अमरकंटक के जूना अखाड़ा संत हत्याकांड में दोषी को उम्रकैद, 10 हजार रुपए जुर्माना

अनूपपुर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धनकुमार कड़ोपे की अदालत ने दोषी पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने सजा सुनाने के बाद दोषी को तत्काल जेल भेजने के निर्देश दिए।
सामाजिक गतिविधियों के विरोध से बढ़ी थी रंजिश
मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, संत दादा अलबेले भोलगिरी खड़ेश्वरी महाराज क्षेत्र में शराब, मांसाहार और महिलाओं के प्रति अनुचित व्यवहार का विरोध करते थे। बताया जा रहा है कि संत की इन गतिविधियों को लेकर आरोपी वीरेंद्र सिंह खटेट उनसे नाराज था। इसी विरोध के चलते दोनों के बीच रंजिश बढ़ने और बाद में विवाद हत्या तक पहुंचने की बात सामने आई। संत की हत्या की घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश था और मामले में कठोर सजा की मांग की जा रही थी।
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साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सुनाया फैसला
राजेंद्रग्राम के अतिरिक्त सत्र न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन की दलीलों पर विचार करने के बाद वीरेंद्र सिंह खटेट को हत्या का दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) का जिक्र
उपलब्ध विवरण के अनुसार, दोषसिद्धि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) के तहत बताई गई है। इस धारा में हत्या के अपराध के लिए मृत्युदंड या आजीवन कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
संत समाज में फैसले को लेकर चर्चा
अमरकंटक धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है। यहां जूना अखाड़े से जुड़े संत की हत्या के मामले में सजा सुनाए जाने के बाद फैसले की चर्चा है। मामले में कठोर दंड की मांग कर रहे संत समाज और स्थानीय लोगों के लिए यह निर्णय महत्वपूर्ण है। अदालत के फैसले ने यह संदेश दिया है कि हत्या जैसे गंभीर अपराधों में दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार दंड दिया जाता है।




















