सीहोर में धूल-प्रदूषण से सांस के मरीजों की बढ़ी चिंता, जिला अस्पताल में चेस्ट क्लिनिक शुरू

सीहोर। शहर से लेकर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों तक खस्ताहाल सड़कों से उड़ती धूल लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। सड़क पर उड़ते धूल के गुबार, धुएं और बिगड़ती वायु गुणवत्ता के बीच सांस संबंधी समस्याओं को लेकर सतर्कता जरूरी हो गई है। इसी चुनौती से निपटने के लिए जिला अस्पताल सीहोर में विशेष चेस्ट क्लिनिक शुरू किया गया है। यहां नागरिकों को सांस और छाती से जुड़ी समस्याओं की जांच, उपचार तथा चिकित्सकीय परामर्श मिलेगा। क्लिनिक का संचालन 15 अक्टूबर से शुरू होकर 28 फरवरी 2027 तक किया जाएगा।
धूलभरी सड़कों से बढ़ रही परेशानी, सांस लेना हो रहा मुश्किल
शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में कई सड़कों की खराब हालत के कारण वाहनों की आवाजाही के दौरान धूल उड़ने की समस्या सामने आती रहती है। ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को धूल और धुएं के संपर्क से खांसी, सांस लेने में परेशानी तथा आंखों में जलन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। हालांकि, इन समस्याओं के पीछे किसी विशेष सड़क या प्रदूषण स्रोत की भूमिका की पुष्टि के लिए अलग से जांच जरूरी है। नागरिकों की सेहत से जुड़े इस मुद्दे पर सड़क की धूल नियंत्रित करने और नियमित सफाई जैसे उपायों पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
सांस और छाती की समस्याओं की होगी जांच
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुधीर कुमार डेहरिया ने बताया कि राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम (एनपीसीसीएचएच) के अंतर्गत यह विशेष पहल की गई है। क्लिनिक में सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी, चक्कर आना, आंखों में जलन और छाती से संबंधित शिकायतों वाले मरीजों की जांच की जाएगी। जरूरत के अनुसार उपचार, चिकित्सकीय परामर्श और नियमित फॉलो-अप की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
विशेषज्ञ डॉक्टरों और चिकित्सा उपकरणों की व्यवस्था
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, क्लिनिक में विशेषज्ञ डॉक्टरों, प्रशिक्षित स्टाफ और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की व्यवस्था की गई है। गंभीर मरीजों का अलग रिकॉर्ड रखा जाएगा, जिससे उनकी स्थिति पर नजर रखने और आगे के उपचार में मदद मिल सके। ग्रामीण क्षेत्रों में आशा एवं एएनएम कार्यकर्ताओं के माध्यम से मरीजों के फॉलो-अप की व्यवस्था भी की जाएगी।
एक्यूआई खराब होने पर सावधानी बरतने की सलाह
क्लिनिक में मरीजों को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) खराब होने पर जरूरी सावधानियों, मास्क के सही इस्तेमाल और धूम्रपान छोड़ने के संबंध में जानकारी दी जाएगी। नागरिकों को सलाह दी गई है कि धूल-धुएं के संपर्क को कम रखें और सांस संबंधी परेशानी होने पर लापरवाही न करें।
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बीमारी का इंतजार नहीं, समय पर कराएं जांच
डॉ. डेहरिया ने नागरिकों से अपील की है कि सांस, फेफड़े या हृदय से संबंधित परेशानी होने पर जिला अस्पताल के चेस्ट क्लिनिक में पहुंचकर जांच कराएं। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में धूल नियंत्रण के प्रयासों के साथ समय पर उपचार और जागरूकता भी जरूरी है, ताकि प्रदूषण से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सके।


















