आष्टा की मुरम खदान बनी मौत का कुंड!चादर की अस्थायी नाव पलटी, एक की मौत, तीन तैरकर निकले

सीहोर। जिले के आष्टा थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत मुबारिकपुर मांडली में शनिवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। गोशाला के पास स्थित पुरानी मुरम खदान, जो बारिश का पानी भरने से गहरे तालाब में तब्दील हो चुकी थी, मछली पकड़ने पहुंचे चार किशोरों के लिए काल बन गई। पानी के बीचोंबीच पहुंचते ही उनकी अस्थायी नाव अचानक पलट गई। इस हादसे में तीन किशोर किसी तरह तैरकर बाहर निकल आए, लेकिन 14 वर्षीय दीपू पिता मुकेश निवासी डूकाकुई कन्नौद गहरे पानी में डूब गया।
बीच पानी में डगमगाया संतुलन
जानकारी के मुताबिक चारों किशोर बारिश से लबालब भरी मुरम खदान में मछली पकड़ने पहुंचे थे। खदान के गहरे हिस्से तक पहुंचने के लिए उन्होंने चादर की मदद से एक अस्थायी नाव बनाई थी। जैसे ही नाव पानी के बीच पहुंची, संतुलन बिगड़ गया और नाव पलट गई। तीन साथी किसी तरह तैरकर किनारे तक पहुंच गए, लेकिन दीपू गहरे पानी में समा गया। साथियों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण दौड़े और तुरंत पुलिस को सूचना दी।
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गोताखोरों की मदद से चला रेस्क्यू ऑपरेशन
सूचना मिलते ही एसडीएम महेंद्र प्रताप सिंह किरार, थाना प्रभारी गिरीश दुबे और पुलिस बल मौके पर पहुंचा। स्थानीय गोताखोरों को तुरंत पानी में उतारा गया। लंबे रेस्क्यू अभियान के बाद किशोर का शव खदान से बाहर निकाला जा सका। थाना प्रभारी गिरीश दुबे ने बताया कि पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल आष्टा भेजा गया और मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है।
खुली पड़ी खदानों पर उठे सुरक्षा के सवाल
हादसे के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा गया। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की कई गिट्टी और मुरम खदानें खनन के बाद खुली छोड़ दी जाती हैं, जो बरसात में गहरे पानी से भरकर मौत के कुंड में बदल जाती हैं। न तो इनके चारों ओर फेंसिंग की गई है और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सुरक्षा मानकों की लगातार अनदेखी के कारण क्षेत्र में जानें जा रही हैं।
कुछ दिन पहले भी दो बच्चों की हो चुकी है मौत
ग्रामीणों के अनुसार इसी क्षेत्र के बापचा दोनिया गांव के पठार पर स्थित एक अन्य खदान में भी कुछ दिन पहले डूबने से दो बच्चों की मौत हो चुकी है। बार-बार हो रहे हादसों के बावजूद जिम्मेदार विभागों और खदान संचालकों ने अब तक कोई ठोस सुरक्षा व्यवस्था नहीं की, जिससे लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
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संचालकों पर सख्त कार्रवाई की उठी मांग
हादसे के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जिन खदानों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया, उनके संचालकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। लोगों की मांग है कि खुले गहरे गड्ढों के चारों ओर फेंसिंग, बाउंड्री वॉल और चेतावनी बोर्ड अनिवार्य किए जाएं, साथ ही लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारों के विरुद्ध गैर इरादतन हत्या सहित कठोर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।












