाइट पर प्राकृतिक दृश्यों और वन्यजीवों की तस्वीरों के साथ विभागीय जानकारी उपलब्ध है। होम पेज पर संगठनात्मक ढांचा, अधिकारियों की ग्रेडेशन लिस्ट, टाइगर रिजर्व और अभयारण्यों से संबंधित विवरण दिया गया है। पोर्टल पर पौधों के रोपण, आरटीआई और वर्ष 2047 तक के वन्यजीव संरक्षण प्लान की रूपरेखा भी उपलब्ध है। प्रदेश में बाघों की मृत्यु से संबंधित आंकड़े देखने के लिए एकल लॉगिन की जरूरत होने का उल्लेख भी पड़ताल में किया गया है। वेबसाइट को 20 में से 15 अंक दिए गए।

4. सामान्य प्रशासन विभाग - 14/20

योजना और पोर्टल: मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार और विभागीय जांच पोर्टल।

पोर्टल पर नियम, आदेश और विभागीय जांच से संबंधित जानकारी उपलब्ध है। लेकिन किसी एक पुरस्कार या जांच प्रकरण का पूरा रिकॉर्ड—जैसे लाभार्थी या विजेता का नाम, चयन का आधार, राशि, आदेश और वर्तमान स्थिति- एक जगह आसानी से नहीं मिलता। वरिष्ठ अधिकारियों के संपर्क उपलब्ध हैं, लेकिन पूरी अधिकारी डायरेक्ट्री और बजट-खर्च का सरल डैशबोर्ड नहीं है। इसी आधार पर विभाग को 20 में से 14 अंक दिए गए।

5. राजस्व विभाग - 15/20

योजना: मुख्यमंत्री आवासीय भू-अधिकार योजना

योजना से संबंधित जानकारी, आवेदन प्रक्रिया और SAARA पोर्टल पर डैशबोर्ड उपलब्ध हैं। लेकिन किसी एक गांव के पात्र परिवारों, आवंटित भूखंडों, उनके क्षेत्रफल, आदेश और मौजूदा स्थिति का पूरा विवरण एक ही जगह हासिल करना आसान नहीं है। योजना और आवेदन से जुड़ी जानकारी उपलब्ध होने के बावजूद लाभार्थी और आवंटन के स्तर पर जानकारी खोजने में आने वाली कठिनाइयों के कारण विभाग को 20 में से 15 अंक दिए गए।

6. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग - 16/20

योजना: अमृत सरोवर योजना

पोर्टल पर योजना का उद्देश्य और पात्रता से संबंधित जानकारी उपलब्ध है। लेकिन किसी एक सरोवर की स्वीकृत लागत, निर्माण एजेंसी, खर्च, निर्माण की समयसीमा, प्रगति और मौजूदा स्थिति का पूरा विवरण एक जगह नहीं मिलता। योजना की बुनियादी जानकारी उपलब्ध होने के बावजूद जमीनी स्तर पर काम की प्रगति और खर्च को समझने में आने वाली कठिनाइयों के आधार पर विभाग को 20 में से 16 अंक दिए गए।

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7. जनजातीय कार्य विभाग - 13/20

योजनाएं: अनुसूचित जनजाति बस्ती विकास, विद्युतीकरण और विशेष जनजातीय योजनाएं।

इन योजनाओं के तहत सड़क, पुलिया, बिजली और सामुदायिक भवन जैसे कार्यों से संबंधित जानकारी उपलब्ध है। लेकिन किसी एक बस्ती में स्वीकृत कार्य, स्वीकृत राशि, निर्माण एजेंसी और कार्य की मौजूदा स्थिति का पूरा विवरण एक जगह मिलना आसान नहीं है। योजना संबंधी जानकारी और जमीनी कामों के ब्योरे के बीच इस अंतर को देखते हुए विभाग को 20 में से 13 अंक दिए गए।

8. सामाजिक न्याय विभाग - 12/20

योजना: सामाजिक सुरक्षा पेंशन

विभागीय पोर्टल पर पेंशन योजनाओं, पात्रता और आवेदन प्रक्रिया से संबंधित जानकारी दी गई है। लेकिन किसी जिले या स्थानीय निकाय के लाभार्थियों, स्वीकृति, भुगतान और मौजूदा स्थिति का पूरा विवरण एक जगह उपलब्ध नहीं है। योजनाओं की जानकारी होने के बावजूद लाभार्थियों से जुड़ा विस्तृत विवरण आसानी से न मिलने के कारण विभाग को 20 में से 12 अंक दिए गए।

9. गृह विभाग - 15/20

पोर्टल: अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं प्रणाली (CCTNS)

पड़ताल में गृह विभाग से संबंधित पोर्टल और अधिकारियों की जानकारी देखी गई। सामग्री के अनुसार, आईपीएस अधिकारियों के बारे में जानकारी अधूरी मिली। इस आधार पर विभाग को 20 में से 15 अंक दिए गए।

10. किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग - 15/20

योजना: बीज ग्राम योजना

पोर्टल पर योजना का उद्देश्य, पात्रता, चयन, अनुदान, आवेदन और अपील अधिकारी से संबंधित जानकारी उपलब्ध है। कृषि यंत्रों के लिए अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म भी मौजूद है। अधिकारियों के संपर्क नंबर अपडेट मिले। हालांकि किसी जिले में कितने किसानों को योजना का लाभ मिला, कितनी राशि या सामग्री वितरित हुई और उसका क्या परिणाम रहा, यह जानकारी एक जगह प्राप्त करना कठिन है। यानी योजना और आवेदन की जानकारी उपलब्ध है लेकिन लाभार्थियों और परिणामों का विवरण अपेक्षाकृत कमजोर है। विभाग को 20 में से 15 अंक दिए गए।

11. परिवहन विभाग - 16/20

सेवा: नया परमिट जारी करना

ऑनलाइन पोर्टल पर नया परमिट जारी करने, परमिट के नवीनीकरण, अंतरण और वाहनों से संबंधित कई सेवाएं उपलब्ध हैं। आवेदन और शुल्क जमा करने की प्रक्रिया भी डिजिटल है। लेकिन किसी खास रूट पर जारी परमिटों, वाहनों, फिटनेस, कार्रवाई और मौजूदा स्थिति की समेकित जानकारी नागरिकों को आसानी से नहीं मिलती। रजिस्टर्ड वाहनों से संबंधित जानकारी में भी पारदर्शिता की कमी बताई गई। ऑनलाइन सेवा उपलब्ध होने के बावजूद परिवहन व्यवस्था का पूरा डेटा-डैशबोर्ड सीमित है। विभाग को 20 में से 16 अंक दिए गए।

12. जेल विभाग - 13/20

पोर्टल: ई-मुलाकात

ई-मुलाकात पोर्टल पर बंदियों और उनके परिजनों के लिए मुलाकात से संबंधित सुविधा उपलब्ध है। जेल अधिकारियों की जानकारी भी विभागीय सिस्टम में दर्ज है। हालांकि अधिकारियों के संपर्क विवरण अपडेट नहीं मिले। इस कमी के आधार पर विभाग को 20 में से 13 अंक दिए गए।

13. मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग - 11/20

विभाग की वेबसाइट पर कई योजनाओं की जानकारी उपलब्ध है और केज कल्चर से संबंधित नई जानकारी भी जोड़ी गई है। लेकिन किसी जिले में कितने तालाब या मत्स्यपालक लाभान्वित हुए, कितनी राशि जारी हुई और स्वीकृत काम पूरा हुआ या नहीं, इसकी समेकित जानकारी आसानी से नहीं मिलती। पड़ताल में योजनाओं से संबंधित जानकारी का अंतिम अपडेट 17 जुलाई 2025 दर्ज होने की बात भी सामने आई। ताजा लाभार्थी और परिणाम संबंधी जानकारी की कमी को देखते हुए विभाग को 20 में से 11 अंक दिए गए।

वेबसाइट से जानकारी नहीं मिली तो दफ्तरों के चक्कर

सरकारी वेबसाइटों पर जरूरी जानकारी नहीं मिलने का असर आम नागरिकों पर भी पड़ता है। किसी योजना का लाभ लेने या सरकारी काम पर खर्च हुई राशि का विवरण जानने के लिए लोगों को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय जाना पड़ सकता है। पीपुल्स समाचार ने ऐसे दो मामले भी सामने रखे, जिनमें लोगों को जानकारी हासिल करने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।

इलाज की योजना की जानकारी के लिए काटे दफ्तरों के चक्कर

35 वर्षीय अल्तमस सिद्दिकी को परिवार के एक सदस्य के इलाज के लिए सरकारी योजना की जानकारी चाहिए थी। उन्हें यह पता करना था कि योजना के तहत किन अस्पतालों में इलाज कराया जा सकता है, कौन से दस्तावेज जरूरी हैं और आवेदन कहां करना होगा। उन्होंने सबसे पहले विभाग की वेबसाइट पर जानकारी तलाशने की कोशिश की लेकिन वहां उन्हें जरूरी विवरण नहीं मिला। इसके बाद वे हमीदिया अस्पताल पहुंचे। वहां से उन्हें मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी यानी सीएमएचओ कार्यालय जाने को कहा गया।

अल्तमस के मुताबिक सीएमएचओ कार्यालय में भी उन्हें कई दिनों तक सही जानकारी नहीं मिल सकी। लगभग एक महीने तक अलग-अलग जगह भटकने के बाद एक दोस्त ने उन्हें सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन करने की सलाह दी। इसके बाद वे आरटीआई विशेषज्ञ रमेश सक्सेना से मिले और आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी। उनके अनुसार आवेदन करने के 15 दिन के भीतर उन्हें जानकारी मिल गई।

यह मामला बताता है कि वेबसाइट पर योजना की जानकारी, पात्रता, संबंधित अस्पतालों और आवेदन प्रक्रिया का स्पष्ट विवरण उपलब्ध होने से नागरिकों को समय और मेहनत बचाने में मदद मिल सकती है।

सड़क निर्माण पर खर्च की जानकारी के लिए दफ्तर-दफ्तर भटके

48 वर्षीय जुबेर आलम की कॉलोनी में सड़क का निर्माण कराया गया था। कुछ समय बाद ही सड़क की गुणवत्ता और निर्माण लागत को लेकर सवाल उठने लगे। उन्होंने नगर निगम की वेबसाइट पर संबंधित काम की जानकारी तलाशने की कोशिश की लेकिन स्वीकृत बजट, ठेकेदार का नाम और काम पूरा करने की समयसीमा का विवरण एक साथ नहीं मिला।

इसके बाद वे नगर निगम कार्यालय पहुंचे। वहां उन्हें संबंधित इंजीनियर और अन्य विभागीय कर्मचारियों से संपर्क करने के लिए कहा गया। कभी अधिकारी के दौरे पर होने तो कभी फाइल उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। कई बार कार्यालय आने-जाने के बावजूद उन्हें यह स्पष्ट नहीं हो सका कि सड़क निर्माण के लिए कितनी राशि मंजूर हुई थी और काम कब तक पूरा होना था। ऐसे मामलों में अगर वेबसाइट पर स्वीकृत लागत, ठेकेदार, कार्यादेश, समयसीमा और काम की मौजूदा स्थिति का विवरण उपलब्ध हो, तो नागरिकों के लिए सरकारी कामकाज पर नजर रखना आसान हो सकता है।

मध्यप्रदेश में RTI पोर्टल की व्यवस्था पर डॉ. रूपाली दुबे ने उठाए सवाल

संस्कृत शोधकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रूपाली दुबे ने मध्यप्रदेश में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत उपलब्ध ऑनलाइन व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सूचना का अधिकार शासन-प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है लेकिन प्रदेश में ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया में कई ऐसी कमियां हैं, जो आम नागरिकों के लिए परेशानी पैदा करती हैं।

डॉ. दुबे के अनुसार MPOnline पोर्टल के माध्यम से RTI आवेदन तो ऑनलाइन दर्ज किया जा सकता है, लेकिन प्रथम अपील दाखिल करने की ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसी स्थिति में आवेदकों को अपील के लिए कागजी प्रक्रिया और डाक व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे नागरिकों का समय और श्रम दोनों खर्च होते हैं। उन्होंने ऑनलाइन आवेदन शुल्क को लेकर भी आपत्ति जताई। डॉ. दुबे के मुताबिक, मध्यप्रदेश में RTI आवेदन के लिए 22 रुपये शुल्क लिया जा रहा है जबकि केंद्र और कुछ अन्य राज्यों में यह शुल्क 10 रुपये है। उन्होंने शुल्क में इस अंतर पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे नागरिकों के लिए ऑनलाइन आवेदन करना अपेक्षाकृत महंगा हो जाता है। डॉ. दुबे ने पोर्टल की तकनीकी कार्यप्रणाली पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि पोर्टल की उपलब्धता और तकनीकी स्थिरता को लेकर भरोसे की कमी रहती है। यदि ऑनलाइन व्यवस्था नियमित रूप से काम नहीं करती, तो नागरिकों को आवेदन दर्ज करने और अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने RTI ऑनलाइन व्यवस्था की समीक्षा कर उसमें सुधार करने की जरूरत पर जोर दिया। डॉ. दुबे के अनुसार प्रथम अपील की ऑनलाइन सुविधा, स्पष्ट शुल्क व्यवस्था और पोर्टल की तकनीकी विश्वसनीयता सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि सूचना का अधिकार आम नागरिकों के लिए अधिक सुलभ और प्रभावी बन सके।

आरटीआई से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद

आरटीआई कार्यकर्ता राशिद नूर खान के अनुसार सूचना का अधिकार आम नागरिक को सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का कानूनी माध्यम देता है। जब वेबसाइट या संबंधित कार्यालय से जरूरी जानकारी नहीं मिलती, तब नागरिक आरटीआई के तहत रिकॉर्ड में दर्ज सूचना मांग सकता है।

इस प्रक्रिया से सरकारी योजनाओं, बजट और विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति जानने में मदद मिलती है। हालांकि नागरिकों को नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा सकने वाली बुनियादी जानकारी वेबसाइटों पर सरल और व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध होनी चाहिए ताकि हर छोटी जानकारी के लिए आरटीआई आवेदन करने या कार्यालय जाने की जरूरत न पड़े।

इन पांच पैमानों पर परखी गईं सरकारी वेबसाइटें

पीपुल्स समाचार की पड़ताल में वेबसाइटों को पांच प्रमुख पैमानों पर परखा गया। हर वेबसाइट के लिए कुल 20 अंक निर्धारित किए गए।

  • जानकारी की उपलब्धता: वेबसाइट पर योजनाओं, बजट, टेंडर और सरकारी कामों से जुड़ी जरूरी जानकारी मौजूद है या नहीं।
  • जानकारी खोजने में आसानी: जरूरी सूचना कितनी आसानी से मिलती है और उसे खोजने में कितना समय लगता है।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही: काम की लागत, संबंधित एजेंसी, समयसीमा और काम की मौजूदा स्थिति स्पष्ट है या नहीं।
  • आम आदमी के लिए उपयोगिता: योजना की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज और संपर्क की जानकारी सरलता से मिलती है या नहीं।
  • अपडेट और लंबित कामों की स्थिति: सूचनाएं कितनी अद्यतन हैं और अधूरे कामों, लंबित मामलों तथा उनकी प्रगति की जानकारी उपलब्ध है या नहीं।

वेबसाइट पर सूचना होना ही काफी नहीं, उसे समझना भी जरूरी

पड़ताल का मुख्य निष्कर्ष यह है कि सरकारी वेबसाइटों पर केवल दस्तावेज और योजनाओं की सूची डाल देना पर्याप्त नहीं है। नागरिकों को यह भी पता चलना चाहिए कि योजना का लाभ कैसे मिलेगा, किस कार्यालय से संपर्क करना होगा, आवेदन के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए और किसी विकास कार्य पर कितनी राशि खर्च हुई। इसी तरह बजट और टेंडर की जानकारी के साथ काम करने वाली एजेंसी, स्वीकृत राशि, कार्यादेश, निर्धारित समयसीमा और वास्तविक प्रगति का विवरण भी उपलब्ध होना चाहिए। वेबसाइट पर पुरानी सूचनाएं, काम न करने वाले लिंक या डाउनलोड नहीं होने वाले फॉर्म नागरिकों की परेशानी बढ़ाते हैं।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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