एमपी में बिजली उपभोक्ताओं को झटका!FCPPA सरचार्ज बढ़ा, 2 करोड़ से ज्यादा यूजर्स पर पड़ेगा असर

जबलपुर। बिजली कंपनियों ने ईंधन और बिजली खरीद की बढ़ती लागत का हवाला देते हुए FCPPA सरचार्ज बढ़ा दिया है। इसके चलते 200 से 300 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं के बिल में 35 से 87 रुपए तक की बढ़ोतरी हो सकती है। दूसरी ओर कम बारिश के कारण जलविद्युत उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे कई इलाकों में बिजली आपूर्ति पर भी दबाव बढ़ गया है। बढ़ती मांग और घटते उत्पादन के बीच बिजली व्यवस्था को बनाए रखना कंपनियों के लिए चुनौती बन गया है।
FCPPA सरचार्ज बढ़ने से बढ़ेगा बिजली बिल
मध्यप्रदेश की बिजली कंपनियों ने फ्यूल कॉस्ट एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट (FCPPA) सरचार्ज 1.11 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.77 प्रतिशत कर दिया है। यानी पिछले महीने की तुलना में अब उपभोक्ताओं पर 2.66 प्रतिशत अतिरिक्त सरचार्ज लगाया जाएगा। यह बढ़ा हुआ शुल्क बिजली बिल के एनर्जी चार्ज पर लागू होगा। इसका सीधा असर प्रदेश के दो करोड़ से अधिक बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ेगा और आने वाले बिल पहले की तुलना में अधिक राशि के साथ पहुंचेंगे।
200 से 300 यूनिट खर्च करने वालों पर ज्यादा असर
बिजली कंपनियों के अनुसार बढ़े हुए सरचार्ज का असर सबसे अधिक उन उपभोक्ताओं पर दिखाई देगा, जिनकी मासिक खपत 200 से 300 यूनिट के बीच है। ऐसे उपभोक्ताओं के बिजली बिल में 35 से 87 रुपए तक की अतिरिक्त राशि जुड़ सकती है। कंपनियों का कहना है कि ईंधन की लागत और बिजली खरीद पर बढ़ते खर्च के कारण यह फैसला लेना आवश्यक हो गया था। इसके चलते घरेलू उपभोक्ताओं के मासिक बजट पर भी अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा।
24 जुलाई से लागू हुआ नया आदेश
एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी की ओर से जारी आदेश के अनुसार जुलाई 2026 के लिए FCPPA सरचार्ज 3.77 प्रतिशत तय किया गया है। यह फैसला बिजली सप्लाई और व्हीलिंग टैरिफ से जुड़े रेगुलेशन-2021 और उसके संशोधित प्रावधानों के तहत लिया गया है। कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक के निर्देश पर 24 जुलाई 2026 से यह सरचार्ज लागू कर दिया गया है। बिजली कंपनियों ने इसकी विस्तृत जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई है, ताकि उपभोक्ता नई व्यवस्था को समझ सकें।
कम बारिश से बिजली उत्पादन पर बढ़ा दबाव
प्रदेश में सामान्य से कम बारिश होने का असर अब बिजली उत्पादन पर भी साफ दिखाई देने लगा है। जलाशयों में पानी की आवक कम होने से कई जलविद्युत परियोजनाओं का उत्पादन प्रभावित हुआ है। बरगी, बाणसागर, इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर जैसी परियोजनाओं में उत्पादन सीमित होने के कारण ग्रामीण इलाकों में कई जगह रात के समय लंबे समय तक बिजली कटौती की जा रही है। जबलपुर और आसपास के जिलों के गांवों से भी रुक-रुककर बिजली आपूर्ति बाधित होने की शिकायतें सामने आई हैं।
बिजली की मांग में एक साल में 37 प्रतिशत का उछाल
बिजली कंपनियों का कहना है कि प्रदेश में बिजली की मांग लगातार तेजी से बढ़ रही है, जबकि उत्पादन क्षमता पर दबाव बना हुआ है। 27 जुलाई 2025 को प्रदेश में अधिकतम बिजली मांग 10,024 मेगावाट थी, जो 27 जुलाई 2026 को बढ़कर 13,757 मेगावाट तक पहुंच गई। यानी एक साल में मांग में करीब 37 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं पूर्वी मध्यप्रदेश के करीब 15 जिलों में सामान्य से लगभग 18 प्रतिशत कम बारिश होने से जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाया है। ऐसे हालात में बिजली उत्पादन और आपूर्ति दोनों को संतुलित रखना बिजली कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।












