Parliament Monsoon Session:एंटी पेपर लीक बिल पर कल होगी चर्चा, कल तक के लिए स्थगित हुई लोकसभा

पेपर लीक विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनने के बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ेगी। इस दौरान अलग-अलग राजनीतिक दल विधेयक के प्रावधानों पर अपने सुझाव और संशोधन भी रखेंगे। चर्चा पूरी होने के बाद सरकार जवाब देगी और फिर विधेयक को सदन की स्वीकृति के लिए पेश किया जाएगा।
लोकसभा अध्यक्ष की पहल से बनी सहमति
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही के दौरान सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि पेपर लीक का मुद्दा देश के करोड़ों विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर व्यापक और सार्थक चर्चा होनी चाहिए। इसके बाद उन्होंने विभिन्न दलों के फ्लोर लीडर्स से अलग-अलग बातचीत की। इसी पहल का परिणाम रहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों मंगलवार को विधेयक पर चर्चा के लिए तैयार हो गए।
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एंटी पेपर लीक बिल पर होगी चर्चा
सभी दलों की सहमति बनने के बाद अब 28 जुलाई को लोकसभा में पेपर लीक बिल पर विस्तृत चर्चा होगी। इस दौरान अलग-अलग राजनीतिक दल अपने सुझाव और संभावित संशोधन सदन के सामने रखेंगे। सरकार भी इन सुझावों पर अपना पक्ष रखेगी। चर्चा पूरी होने के बाद विधेयक को सदन की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।
परीक्षा माफिया पर शिकंजा कसने की तैयारी
यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल, संगठित परीक्षा माफिया और अन्य अनुचित गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से लाया गया है। सरकार का मानना है कि इस कानून के लागू होने से प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता मजबूत होगी। साथ ही लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा भी परीक्षा व्यवस्था पर बढ़ेगा।
आज हंगामे के कारण टल गई थी चर्चा
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार, 27 जुलाई को लोकसभा में पेपर लीक विरोधी बिल पेश किया था विधेयक पेश होने के दौरान सत्तापक्ष के सदस्यों ने मेज थपथपाकर समर्थन जताया। लोकसभा अध्यक्ष ने संशोधन प्रस्तुत करने के लिए दोपहर एक बजे तक का समय भी दिया था। हालांकि विपक्ष के हंगामे के कारण उसी दिन इस पर चर्चा नहीं हो सकी और मामला अगले दिन के लिए टाल दिया गया।
सरकार और विपक्ष के बीच बनी सहमति
सरकार और विपक्ष के बीच बनी सहमति को संसदीय परंपराओं के लिहाज से सकारात्मक माना जा रहा है। महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दे पर चर्चा के लिए सभी दलों का एक साथ आना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।












