मूंग फसल को सुखाने वाले जहारीले कीटनाशक पैराक्वेट डाइक्लोराइड पर प्रतिबन्ध

भोपाल। मूंग फसल को सुखाने के लिए इस्तेमाल होने वाले केमिकल पैराक्वेट डाइक्लोराइड पर राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। साथ ही निर्माता कंपनियों से कहा गया है कि बचा हुआ स्टॉक तत्काल नष्ट कर दें। इसको खुलेआम सफाया के नाम से बेचा जाता है। इसे 'ग्रामोक्सोन' जैसे ट्रेड नाम से भी जाना जाता है। दुनिया के लगभग 70 देशों में इसका उपयोग पहले से प्रतिबंधित है। इस जहरीले खरपतवार नाशक के मूंग फसल पर अंधाधुंध इस्तेमाल के बारे में पीपुल्स समाचार ने 10 जून 2025 को जहरीली हुई बीमारी में ताकत देने वाली मंग शीर्षक से प्रकाशित समाचार में खुलासा किया था।
पीपुल्स समाचार ने 10 जून 2025 को केमिकल वाली मूंग का मुद्दा प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
दरअसल भारत सरकार ने पहले ही प्रतिबंध लगाने की अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके बाद राज्य के किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग ने निर्माण करने वाली कंपनियों द्वारा विक्रय और भण्डारण पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। वहीं जिन निर्माताओं के पास पैराक्वेट डायक्लोराइड के पंजीकरण प्रमाण पत्र है उन्हें तत्काल केन्द्रीय कीटनाशी बोर्ड और पंजीकरण समिति को वापस करने के निर्देश दिए हैं। कीटनाशक के बचे स्टाक को वापस बुलाकर नियम, प्रक्रिया अनुसार नष्ट करने के भी निर्देश दिए हैं।
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24 घंटे में सुखा देता है मूंग फसल को
किसान इसको सफाया के नाम से खरीदते हैं, जिसको मूंग फसल पर छिड़काव किया जाता है। इससे सिर्फ 24 घंटे में ही मूंग फसल सहित घास आदि सूख जाती है। जिससे किसान एक साथ सारी फसल काट लेते हैं। हालांकि इसके प्रभाव से मूंग सहित खेत की मिटटी तक विषाक्त हो जाती है। इसके शरीर में जाने या संपर्क में आने से फेफड़े और गुर्दे (किडनी) गंभीर रूप से खराब हो जाते हैं। इसका कोई एंटीडोट उपलब्ध नहीं है।
कोई बिक्री करता मिला तो सख्त कार्रवाई होगी
इस बारे में कृषि विभाग के संचालक उमाशंकर भार्गव ने कहा कि केमिकल पैराक्वेट डाइक्लोराइड निर्माण और बिक्री पर पूरी तरह से रोक है, तत्काल सारा स्टॉक नष्ट करना होगा। अगर किसी दुकान या किसी भी माध्यम से बिक्री होती मिली तो सख्त कार्रवाई होगी।




















