25 सितंबर से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा, सीएम डॉ. यादव बोले-अब 15 हजार बसें चलाने का लक्ष्य, 2030 तक 75 प्रतिशत गांवों को बस सेवा से जोड़ेंगे

इंदौर। मध्यप्रदेश में धार्मिक और पर्यटन गतिविधियां बढ़ने के साथ सार्वजनिक परिवहन का दायरा बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को इंदौर में यात्री परिवहन विजन समिट-2026 के शुभारंभ के दौरान प्रदेश में अगले तीन-चार वर्षों में बसों की संख्या करीब 11 हजार से बढ़ाकर 15 हजार करने का लक्ष्य रखा। सरकार की योजना वर्ष 2030 के अंत तक प्रदेश के 75 प्रतिशत गांवों को बस सेवा से जोड़ने की है।
सुरक्षित, सुविधाजनक और आधुनिक बस सेवा की जरूरत
ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय समिट में मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में करीब पांच लाख किलोमीटर का सड़क नेटवर्क है और यहां 15 हजार से अधिक बसें चलाने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। प्रदेश में हर साल करोड़ों पर्यटक और श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में सुरक्षित, सुविधाजनक और आधुनिक बस सेवा की जरूरत लगातार बढ़ रही है। उन्होंने निजी बस ऑपरेटरों, बस निर्माता कंपनियों और इंडस्ट्री पार्टनर्स से प्रदेश की इस नई परिवहन व्यवस्था में सहभागी बनने की अपील की।
छोटे ऑपरेटारों को देंगे प्रशिक्षण
मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 सितंबर से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का शुभारंभ किया जाएगा। इसे प्रदेश की अपनी बस सेवा के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसमें निजी ऑपरेटरों की भागीदारी होगी और मौजूदा निजी बस संचालकों को प्राथमिकता दी जाएगी। छोटे ऑपरेटरों को तकनीकी प्रशिक्षण और संचालन में सहयोग देने की भी व्यवस्था की जा रही है।
उज्जैन में श्रद्धालु बढ़े, पूरे प्रदेश में पर्यटन का दबाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक पर्यटन में तेजी से वृद्धि हो रही है। उज्जैन में पहले सालाना 60 से 70 लाख श्रद्धालु आते थे, जबकि अब यह संख्या आठ करोड़ से अधिक पहुंच गई है। इस वर्ष 14 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। प्रदेश में हर साल 20 करोड़ से अधिक पर्यटकों के आने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही के लिए सुगम सार्वजनिक परिवहन जरूरी है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में करीब 20 साल से बंद पड़ी राज्य परिवहन बस सेवा को नए स्वरूप में संजीवनी मिल रही है। नई व्यवस्था में यात्रियों की सुविधा के साथ ऑपरेटरों और रोजगार के अवसरों का भी ध्यान रखा गया है।

150 सिटी, 450 इंटरसिटी और 436 अंतरराज्यीय रूट
परिवहन विभाग के अनुसार प्रदेश के 55 जिलों का रूट सर्वे पूरा हो चुका है। डेटा के आधार पर करीब 150 सिटी, 450 इंटरसिटी और 436 अंतरराज्यीय मार्ग विकसित किए जाएंगे। बसों में जीपीएस, सीसीटीवी, पैनिक बटन और रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था होगी। डिजिटल टिकटिंग और रियल टाइम यात्री सूचना प्रणाली भी विकसित की जाएगी। इंदौर से पहले चरण में लंबी दूरी के 22 रूटों पर बस संचालन के लिए ऑपरेटर जोड़े जा चुके हैं। सरकार इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों के साथ वैकल्पिक ऊर्जा आधारित बसों को भी बढ़ावा देने की तैयारी में है।
गांव से बस स्टैंड और बस स्टैंड से घर तक कनेक्टिविटी
सार्वजनिक परिवहन को केवल बस संचालन तक सीमित न रखते हुए फर्स्ट और लास्ट माइल कनेक्टिविटी पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके लिए मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमपीवाईपीआईएल) और रैपिडो के बीच एमओयू हुआ है। पहले चरण में इंदौर और भोपाल में पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा। बस स्टैंड, बस स्टॉप और मेट्रो स्टेशनों की जानकारी रैपिडो के तकनीकी प्लेटफॉर्म से जोड़ी जाएगी। महिलाओं द्वारा संचालित रैपिडो पिंक बाइक-टैक्सी सेवा को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

पीपीपी मॉडल पर खड़ा होगा नया परिवहन सिस्टम
परिवहन सचिव मनीष सिंह ने बताया कि एमपीवाईपीआईएल के माध्यम से बस संचालन, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) और परिवहन अधोसंरचना को पीपीपी मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। नई व्यवस्था के तीन प्रमुख आधार पेशेवर बस संचालन, तकनीक आधारित निगरानी और आधुनिक बस टर्मिनल, बस स्टैंड, डिपो व बस स्टॉप का विकास हैं। परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार निजी बस संचालकों के साथ मिलकर पारदर्शी और संगठित व्यवस्था तैयार कर रही है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को शहरों से बेहतर और सुरक्षित परिवहन सुविधा से जोड़ना है।




















