लखनऊ अग्निकांड में कोर्ट सख्त:4 आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत, सीने में दर्द की दलील फेल

लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए दर्दनाक कोचिंग अग्निकांड मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों को मंगलवार को जिला मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया।
इस हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि बिल्डिंग के निर्माण से लेकर सुरक्षा इंतजामों तक कई गंभीर लापरवाहियां बरती गई थीं, जिसके कारण यह हादसा इतना बड़ा बन गया।
बिल्डिंग मालिक ने बीमारी का बनाया बहाना
मामले में गिरफ्तार बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला ने जेल जाने से बचने के लिए सीने में दर्द और दिल की बीमारी की शिकायत की। पुलिस ने उनकी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तुरंत मेडिकल जांच करवाई।
उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने कई जरूरी परीक्षण किए। जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि उनकी हालत सामान्य है और उन्हें किसी तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्या नहीं है। मेडिकल रिपोर्ट में स्वस्थ पाए जाने के बाद उन्हें भी अन्य आरोपियों के साथ जेल भेज दिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून के अनुसार सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और किसी को भी राहत नहीं दी जाएगी।
यह भी पढ़ें: दिल्ली में फिर उठीं लपटें! उद्योग भवन के पास भड़की भीषण आग, 200 आशियाने जलकर खाक, घंटों तक चला रेस्क्यू
किन-किन लोगों को किया गया गिरफ्तार?
लखनऊ पुलिस ने इस मामले में कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें बिल्डिंग के मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला के अलावा एनिमेशन और गेमिंग जोन के संचालक तुषार जायसवाल, पेट शॉप के मालिक रामकृष्ण उपाध्याय और नेटवर्किंग का काम करने वाले सुरेश कुमार साहू शामिल हैं।
पुलिस ने चारों आरोपियों से लंबी पूछताछ की। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं। इसके बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से सभी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
आग ने कैसे ली 15 लोगों की जान?
सोमवार को अलीगंज स्थित एक बहुमंजिला इमारत में अचानक भीषण आग लग गई थी। आग इतनी तेजी से फैली कि बिल्डिंग के अंदर मौजूद छात्र, कर्मचारी और अन्य लोग बाहर निकलने का मौका नहीं पा सके। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ ही मिनटों में पूरी इमारत धुएं से भर गई थी। अंदर फंसे लोग मदद के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन सुरक्षित बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिलने के कारण कई लोग दम घुटने और आग की चपेट में आने से जान गंवा बैठे। इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। घायलों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है।
यह भी पढ़ें: इंदौर में गैस पाइपलाइन ब्लास्ट : सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर समेत 4 लोग झुलसे, इलाके में फैली दहशत
जांच में सामने आईं कई बड़ी लापरवाहियां
हादसे के बाद प्रशासन और पुलिस की जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। अधिकारियों के अनुसार जिस इमारत में आग लगी थी, वह मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए बनाई गई थी।
बाद में इस बिल्डिंग का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जाने लगा। यहां कोचिंग सेंटर, गेमिंग जोन और अन्य व्यवसाय संचालित किए जा रहे थे। इसके बावजूद जरूरी नियमों का पालन नहीं किया गया। हाउस टैक्स से जुड़े दस्तावेजों में भी यह इमारत अभी तक आवासीय भवन के रूप में दर्ज थी। यानी वास्तविक उपयोग और सरकारी रिकॉर्ड में बड़ा अंतर पाया गया।
फायर एनओसी तक नहीं ली गई थी
जांच में यह भी सामने आया कि इमारत के लिए आवश्यक फायर एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) नहीं लिया गया था। किसी भी व्यावसायिक भवन के लिए अग्नि सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। लेकिन इस बिल्डिंग में न तो पर्याप्त अग्निशमन उपकरण मौजूद थे और न ही आपातकालीन स्थिति से निपटने की कोई प्रभावी व्यवस्था थी। यही वजह रही कि आग लगने के बाद हालात तेजी से बेकाबू हो गए।
एक ही रास्ता बना मौत का कारण
जांच रिपोर्ट में सबसे गंभीर खामी बिल्डिंग के डिजाइन को माना जा रहा है। इमारत में आने-जाने के लिए केवल एक ही मुख्य रास्ता था। आग लगने के दौरान यही रास्ता धुएं और लपटों से भर गया। इससे अंदर मौजूद लोग बाहर नहीं निकल पाए। किसी वैकल्पिक निकास द्वार या आपातकालीन सीढ़ी की व्यवस्था नहीं थी।
जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी
प्रशासन ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी के लिए और कौन-कौन जिम्मेदार हैं। अधिकारियों का कहना है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही प्रदेशभर में ऐसे भवनों की जांच भी शुरू की जा सकती है, जहां बिना सुरक्षा मानकों के व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।











