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MP में मत्स्य पालन को मिलेगा उद्योग का दर्जा, फूड प्रोसेसिंग और MSME से जोड़कर मिलेंगे इंसेंटिव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में राष्ट्रीय मत्स्य सम्मेलन के दौरान मत्स्य पालन को उद्योग का दर्जा देने और फूड प्रोसेसिंग व MSME से जोड़कर इंसेंटिव देने की घोषणा की। निवेश, निर्यात और मछली पालकों की आय बढ़ाने पर जोर दिया गया।
MP में मत्स्य पालन को मिलेगा उद्योग का दर्जा, फूड प्रोसेसिंग और MSME से जोड़कर मिलेंगे इंसेंटिव
MP में मत्स्य पालन को मिलेगा उद्योग का दर्जा

भोपाल। मध्यप्रदेश में मत्स्य पालन को पारंपरिक व्यवसाय से आगे बढ़ाकर संगठित उद्योग के रूप में विकसित करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राष्ट्रीय मत्स्य सम्मेलन में घोषणा की कि राज्य में फिशरीज सेक्टर को फूड प्रोसेसिंग उद्योग और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र से जोड़ा जाएगा। इसके तहत मत्स्य पालन से जुड़े कारोबार को अन्य उद्योगों की तरह सुविधाएं, छूट और प्रोत्साहन (इंसेंटिव) देने की दिशा में काम किया जाएगा। सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने ‘मध्य प्रदेश मत्स्य निवेश एवं निर्यात मार्गदर्शिका’ का सिंगल क्लिक से विमोचन भी किया। इसका उद्देश्य प्रदेश में मत्स्य क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देना और मछली तथा मत्स्य उत्पादों के निर्यात की संभावनाओं का विस्तार करना है। सरकार का जोर इस क्षेत्र को उद्योग से जोड़कर रोजगार, कारोबार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर तैयार करने पर है।

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मत्स्य पालन को उद्योग से जोड़ने की तैयारी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मत्स्य पालन को उद्योग के रूप में विकसित करने के लिए इसे फूड प्रोसेसिंग और MSME सेक्टर से जोड़ा जाएगा। इससे इस क्षेत्र को उन सुविधाओं और प्रोत्साहनों का लाभ देने का रास्ता तैयार होगा, जो अन्य उद्योगों को उपलब्ध कराए जाते हैं। इस पहल से मछली पालन के साथ-साथ प्रसंस्करण, कारोबार और निर्यात से जुड़ी गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। सम्मेलन में जारी निवेश एवं निर्यात मार्गदर्शिका को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में प्रस्तुत किया गया। हालांकि, अलग-अलग सुविधाओं और इंसेंटिव की विस्तृत शर्तों का ब्योरा इस घोषणा में नहीं दिया गया।

‘जल स्रोतों की उपलब्धता से MP में मत्स्य पालन की व्यापक संभावनाएं’

मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन की उत्पत्ति जल से हुई है और मध्यप्रदेश को नदियों का मायका कहा जाता है। प्रदेश में जल स्रोतों की उपलब्धता मत्स्य पालन के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 के बाद प्रदेश में सिंचाई क्षमता तेजी से बढ़ी है। देश का पहला नदी जोड़ो अभियान भी मध्यप्रदेश में शुरू हुआ। मुख्यमंत्री के अनुसार, जल संसाधनों की उपलब्धता और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार राज्य में मत्स्य पालन सहित जल आधारित आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने की संभावनाएं पैदा करता है। डॉ. यादव ने मौजूदा समय को देश और प्रदेश के लिए स्वर्णिम समय बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उनके मंत्री ‘नवरत्न’ की तरह काम कर रहे हैं।

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भारत दुग्ध उत्पादन में पहले और मत्स्य उत्पादन में दूसरे स्थान पर

केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा कि वर्ष 2019 में कृषि क्षेत्र से अलग मत्स्य पालन के लिए नया मंत्रालय बनने के बाद इस सेक्टर में प्रगति हुई है। उन्होंने बताया कि भारत दुग्ध उत्पादन में दुनिया में पहले और मत्स्य उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। बघेल ने केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह के विभाग के कार्यकाल को मत्स्य क्षेत्र के लिए ‘गोल्डन पीरियड’ बताया। उन्होंने कहा कि पहली बार फिशरीज सेक्टर में निजी निवेश और निर्यात को लेकर उद्योग जगत की भागीदारी बढ़ रही है। उनके मुताबिक मत्स्य क्षेत्र में निवेश और निर्यात को बढ़ावा मिलने से इस कारोबार से जुड़े लोगों के लिए नए अवसर तैयार हो सकते हैं।

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इनलैंड फिशरीज का देश के मत्स्य क्षेत्र में 75% योगदान

एसपी सिंह बघेल ने बताया कि देश के मत्स्य क्षेत्र में इनलैंड फिशरीज यानी अंतर्देशीय मत्स्य पालन का योगदान करीब 75 प्रतिशत है जबकि मरीन फिशरीज यानी समुद्री मत्स्य पालन की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ जैसे गैर-तटीय राज्य समुद्र नहीं होने के बावजूद अंतर्देशीय मत्स्य पालन और निर्यात के क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं। इन राज्यों में जलाशयों और अन्य जल स्रोतों के माध्यम से मत्स्य उत्पादन की संभावनाएं मौजूद हैं।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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